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ईरान ने बदली सैन्य रणनीति, जरूरत पड़ी तो दुश्‍मन की कार्रवाई से पहले करेंगे हमला : सेना के प्रवक्ता

Shantanu Roy
8 Oct 2026 11:29 AM IST
ईरान ने बदली सैन्य रणनीति, जरूरत पड़ी तो दुश्‍मन की कार्रवाई से पहले करेंगे हमला : सेना के प्रवक्ता
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ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर ईरान दुश्मन के किसी भी हमले को रोकने के लिए पहले से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

तेहरान, 8 अक्टूबर । ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर ईरान दुश्मन के किसी भी हमले को रोकने के लिए पहले से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। समाचार एजेंसी स‍िन्हुआ के मुताबिक, अकरमिनिया ने यह बात ईरान की सेमी-ऑफिशियल न्यूज एजेंसी फार्स को दिए एक इंटरव्यू में कही। उन्होंने कहा कि ईरानी सशस्त्र बल पहले भी दुश्मन के खिलाफ ऐसी कार्रवाई कर चुके हैं। ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति को रक्षात्मक से बदलकर आक्रामक कर दिया है और अमेरिका तथा इजरायल के साथ हुए युद्ध में इसी रणनीति पर काम किया गया।

उन्होंने कहा कि नई रणनीति के तहत ईरानी सशस्त्र बलों ने कई सैन्य अभियान चलाए हैं। इनमें जुलाई के आखिर में जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला भी शामिल है। इसके अलावा पिछले कुछ महीनों में इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र में मौजूद उन समूहों के ठिकानों पर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिन्हें ईरान 'क्रांति विरोधी और अलगाववादी' बताता है। अकरमिनिया ने कहा कि अमेरिकी सैन्य अड्डे पर किया गया हमला पहले से की गई कार्रवाई थी। उन्होंने दावा किया, "इस हमले से हमने उनसे पहल करने का मौका छीन लिया और वे कोई कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं रहे। उन्होंने कहा कि जरूरत, तुरंत कार्रवाई और हमले के अनुपात जैसे सिद्धांतों का पालन करते हुए पहले से सैन्य कार्रवाई करना 'वैध' माना जाता है।

अमेरिका की ओर से ईरान पर संभावित जमीनी हमले के सवाल पर अकरमिनिया ने कहा, "मेरा आकलन है कि अमेरिका जमीनी हमला करने की हिम्मत नहीं करेगा। अमेरिका और इजरायल के साथ हुए युद्ध के बाद ईरानी सेना ने अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता बढ़ाने पर काम करने का फैसला किया है। इस युद्ध के दौरान हम इस नतीजे पर पहुंचे कि हमें अपनी मिसाइलों की रेंज निश्चित तौर पर बढ़ानी होगी और अब हमने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह यह है कि दुश्मन ने अपनी सेनाओं को ईरान के तटों से ज्यादा दूरी पर, करीब एक हजार किलोमीटर दूर तक तैनात किया है। इसलिए ईरान अपनी मिसाइलों को लगातार अपग्रेड करता रहेगा। अकरमिनिया ने कहा कि ईरान ने अपनी मिसाइलों की रफ्तार और सटीकता में भी काफी सुधार किया है। उन्होंने दावा किया कि आने वाली नई मिसाइलें पहले से ज्यादा तेज और सटीक होंगी।

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और ईरान के दूसरे शहरों पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के साथ-साथ क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाते हुए कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए। साथ ही ईरान ने होर्मुज स्‍ट्रेट पर अपनी पकड़ और सख्त कर दी। इसके बाद 8 अप्रैल को संघर्ष में शामिल पक्षों के बीच सीजफायर हुआ। 18 जून को ईरान और अमेरिका ने क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने को लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करके किसी अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह समयसीमा 17 अगस्त को खत्म हो गई। हालांकि, लगातार बढ़ते तनाव के बीच दोनों पक्ष किसी समझौते की दिशा में पर्याप्त प्रगति नहीं कर सके।


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