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फ्रांस पहुंचा INS त्रिशूल वरुण अभ्यास में दिखाएगा ताकत

Ratna Netam
24 Sept 2026 3:59 PM IST
फ्रांस पहुंचा INS त्रिशूल वरुण अभ्यास में दिखाएगा ताकत
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नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट INS त्रिशूल भारत और फ्रांस की नौसेनाओं के बीच होने वाले द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘वरुण’ के 24वें संस्करण में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस पहुंच गया है। INS त्रिशूल 22 सितंबर को फ्रांस के प्रमुख नौसैनिक केंद्र टूलॉन पहुंचा। इस अभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाएं बंदरगाह और समुद्र में कई पेशेवर गतिविधियों में हिस्सा लेंगी। इसका प्रमुख उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, परिचालन क्षमता और समुद्री सहयोग को मजबूत करना है।भारतीय नौसेना के अनुसार, वरुण अभ्यास भारत और फ्रांस के बीच मजबूत होती रणनीतिक तथा समुद्री साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दोनों देशों की नौसेनाएं लंबे समय से इस द्विपक्षीय अभ्यास के माध्यम से अपने परिचालन अनुभव और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करती रही हैं। इस बार INS त्रिशूल भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व करेगा।
अभ्यास में बंदरगाह और समुद्र दोनों चरण शामिल होंगे। बंदरगाह चरण के दौरान भारतीय और फ्रांसीसी नौसेना के अधिकारी तथा नाविक पेशेवर बातचीत, क्रॉस-डेक विजिट और अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच खेलकूद की गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों को भी मजबूत करना है। एक-दूसरे के जहाजों और उनकी कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिलने से समुद्र में संयुक्त अभियान के दौरान बेहतर तालमेल विकसित करने में मदद मिलती है।
समुद्र में होगा परिचालन क्षमताओं का अभ्यास
बंदरगाह चरण के बाद समुद्री चरण में दोनों नौसेनाएं विभिन्न परिचालन गतिविधियों का अभ्यास करेंगी। इस दौरान समुद्र में अलग-अलग परिस्थितियों में संयुक्त रूप से काम करने और एक-दूसरे की प्रक्रियाओं को समझने पर जोर रहेगा।द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में इंटरऑपरेबिलिटी यानी दो अलग-अलग देशों की सेनाओं के एक साथ प्रभावी तरीके से अभियान चलाने की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वरुण अभ्यास भी इसी दिशा में भारत और फ्रांस की नौसेनाओं को अपनी प्रक्रियाओं और अनुभवों को साझा करने का अवसर देता है।INS त्रिशूल जैसे गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट की भागीदारी अभ्यास के परिचालन पहलू को महत्वपूर्ण बनाती है। भारतीय नौसेना के युद्धपोत लंबी दूरी के अभियानों और अलग-अलग समुद्री परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किए जाते हैं।
भारत और फ्रांस की पुरानी समुद्री साझेदारी
भारत और फ्रांस के बीच नौसैनिक सहयोग कई वर्षों पुराना है। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच द्विपक्षीय अभ्यास की शुरुआत 1993 में हुई थी। वर्ष 2001 में इसे ‘वरुण’ नाम दिया गया। इसके बाद से यह अभ्यास दोनों देशों के रक्षा और समुद्री सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।समय के साथ वरुण अभ्यास का दायरा भी बढ़ा है। दोनों नौसेनाओं के बीच जटिल समुद्री अभियानों का अभ्यास करने के साथ तकनीकी और परिचालन अनुभव साझा करने पर जोर दिया जाता रहा है।भारत और फ्रांस हिंद महासागर क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार हैं। दोनों देश समुद्री सुरक्षा, सुरक्षित समुद्री मार्ग और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं।
क्रॉस-डेक विजिट से समझेंगे एक-दूसरे की कार्यप्रणाली
इस बार अभ्यास के बंदरगाह चरण में होने वाली क्रॉस-डेक विजिट भी महत्वपूर्ण रहेगी। इसमें एक नौसेना के अधिकारी और नाविक दूसरी नौसेना के जहाज पर जाकर उसकी कार्यप्रणाली, उपकरणों और परिचालन प्रक्रियाओं को समझते हैं।इस तरह की गतिविधियों से दोनों पक्षों को अपनी सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां साझा करने का मौका मिलता है। साथ ही यह भी समझने में मदद मिलती है कि संयुक्त अभियान की स्थिति में दोनों नौसेनाएं किस प्रकार बेहतर समन्वय स्थापित कर सकती हैं।ऑपरेशनल बातचीत के दौरान विभिन्न समुद्री परिस्थितियों में काम करने के अनुभव और प्रक्रियाओं पर चर्चा की जाएगी। दोनों पक्षों के कर्मियों के बीच खेल गतिविधियों का उद्देश्य आपसी संपर्क और सौहार्द बढ़ाना है।
INS त्रिशूल की अहम भूमिका
INS त्रिशूल भारतीय नौसेना का गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है। यह तलवार श्रेणी के युद्धपोतों में शामिल है और भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जहाज को अलग-अलग प्रकार के समुद्री अभियानों को अंजाम देने के लिए तैयार किया गया है।अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में भारतीय युद्धपोतों की भागीदारी से नौसेना को अलग-अलग देशों की सेनाओं के साथ काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। इससे लंबी दूरी की तैनाती, संयुक्त अभियान और समुद्री सहयोग से जुड़ी क्षमताओं को भी मजबूत करने का अवसर मिलता है।
रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग उनकी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख आधार है। नौसेनाओं के बीच नियमित संपर्क और संयुक्त अभ्यास दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों को दर्शाते हैं।वरुण अभ्यास के जरिए दोनों नौसेनाएं परिचालन अनुभव साझा करने के साथ समुद्री क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी समझ विकसित करती हैं। नियमित अभ्यास से जरूरत पड़ने पर संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता भी बेहतर होती है।टूलॉन में INS त्रिशूल का पहुंचना इसी सहयोग की अगली कड़ी है। वरुण के 24वें संस्करण के दौरान बंदरगाह और समुद्र में होने वाली गतिविधियों के जरिए भारतीय और फ्रांसीसी नौसेना अपने पेशेवर संबंधों को और मजबूत करने का प्रयास करेंगी। अभ्यास का फोकस परिचालन अनुभव साझा करने, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने और दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ को मजबूत करने पर रहेगा।
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