विश्व
अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की टिप्पणी पर भारत का कड़ा जवाब
Ratna Netam
16 Oct 2026 7:30 PM IST

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नई दिल्ली। भारत की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की टिप्पणी पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सांसद के बयान को अनुचित और बिना पर्याप्त जानकारी के दिया गया बताया। भारत ने स्पष्ट किया कि किसी दूसरे लोकतांत्रिक देश की चुनावी प्रक्रिया पर इस तरह की टिप्पणी करना उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान है।नई दिल्ली में आयोजित नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर भारत का आधिकारिक पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर बाहरी हस्तक्षेप उचित नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी सांसद के बयान को किया खारिज
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिकी कांग्रेस सदस्य प्रमिला जयपाल की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी अनुचित और बिना जानकारी के दी गई प्रतीत होती है।उन्होंने कहा, "हमें कांग्रेस सदस्य की यह टिप्पणी अनुचित और बिना जानकारी के दी गई लगती है। यह एक अन्य लोकतांत्रिक देश की चुनावी प्रक्रिया में दखल देने के बराबर है। ऐसा रवैया लोकतंत्र को ही कमजोर करता है।"भारत ने इस प्रतिक्रिया के जरिए स्पष्ट किया कि देश की चुनावी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का समाधान भारतीय संवैधानिक संस्थाओं और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के अंतर्गत होना चाहिए।
13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने पर उठाए थे सवाल
अमेरिका के वाशिंगटन राज्य से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद प्रमिला जयपाल ने भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चिंता जताई थी।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा था कि भारत में मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने की खबरों को लेकर वह बेहद चिंतित हैं।जयपाल ने चुनावी अधिकारों की सुरक्षा पर जोर देते हुए भारत में अहिंसक विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन भी किया था। उन्होंने भारत की स्थिति की तुलना अमेरिका में मतदान अधिकारों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस से की थी।
भारतीय राजदूत ने भी जताई थी आपत्ति
प्रमिला जयपाल की टिप्पणी पर भारत के अमेरिकी राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भी प्रतिक्रिया दी थी।15 अक्टूबर को क्वात्रा ने अमेरिकी सांसद के बयान को भारत के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वतंत्र संस्थाओं का उल्लेख करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर बाहरी टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जताई।
मतदाता सूची संशोधन को लेकर जारी है विवाद
भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य मृत, दोहरी प्रविष्टियों वाले और अन्य अपात्र मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को अद्यतन करना है।हालांकि, करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के आंकड़े का अर्थ यह नहीं है कि सभी संबंधित लोग पात्र मतदाता थे या सभी नाम गलत तरीके से हटाए गए। इस विषय पर दावे और आपत्तियां जांच तथा न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा चुनावी प्रक्रिया का मामला
मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों ने न्यायालय का भी रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया।इन याचिकाओं में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया और कुछ प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। न्यायालय में इन मुद्दों पर सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।
भारत-अमेरिका के बीच चुनावी टिप्पणी पर मतभेद
प्रमिला जयपाल की टिप्पणी और भारत की प्रतिक्रिया ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर दोनों देशों के राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच मतभेद सामने ला दिए हैं।जहां जयपाल ने मतदाता अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव की आवश्यकता पर जोर दिया, वहीं भारत ने दूसरे देश के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी चुनावी प्रक्रिया पर की गई टिप्पणी को अनुचित हस्तक्षेप बताया है।फिलहाल, मतदाता सूची पुनरीक्षण का मुद्दा भारत में राजनीतिक और न्यायिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
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