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स्पेन में भारत की तकनीकी ताकत का जलवा, पवित्र मार्गेरिटा ने दिया बड़ा संदेश

Ratna Netam
6 Nov 2026 9:40 PM IST
स्पेन में भारत की तकनीकी ताकत का जलवा, पवित्र मार्गेरिटा ने दिया बड़ा संदेश
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नई दिल्ली/मैड्रिड। केंद्रीय विदेश एवं वस्त्र राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में आयोजित 30वें इबेरो-अमेरिकन शिखर सम्मेलन में भारत की तकनीकी क्षमताओं, विकास सहयोग, आपदा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से निपटने की तैयारियों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और सतत विकास के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान भारत ने लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। इस सम्मेलन में भारत का सहयोगी पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होना कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।विदेश मंत्रालय की ओर से शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, पवित्र मार्गेरिटा ने 3 से 5 नवंबर तक स्पेन की आधिकारिक यात्रा की। इस दौरान उन्होंने इबेरो-अमेरिकन सम्मेलन के 30वें शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय मंत्रिस्तरीय संवाद में हिस्सा लिया। इस बैठक में सहयोगी और परामर्शदाता पर्यवेक्षक देशों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न वैश्विक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
मार्गेरिटा ने अपने संबोधन में भारत की तकनीकी प्रगति और विकास संबंधी अनुभवों का उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से प्रौद्योगिकी, विकास सहयोग, आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन के क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भारत का अनुभव अन्य विकासशील देशों के लिए उपयोगी हो सकता है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में प्रस्तुत किया।इबेरो-अमेरिकन सम्मेलन एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसमें लैटिन अमेरिका के 19 और यूरोप के तीन देश स्पेन, पुर्तगाल तथा अंडोरा शामिल हैं। इस प्रकार संगठन में कुल 22 सदस्य देश हैं। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग, सामाजिक विकास और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है। भारत के सहयोगी पर्यवेक्षक बनने से इस क्षेत्र के देशों के साथ संस्थागत संवाद के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
स्पेन सरकार के अनुसार, भारत के साथ तुर्किये और अंगोला को भी सहयोगी पर्यवेक्षक के रूप में शामिल किया गया है, जबकि एसोसिएशन ऑफ कैरेबियन स्टेट्स को परामर्शदाता पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया। स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने नए पर्यवेक्षकों का स्वागत करते हुए कहा कि इससे इबेरो-अमेरिकन समुदाय का वैश्विक संपर्क और सहयोग बढ़ेगा।भारत की ओर से तकनीकी सहयोग पर विशेष जोर दिए जाने के पीछे डिजिटल परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों में बढ़ती संभावनाएं हैं। डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल पहचान और सार्वजनिक सेवाओं में तकनीक के उपयोग के क्षेत्र में भारत ने महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किया है। इन अनुभवों का आदान-प्रदान लैटिन अमेरिकी देशों के साथ सहयोग का एक संभावित क्षेत्र हो सकता है।जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बाढ़, सूखा, तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों के बीच आपदा प्रबंधन तथा जलवायु अनुकूलन की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। भारत ने इन क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को प्रस्तुत करते हुए सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।
स्पेन में आयोजित बैठकों के दौरान जल सुरक्षा और जलवायु सहनशीलता पर भी चर्चा हुई। इसमें चरम मौसमी घटनाओं से निपटने, जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से जोखिम कम करने जैसे विषय शामिल रहे।पवित्र मार्गेरिटा ने सम्मेलन के दौरान स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और स्पेन के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तथा इबेरो-अमेरिकन समुदाय के साथ सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। मार्गेरिटा ने भारत को सहयोगी पर्यवेक्षक के रूप में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की।उन्होंने कोलंबिया के विदेश मंत्री ओमर बुला एस्कोबार और बोलीविया के विदेश मंत्री हेक्टर फ्रांसिस्को हुआंका के साथ भी अलग-अलग बैठकें कीं। कोलंबिया के साथ बातचीत में व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के विषय शामिल रहे। वहीं, बोलीविया के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।मार्गेरिटा ने एसोसिएशन ऑफ कैरेबियन स्टेट्स की महासचिव नोएमी एस्पिनोजा मैड्रिड से भी मुलाकात की। इस बातचीत में कैरेबियाई क्षेत्र के साथ भारत के संबंधों और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
स्पेन यात्रा के दौरान उन्होंने मैड्रिड में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने गांधीजी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को शांति, न्याय और सद्भाव के लिए प्रेरणादायक बताया। इसके अतिरिक्त उन्होंने भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात कर भारत के विकास में प्रवासी भारतीयों की भूमिका की सराहना की।यह यात्रा भारत और स्पेन के बीच संस्कृति, पर्यटन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विशेष द्विपक्षीय वर्ष के दौरान हुई। दोनों देश इन क्षेत्रों में आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। सम्मेलन के दौरान डिजिटल परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग जैसे विषयों पर भी व्यापक चर्चा हुई।भारत की भागीदारी से लैटिन अमेरिकी देशों के साथ व्यापार, निवेश, शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। हालांकि, इन संभावनाओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए आगे द्विपक्षीय बातचीत और आवश्यक समझौतों की जरूरत होगी।कुल मिलाकर पवित्र मार्गेरिटा की स्पेन यात्रा भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सक्रियता और विकासशील देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। इबेरो-अमेरिकन सम्मेलन में सहयोगी पर्यवेक्षक के रूप में भारत की भागीदारी से तकनीक, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और सांस्कृतिक संबंधों के क्षेत्र में नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
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