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जलप्रलय के बीच ईशा फाउंडेशन के लोग लापता सद्गुरु ने बताई स्थिति

Ratna Netam
26 Aug 2026 9:19 PM IST
जलप्रलय के बीच ईशा फाउंडेशन के लोग लापता सद्गुरु ने बताई स्थिति
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नेपाल : तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। अचानक आई फ्लैश फ्लड की चपेट में कई इलाके आ गए हैं। इस प्राकृतिक आपदा में **कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए ईशा फाउंडेशन के 77 श्रद्धालुओं के फंसने या लापता होने की खबर** सामने आई है। घटना के बाद ईशा फाउंडेशन के संस्थापक **सद्गुरु जग्गी वासुदेव** ने चिंता जताते हुए बचाव अभियान में हरसंभव मदद करने की बात कही है।
बताया जा रहा है कि कैलाश यात्रा से लौट रहे श्रद्धालु तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में स्थित इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद थे, तभी अचानक आई बाढ़ ने वहां तबाही मचा दी। बाढ़ के तेज बहाव में इमारत और आसपास का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ।
ग्यिरोंग में अचानक आई बाढ़ से मची तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई अचानक बाढ़ ने कई लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। भोटे कोशी नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद आसपास के इलाकों में हालात बिगड़ गए।
ईशा फाउंडेशन के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े कई समूह इस क्षेत्र में मौजूद थे। वापसी के दौरान एक समूह इमिग्रेशन सेंटर पर रुका हुआ था, जहां अचानक बाढ़ आ गई।
इस घटना के बाद वहां मौजूद लोगों से संपर्क टूट गया, जिससे उनके परिजनों में चिंता बढ़ गई।
सद्गुरु ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
सद्गुरु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना की जानकारी साझा करते हुए कहा कि तिब्बत-चीन के ग्यिरोंग में भयानक और दुखद अचानक बाढ़ आई है। उनका एक कैलाश समूह इसकी चपेट में आ गया।
उन्होंने बताया कि वापसी के दौरान समूह के लोग इमिग्रेशन ऑफिस में थे, तभी बाढ़ आई। उन्होंने कहा कि इमारत और शहर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया है।
सद्गुरु ने कहा कि ईशा फाउंडेशन की टीम, स्वयंसेवक और सहायता दल प्रभावित लोगों की मदद के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
बचाव अभियान में जुटी टीम
सद्गुरु ने प्रभावित लोगों के परिवारों को भरोसा दिलाया कि बचाव के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह खुद हालात पर नजर बनाए हुए हैं और अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
प्राकृतिक आपदा के कारण प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त रास्ते और तेज पानी के बहाव के कारण राहत कार्यों में मुश्किलें आ रही हैं।
21 समूहों में गए थे श्रद्धालु
ईशा फाउंडेशन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस बार कई समूह गए थे। इनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे।
जानकारी के अनुसार, कई लोग सुरक्षित लौट चुके हैं, जबकि कुछ लोग अभी भी तिब्बत और नेपाल क्षेत्र में मौजूद हैं। वहीं 77 लोग इमिग्रेशन सेंटर की घटना के बाद प्रभावित बताए जा रहे हैं।
परिजनों में चिंता का माहौल
लापता श्रद्धालुओं के परिवारों में चिंता का माहौल है। लोग अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।
प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाने और संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
नेपाल में बाढ़ से व्यापक नुकसान
नेपाल में आई इस बाढ़ ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। कई सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। भारत समेत अन्य देशों के नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आने के बाद राहत और बचाव प्रयास तेज किए गए हैं।
कैलाश यात्रा पर बढ़ी चिंता
कैलाश मानसरोवर यात्रा को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा पर जाते हैं।
लेकिन पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलने के कारण यात्रियों को कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में यात्रा के दौरान मौसम और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी होती है।
सद्गुरु ने दिया भरोसा
सद्गुरु ने कहा कि इस कठिन समय में प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के दर्द को समझा जा सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बचाव कार्य में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने की बात कही है।
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