
Tehran तेहरान : ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नेवी ने दावा किया है कि उसने ईरान के तटीय क्षेत्रों पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
IRGC नेवी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिकी हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई की गई और ईरानी तटीय क्षेत्रों के पास स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को टारगेट किया गया। हालांकि, इस हमले से जुड़े विस्तृत नुकसान या हताहतों की आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। इस कार्रवाई को क्षेत्रीय तनाव में एक बड़ा विकास माना जा रहा है।
इस बीच, ईरान की इस्लामिक कंसल्टेटिव असेंबली के सदस्य इब्राहिम अज़ीज़ी ने अमेरिका की नीतियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका सीजफायर या बातचीत की प्रक्रिया के प्रति गंभीर नहीं है और लगातार समझौतों का उल्लंघन कर रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इब्राहिम अज़ीज़ी ने कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच ईरान पर हमला किया है। उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह साबित कर दिया है कि बातचीत या युद्धविराम के सिद्धांतों के प्रति उनका कोई वास्तविक प्रतिबद्धता नहीं है।
The U.S. attacked Iran in the middle of negotiations once again.
— ابراهیم عزیزی (@Ebrahimazizi33) June 26, 2026
The failed U.S. President has shown he has no commitment to the principles of negotiation or a ceasefire.
This reckless violation of the ceasefire will, as always, lead to retreat and regret on their part.
The…
अपने बयान में अज़ीज़ी ने यह भी कहा कि सीजफायर का बार-बार उल्लंघन करना अंततः अमेरिका को पीछे हटने और पछताने की स्थिति में ले जाएगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अब “ब्लेम गेम” यानी एक-दूसरे पर आरोप लगाने की रणनीति काम नहीं करेगी, क्योंकि वास्तविकता सामने आ चुकी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। हाल के हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के प्रयास नहीं किए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
IRGC की ओर से अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के दावे के बाद पश्चिम एशिया में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। क्षेत्रीय देशों की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी पक्ष की ओर से इस हमले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले से ही तनावपूर्ण हालात को और जटिल बना देती हैं। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद अब सैन्य टकराव की स्थिति की ओर संकेत कर रहे हैं, जो वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डाल सकते हैं।
ईरानी नेता इब्राहिम अज़ीज़ी के बयान को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने अमेरिका पर बातचीत की प्रक्रिया को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया है। उनका यह बयान ईरान की आधिकारिक नाराजगी को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, IRGC द्वारा अमेरिकी ठिकानों पर हमले के दावे और ईरानी सांसद के तीखे बयान ने ईरान-अमेरिका संबंधों में तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास अहम भूमिका निभा सकते हैं।





