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भारत का माइग्रेशन पर होलिस्टिक अप्रोच, डिजिटल इनोवेशन पर जोर

Kavita2
8 May 2026 10:44 AM IST
भारत का माइग्रेशन पर होलिस्टिक अप्रोच, डिजिटल इनोवेशन पर जोर
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United Nations संयुक्त राष्ट्र : विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा है कि भारत ने माइग्रेशन गवर्नेंस के लिए एक समग्र (होलिस्टिक) दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें प्रवासियों की भलाई, सुरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। वे गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित दूसरे इंटरनेशनल माइग्रेशन रिव्यू फोरम (IMRF) के एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

सिंह ने इस दौरान भारत की डिजिटल पहलों को “पायनियरिंग” बताते हुए कहा कि इनका उद्देश्य प्रवासियों की आवाजाही को सरल और सुरक्षित बनाना है। उन्होंने कहा कि भारत का प्रवासी समुदाय अत्यंत व्यापक और गतिशील है, जिसमें 3.4 करोड़ से अधिक भारतीय 200 से ज्यादा देशों में फैले हुए हैं।

उन्होंने बताया कि भारतीय प्रवासी रेमिटेंस, निवेश और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से न केवल भारत के विकास में योगदान दे रहे हैं, बल्कि उन देशों की अर्थव्यवस्था और समाज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जहां वे बसे हुए हैं।

मंत्री ने कहा कि भारत ने वर्षों से माइग्रेशन गवर्नेंस को एक समग्र दृष्टिकोण से देखा है, जिसमें प्रवास से पहले की तैयारी, सुरक्षित यात्रा, सम्मानजनक रोजगार और अंततः देश में वापसी और पुनः एकीकरण शामिल है। उन्होंने कहा कि माइग्रेशन केवल लोगों की आवाजाही नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है।

इस अवसर पर उन्होंने भारत के ‘ई-माइग्रेट’ प्लेटफॉर्म को एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल बताया, जो प्रवासियों को कई सेवाओं तक आसान पहुंच प्रदान करता है। इसमें आवेदन की स्थिति ट्रैक करना, पंजीकृत और ब्लैकलिस्टेड भर्ती एजेंटों की जानकारी प्राप्त करना और शिकायत दर्ज करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ई-माइग्रेट मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से भी ये सेवाएं उपलब्ध हैं।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि मौजूदा समय में प्रवासन और प्रवासी मुद्दे कई देशों में राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गए हैं। उन्होंने भारत की नियमित और कानूनी प्रवासन मार्गों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में फैले 3.4 करोड़ भारतीय प्रवासी नियमित प्रवासन व्यवस्था को मजबूत करने में भारत की रुचि को दर्शाते हैं। साथ ही उन्होंने प्रवासियों और शरणार्थियों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत ने इस दौरान अपने डिजिटल स्टैक के उपयोग पर भी प्रकाश डाला और कहा कि वह अन्य देशों के साथ अपने ओपन-सोर्स डिजिटल समाधान साझा करने के लिए तैयार है, ताकि प्रवासी कल्याण और प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सके।

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