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Delhi दिल्ली। भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस सुदर्शनी मिस्र के सफागा पहुंचा। यह एक बेहद खास पोत है, जो समुद्र में 22,000 नॉटिकल मील से अधिक की यात्रा पर निकला है। तीन मस्तूलों वाली नौसेना बार्क आईएनएस सुदर्शिनी अपने पाल के जरिए यह समुद्री यात्रा कर रही है। करीब 16 दिन लंबी यात्रा और 1,832 समुद्री मील की दूरी तय करने के उपरांत यह हुए सफागा पहुंची है। इससे पहले इसने ओमान के सलालाह बंदरगाह पर अपना पहला पोर्ट कॉल पूरा किया था। सलालाह से सफागा तक का यह सफर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह चालक दल के आत्मविश्वास और सहनशक्ति को भी दर्शाता है।
दरअसल, अदन की खाड़ी और लाल सागर से होकर गुजरना भारतीय दल के लिए एक महत्वपूर्ण ऑपरेशनल चरण था। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां यह पोत चुनौतीपूर्ण मौसम की स्थितियों और भारी समुद्री यातायात के बीच यात्रा कर रहा था। इस दौरान उच्च स्तर की व्यावसायिक दक्षता और समुद्री कौशल का प्रदर्शन किया गया। यह शिप ‘लोकायन–26’ नामक ऐतिहासिक अंतरमहाद्वीपीय नौकायन अभियान पर है। यह दस माह का एक दीर्घकालिक वैश्विक समुद्री अभियान है। यह नौसैनिक अभियान भारत की समृद्ध नौसैनिक परंपरा को विश्व पटल पर प्रदर्शित कर रहा है।
सफागा में आईएनएस सुदर्शनी की यात्रा ‘मैत्री के सेतु’ पहल के तहत है। यह समुद्री संपर्क के प्रति भारतीय नौसेना की निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है और भारत और मिस्र के बीच मजबूत और स्थायी संबंधों को रेखांकित करती है।
पोत के मिस्र आगमन पर वहां की नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों द्वारा भारतीय पोत का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। आईएनएस सुदर्शनी के कमांडिंग ऑफिसर नेरेड सी और सफागा नौसेना बेस के बेस कमांडर रियर एडमिरल रामी अहमद इस्माइल मोहम्मद की मुलाकात हुई। इस मुलाकात में दोनों नौसेनाओं के बीच बढ़ती समुद्री साझेदारी पर जोर दिया गया। यह मुलाकात दोनों देशों की नौसेना के बीच बेहतर सहयोग व साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है। अब भारतीय नौसेना, मिस्र के बंदरगाह पर रुकने के दौरान मिस्र के नौसैनिकों के साथ पेशेवर बातचीत करेगी।
नौकायन प्रशिक्षण में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया जाएगा। वहीं द्विपक्षीय सद्भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से सामुदायिक संपर्क गतिविधियों का भी संचालन किया जा रहा है। 20 जनवरी को भारतीय नौसेना का यह सेल ट्रेनिंग शिप कोच्चि स्थित नौसैनिक अड्डे से रवाना हुआ था। यह अभियान महासागरों के पार सहयोग, विश्वास और मित्रता के सेतु निर्माण का संदेश भी देता है।
इस अभियान की भावना ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और विजन ‘महासागर’ से प्रेरित है। ‘सुदर्शनी’ अपनी इस 10 महीने लंबी यात्रा के दौरान कुल 13 देशों के 18 विदेशी बंदरगाहों पर पहुंचेगा। ‘सुदर्शनी’ फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में आयोजित विशेष अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी शामिल होगा। इस दौरान भारतीय नौसेना का शिप ‘सुदर्शिनी’ 22,000 नॉटिकल मील से अधिक की यात्रा करेगा।
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