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Delhi दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आत्मरक्षा के मुद्दे पर देश का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमताएं सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए हैं। उन्होंने पड़ोसी देशों की नीतियों और क्षेत्र में बढ़ते हथियारों की होड़ को लेकर सवाल उठाए। इस्माइल बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, ''इसमें कोई शक नहीं है कि क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा के लिए ईरान किसी भी दूसरे पक्ष से ज्यादा प्रतिबद्ध है। अगर खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) यह मानती है कि इस समस्या का समाधान उस देश से सुरक्षा मांगने में है, जो खुद सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा करता है, तो यह अपने असली लक्ष्य से भटकने और हाल के बुरे अनुभवों से सबक न सीखने का निराशाजनक संकेत है।
बाघेई ने कहा कि दक्षिणी पड़ोसी देशों से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने अपने मुस्लिम पड़ोसी के खिलाफ आक्रामक कदम क्यों उठाए, अच्छे पड़ोसी के रिश्तों के सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी नियमों का उल्लंघन क्यों किया? उन्होंने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ या वहां से मिसाइल हमले करने के लिए क्यों होने दिया? प्रवक्ता इस्माइल ने कहा कि दक्षिणी पड़ोसी देश विनाशकारी हथियारों की होड़ को क्यों नजरअंदाज करते हैं? वे सैकड़ों अरब डॉलर के आधुनिक हथियार क्यों खरीदते और जमा करते हैं, जिनके लिए कोई असली रक्षात्मक जरूरत दिखाई नहीं देती?
बाघेई ने कहा कि वे क्षेत्र के देशों के खिलाफ इजरायली कार्रवाई को क्यों अनदेखा करते हैं, जिसमें फिलिस्तीनी, लेबनानी और सीरियाई क्षेत्रों पर उसका कब्जा भी शामिल है?उन्होंने पूछा कि वे इजरायल के परमाणु हथियारों के भंडार पर चुप क्यों रहते हैं, जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में नहीं है? दूसरी तरफ, एक ऐसे देश की सामान्य रक्षा क्षमताओं को 'खतरा' बताया जाता है, जो बार-बार धमकियों और हमलों का सामना कर चुका है।
प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि सभी को यह साफ समझ लेना चाहिए कि ईरान की सैन्य क्षमताएं ईरानी लोगों के उस स्वाभाविक अधिकार को सुनिश्चित करती हैं, जिसके तहत वे हमले और अपराधों के खिलाफ अपनी रक्षा कर सकते हैं। साथ ही ये क्षमताएं क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भी मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्मान ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कोई समझौता या शर्त स्वीकार नहीं की जा सकती। जिस तरह आत्मरक्षा का बुनियादी अधिकार बहस का विषय नहीं हो सकता, उसी तरह इस रक्षा के साधनों को भी किसी के साथ सौदेबाजी या समझौते के लिए नहीं रखा जा सकता।
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