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ईरान की पाकिस्तान-तुर्की को चेतावनी, यमन में दखल पड़े तो भुगतेंगे अंजाम

nidhi
12 Oct 2026 7:19 AM IST
ईरान की पाकिस्तान-तुर्की को चेतावनी, यमन में दखल पड़े तो भुगतेंगे अंजाम
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यमन को लेकर ईरान का सख्त रुख
तेहरान: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने पाकिस्तान और तुर्किए को यमन के संघर्ष में सैन्य हस्तक्षेप करने को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के सक्रिय होने के बाद ईरान ने कहा है कि यमन में किसी भी बाहरी दखल के पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ईरान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच सैन्य टकराव तेज हुआ है।
5 अक्टूबर से सक्रिय हुआ रक्षा समझौता
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच अगस्त 2026 में मक्का में त्रिपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा।
हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे पर मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ने के बाद 5 अक्टूबर को समझौते के सामूहिक रक्षा प्रावधानों को लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए। पाकिस्तान और तुर्किए ने सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए सैन्य, तकनीकी और खुफिया सहयोग देने की तैयारी जताई है। हालांकि, सऊदी अरब की रक्षा में सहयोग करना और यमन के भीतर सैन्य अभियान में शामिल होना दो अलग बातें हैं।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पाकिस्तान की संभावित सैन्य तैनाती से जुड़ी खबरों पर प्रतिक्रिया दी। उनसे पूछा गया था कि क्या हजारों पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब भेजे जा सकते हैं। बघाई ने कहा कि ईरान ने भी ऐसी खबरें सुनी हैं और उम्मीद करता है कि वे सही नहीं होंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र के देश अच्छी तरह जानते हैं कि यमन के मामले में किसी भी हस्तक्षेप के अवांछित परिणाम हो सकते हैं। ईरानी प्रवक्ता ने यह उम्मीद भी जताई कि मक्का जैसे रक्षा समझौतों का इस्तेमाल मुस्लिम देशों के सामूहिक हितों के खिलाफ नहीं किया जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्री ने भी दिया बयान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रक्षा समझौते का सीधे नाम लिए बिना पड़ोसी देशों से आपसी सहयोग और आत्मनिर्भर सुरक्षा नीति अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों को वास्तविक भाईचारे और पारस्परिक विश्वास के आधार पर संबंध मजबूत करने चाहिए। अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के रक्षा समझौते ईरान की नीतियों को सीमित नहीं कर सकते। ईरान का मानना है कि यमन के संघर्ष में नए देशों की सैन्य भागीदारी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
ईरानी सांसदों ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य इब्राहिम रेजाई ने सऊदी अरब के रक्षा समझौते की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और तुर्किए के साथ समझौता करने से सऊदी अरब की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल सकती। उन्होंने अमेरिका के साथ सऊदी अरब के पुराने सुरक्षा संबंधों का भी उल्लेख किया।
वहीं, ईरानी सांसद अहमद नादेरी ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ यमन युद्ध में शामिल होता है, तो उसे निष्पक्ष मध्यस्थ के बजाय क्षेत्रीय हस्तक्षेप करने वाले देश के रूप में देखा जाएगा। ईरान के एक अन्य सांसद अलाउद्दीन बोरूजेर्दी ने चेतावनी दी कि यमन संघर्ष में पाकिस्तान और तुर्किए की भागीदारी उनके अपने हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे सवाल
पाकिस्तान ने हाल के महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। लेकिन सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग बढ़ने के बाद ईरान में पाकिस्तान की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पाकिस्तान की सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य सऊदी अरब की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस्लामाबाद ने सामूहिक रक्षा समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को दोहराया है। पाकिस्तान की ओर से यमन के भीतर किसी बड़े प्रत्यक्ष सैन्य अभियान में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
तुर्किए ने शुरू किया तकनीकी और सैन्य सहयोग
तुर्किए ने भी सऊदी अरब की रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। तुर्किए की सहायता में वायु रक्षा प्रणाली, ड्रोन संचालन से जुड़ी तकनीक, सैन्य उपकरण, खुफिया सहयोग और रसद सहायता शामिल हैं। तुर्किए के अधिकारियों ने इस सहयोग को मुख्य रूप से रक्षात्मक बताया है। हालांकि, यमन में संघर्ष बढ़ने के बीच यह सवाल बना हुआ है कि सहयोग की सीमा कहां तक रहेगी।तुर्किए में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस चल रही है। विपक्षी नेताओं ने संभावित सैन्य तैनाती के कानूनी आधार और यमन युद्ध में सीधे शामिल होने के जोखिम पर सवाल उठाए हैं।
यमन में बढ़ते संघर्ष से क्षेत्रीय चिंता
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच संघर्ष लंबे समय से जारी है। हाल के हमलों ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 9 अक्टूबर को यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की थी। इस बीच ईरान की चेतावनी से स्पष्ट है कि तेहरान पाकिस्तान और तुर्किए की संभावित आक्रामक सैन्य भूमिका का विरोध कर रहा है। फिलहाल तीनों देशों का रक्षा सहयोग आगे बढ़ रहा है, जबकि ईरान ने यमन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया है। आने वाले दिनों में यह महत्वपूर्ण होगा कि सैन्य सहयोग सऊदी अरब की सुरक्षा तक सीमित रहता है या यमन के भीतर अभियानों तक बढ़ता है।
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