
World:ईरान और अमेरिका के बीच पिछले 108 दिनों से जारी भीषण संघर्ष, हमलों, जवाबी कार्रवाइयों और कूटनीतिक तनाव के बाद अब शांति समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति देखने को मिल रही है। दोनों देशों के बीच समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है और 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। 15 जून को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने युद्ध समाप्ति की दिशा में समझौते की घोषणा की।
फरवरी 2026: संघर्ष की शुरुआत:28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़ा हमला किया। इस हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर और कई अहम ठिकाने प्रभावित हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।
मार्च 2026: जवाबी हमले और बढ़ता तनाव
1 मार्च को ईरान ने UAE में जवाबी हमला किया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हुई।
5 मार्च से ईरान ने अमेरिका और इजराइल ठिकानों पर मिसाइल हमले तेज किए।
7 मार्च को ईरान ने अमेरिका की आत्मसमर्पण मांग ठुकरा दी।
17–18 मार्च के बीच दोनों पक्षों के हमलों में कई बड़े नुकसान हुए।
20 मार्च तक खाड़ी देशों में भी तनाव फैल गया।
अप्रैल 2026: कूटनीति और नाकेबंदी
6 अप्रैल को ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी।
8 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी।
12 अप्रैल को वार्ता विफल रही और होर्मुज पर नाकेबंदी शुरू हुई।
22 अप्रैल तक कई जहाजों और तेल मार्गों पर हमले हुए।
मई 2026: लगातार हमले और मध्यस्थता
1 मई को ईरान ने नया शांति प्रस्ताव दिया।
8 मई को अमेरिकी कार्रवाई में ईरानी टैंकर निष्क्रिय किए गए।
18–19 मई के बीच ट्रंप ने युद्ध रोकने और वार्ता जारी रखने की बात कही।
24 मई तक समझौते के संकेत मिलने लगे।
जून 2026: अंतिम चरण में वार्ता
1 जून से 11 जून तक खाड़ी क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रही।
10 जून को अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत की घटना सामने आई।
15 जून को ट्रंप ने घोषणा की कि युद्ध समाप्त करने का समझौता अंतिम चरण में है।
समझौते की तैयारी:अब दोनों देशों के बीच शांति समझौता लगभग तय माना जा रहा है, जिसे 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप दिया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की भूमिका के बाद स्थिति में सुधार देखा जा रहा है।





