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Baghdad बगदाद। इराक के विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने कहा है कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) के बंदियों की सुरक्षा और उनके रखरखाव का पूरा आर्थिक बोझ इराक अकेले नहीं उठा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समस्या की जिम्मेदारी सभी संबंधित देशों की है और इसमें यूरोपीय संघ (ईयू) को भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
इराकी विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, हुसैन ने यह बात यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कालास से फोन पर बातचीत के दौरान कही। बातचीत में सीरिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई, खासकर कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) के नियंत्रण वाले जेलों से आईएस सदस्यों के हालिया फरार होने के मामलों पर चिंता जताई गई।
दोनों नेताओं ने सीरिया के उत्तर-पूर्वी हसाका प्रांत में संघर्षविराम बनाए रखने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही, एसडीएफ और सीरिया की अंतरिम सरकार के बीच वार्ता को समर्थन देने में यूरोप की सक्रिय भूमिका को अहम बताया गया, ताकि दोनों पक्षों के बीच बाध्यकारी समझौते हो सकें।
हुसैन ने अपनी हालिया ईरान यात्रा के नतीजों की भी जानकारी दी और मौजूदा “तनावपूर्ण और खतरनाक” क्षेत्रीय हालात के मद्देनजर ईयू के साथ संबंधों पर विचार साझा किए। वहीं, काजा कालास ने सीरिया से आईएस बंदियों को स्वीकार करने पर इराक सरकार की प्रारंभिक सहमति के लिए आभार जताया।
गौरतलब है कि हाल ही में इराक ने सीरिया से स्थानांतरित किए गए पहले 150 आईएस बंदियों को स्वीकार किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन बंदियों को हसाका स्थित हिरासत केंद्र से इराक के एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। यह कदम एक व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत भविष्य में करीब 7,000 आईएस बंदियों को इराक नियंत्रित जेलों में स्थानांतरित किया जा सकता है।
इससे पहले शुक्रवार को इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बातचीत के दौरान दुनिया के देशों, खासकर यूरोपीय संघ के सदस्य देशों से अपील की थी कि वे आईएस से जुड़े मामलों में हिरासत में लिए गए अपने नागरिकों को वापस लें।
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