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Boston बोस्टन। भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप (एसटीएस) आईएनएस सुदर्शिनी बोस्टन पहुंच गया है। यहां वह सेल बोस्टन 2026 के तहत होने वाली 'परेड ऑफ सेल' में हिस्सा लेगा। इस कार्यक्रम में 20 से ज्यादा देशों के 60 से अधिक बड़े पारंपरिक जहाज शामिल हो रहे हैं। भारतीय नौसेना ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "लोकायन26, बोस्टन में तिरंगा! न्यूयॉर्क में शानदार समारोह के बाद आईएनएस सुदर्शिनी 12 जुलाई 2026 को बोस्टन पहुंचा। यहां वह सेल बोस्टन 2026 की ग्रैंड परेड ऑफ सेल्स में 20 से ज्यादा देशों के 60 से अधिक शिप के साथ हिस्सा लेगा।"
उन्होंने बताया कि बोस्टन में भारत के महावाणिज्य दूत रघुराम शास्त्री ग्रैंड परेड ऑफ सेल्स और जहाज के औपचारिक स्वागत के लिए आईएनएस सुदर्शिनी पर सवार हुए। उन्होंने कहा, "नॉरफॉक से बोस्टन तक, लोकायन 2026 अभियान भारत की समुद्री विरासत और दोस्ती का संदेश दुनियाभर में लेकर आगे बढ़ रहा है। इससे पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने 4 जुलाई को न्यूयॉर्क में आयोजित इंटरनेशनल नेवल रिव्यू 250 और सेल 250 समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। ये कार्यक्रम अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किए गए थे। अब यह जहाज समुद्री सहयोग, दोस्ती और सद्भाव का संदेश लेकर बोस्टन पहुंचा है, जहां वह सेल बोस्टन 2026 में हिस्सा लेगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईएनएस सुदर्शिनी ने आठ जुलाई को न्यूयॉर्क का अपना दौरा सफलतापूर्वक पूरा किया। यह उसके चल रहे लोकायन 2026 समुद्री अभियान का एक और अहम पड़ाव रहा। मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा के दौरान भारत की समृद्ध समुद्री विरासत दुनिया के सामने पेश की गई और भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक और सांस्कृतिक रिश्तों को भी और मजबूती मिली। भारतीय नौसेना के दस महीने लंबे समुद्री अभियान के तहत, भारत में बने इस तीन मस्तूल वाले पारंपरिक जहाज ने अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित इंटरनेशनल नेवल रिव्यू 250 और सेल-4 250 कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
इस यात्रा का सबसे खास पल तब रहा, जब आईएनएस सुदर्शिनी ने परेड ऑफ सेल में हिस्सा लिया। इस दौरान जहाज स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और हडसन नदी के किनारे से गुजरा। उसके साथ दुनिया के कई देशों के पारंपरिक जहाज और नौसैनिक पोत भी मौजूद थे, जबकि भारतीय तिरंगा पूरे गर्व के साथ लहरा रहा था। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ब्रुकलिन में अपने प्रवास के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने भारत के एक 'चलते-फिरते राजदूत' की तरह काम किया। इस दौरान 1,000 से ज्यादा लोगों ने जहाज का दौरा किया। इनमें भारतीय समुदाय के लोग, स्थानीय निवासी और समुद्री गतिविधियों में रुचि रखने वाले लोग शामिल थे। सभी को भारतीय नौसेना की सेल ट्रेनिंग परंपरा और भारत की समृद्ध समुद्री विरासत के बारे में जानकारी दी गई।
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