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G-20 के मंच से भारत की खरी-खरी, कहा- भरपूर फायदा उठाया, अब कार्बन उत्सर्जन कम करें विकसित देश

Renuka Sahu
1 Nov 2021 1:25 AM GMT
G-20 के मंच से भारत की खरी-खरी, कहा- भरपूर फायदा उठाया, अब कार्बन उत्सर्जन कम करें विकसित देश
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फाइल फोटो 

जी-20 के मंच से भारत ने एक बार फिर से विकसित देशों को यह स्पष्ट कर दिया है कि वे ऊर्जा की खपत को कम करें ताकि विकासशील देशों के लिए कार्बन उत्सर्जन का रास्ता साफ हो।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। जी-20 के मंच से भारत ने एक बार फिर से विकसित देशों को यह स्पष्ट कर दिया है कि वे ऊर्जा की खपत को कम करें ताकि विकासशील देशों के लिए कार्बन उत्सर्जन का रास्ता साफ हो। स्कॉटलैंड में जलवायु परिवर्तन को लेकर होने जा रहे कॉन्फ्रेंस ऑफ ऑल पार्टीज यानी COP26 से पहले भारत के प्रतिनिधि पीयूष गोयल ने कहा कि भारत विकासशील देशों की आवाज बनेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच से यह साफ कर दिया कि निकटवर्ती भविष्य में तकनीक के अभाव की वजह से कार्बन ऊर्जा का इस्तेमाल पूरी तरह रोकना संभव नहीं, ऐसे में इसका भरपूर फायदा उठा चुके विकसित देशों की जिम्मेदारी है कि वे अब इसकी खपत को कम करें।

पीयूष गोयल ने, कहा कि जिन विकसित देशों ने ऊर्जा का भरपूर लाभ उठाया है, अब उन्हें तेजी से इसके उत्सर्जन में कटौती करने की आवश्यकता है, ताकि विकासशील देश भी विकसित होने के लिए कार्बन ऊर्जा का उपयोग कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समय में स्वच्छ ऊर्जा को अवशोषित करने के लिए पर्याप्त तकनीक नहीं है। इसलिए कार्बन ऊर्जा के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने से पहले हमें तकनीक और नए संसाधनों पर अधिक काम करने की जरूरत है।
पांच दिनों तक चले जी-20 देशों के सम्मेलन के आखिरी दिन रोम डेक्लेरेशन जारी किया गया। पीयूष गोयल के बयान से पहले सम्मेलन के अध्यक्ष आलोक शर्मा ने भी अपनी ओपनिंग स्पीच में कहा था कि COP26 जलवायु सम्मेलन ही ग्लोबल वॉर्मिंग को डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए आखिरी और सबसे अच्छी उम्मीद है।
विश्व की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के अलावा कोरोना महामारी और टीकाकरण पर भी चर्चा हुई। वहीं, जलवायु परिवर्तन को लेकर ग्लासगो में COP26 12 नवंबर तक चलने वाला है। इसमें दुनियाभर में बदलती मौसम की घटनाओं और 150 सालों के जीवाश्म ईंधन के जलने से जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा होगी।बैठक में लगभग 200 देशों के वार्ताकार 2015 के पेरिस जलवायु समझौते के बाद से लंबित मुद्दों पर चर्चा करेंगे।


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