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ईरान के मशहद एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिर शुरू करने को मंजूरी

SHIDDHANT
19 April 2026 11:25 PM IST
ईरान के मशहद एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिर शुरू करने को मंजूरी
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Tehran तेहरान। ईरान की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने रविवार को कहा कि उसने सोमवार से उत्तर-पूर्वी प्रांत खोरासन रजावी में मशहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इंटरनेशनल फ्लाइट्स फिर से शुरू करने की मंजूरी दे दी है। स‍िन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अथॉरिटी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में बताया कि यह फैसला पहले की उस घोषणा के बाद लिया गया है, जिसमें कहा गया था कि पूर्वी ईरान का हवाई क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दोबारा खोल दिया गया है।
बयान में यह भी कहा गया कि कुछ एयरपोर्ट्स ने शनिवार सुबह सात बजे (स्थानीय समय) से काम करना फिर शुरू कर दिया है। एजेंसी ने बताया कि अभी घरेलू उड़ानों के टिकट बेचने की इजाजत नहीं दी गई है। ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था, जिससे पूरे देश में नागरिक उड्डयन सेवाएं रुक गई थीं। एविएशन अथॉरिटी ने कहा कि जैसे ही सैन्य और नागरिक अधिकारियों की तकनीकी और ऑपरेशनल तैयारियां पूरी हो जाएंगी, वैसे-वैसे एयरपोर्ट्स पर फ्लाइट सेवाएं सामान्य होती जाएंगी।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने रविवार को यह भी संकेत दिया कि अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में कुछ 'प्रगति' हुई है, लेकिन उसने यह भी कहा कि अंतिम समझौता अभी काफी दूर है। फिलहाल दो हफ्ते का सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने कहा कि तेहरान एक तरफ कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है, लेकिन साथ ही किसी भी सैन्य टकराव के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने विरोधियों पर भरोसा नहीं करता और किसी भी बढ़ते तनाव का जवाब देने के लिए तैयार है।
शनिवार को टीवी पर दिए गए संबोधन में उन्होंने कहा कि हालिया संघर्ष बातचीत के दौरान ही शुरू हुआ, और उन्होंने अमेरिका पर 'धोखे' का आरोप लगाया। कलीबाफ ने कहा कि ईरान ने 'मैदान में भी और कूटनीति में भी' सफलता हासिल की है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि तनाव कभी भी बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है और साथ ही हर जरूरी कदम के लिए पूरी तैयारी भी है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान अपने विरोधियों पर भरोसा नहीं करता, लेकिन वह स्थायी शांति चाहता है और ऐसे भरोसेमंद आश्वासन चाहता है जिससे बार-बार युद्ध, सीजफायर और फिर संघर्ष का सिलसिला खत्म हो सके।
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