
नई दिल्ली : दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन को लेकर पाकिस्तान के कुछ जेन-जी समूहों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की प्रतिक्रियाओं के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत का मुख्य ध्यान पाकिस्तान की ओर से दशकों से जारी सीमा पार आतंकवाद की नीति को खत्म कराने पर है। उन्होंने कहा कि भारत लगातार पाकिस्तान से मांग करता रहा है कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली अपनी नीति में बदलाव करे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत के लोग लंबे समय से पाकिस्तान की राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद की नीति का विरोध करते आए हैं। उन्होंने कहा कि इस मांग में देश के युवा भी शामिल हैं और भारत उम्मीद करता है कि पाकिस्तान के युवा भी इस संदेश को समझेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के लिए आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाना जरूरी है।
दरअसल, दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र आंदोलन नीट पेपर लीक मामले को लेकर शुरू हुआ था। इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने किया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्र आत्महत्याओं से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग शामिल थी।
आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को संसद चलो मार्च आयोजित किया गया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शन और अधिक चर्चा में आ गया था। इसके बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने जंतर-मंतर पर चल रहे धरने को समाप्त करने की घोषणा की थी। इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा सोशल मीडिया पर भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी देखने को मिली।
पाकिस्तान सरकार ने इस मामले को भारत का आंतरिक मुद्दा बताते हुए आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी से जब पूछा गया कि क्या भारतीय प्रशासन की कार्रवाई मानवाधिकार उल्लंघन के अंतर्गत आती है, तो उन्होंने कहा था कि इस विषय पर इस्लामाबाद कोई टिप्पणी नहीं करेगा क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है।
हालांकि, पाकिस्तान के कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और जेन-जी समूहों ने छात्र आंदोलन को लेकर अपनी राय जाहिर की। कई लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में पोस्ट किए। पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर बिलाल हसन ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए भारतीय छात्रों को बहादुर बताया और कहा कि वे अपने देश के भविष्य के लिए आवाज उठा रहे हैं।
बिलाल हसन ने छात्रों से एकजुट रहने और किसी भी कदम को सोच-समझकर उठाने की अपील भी की। इसके अलावा पाकिस्तान के कुछ अन्य युवा सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की और छात्र आंदोलनों में युवाओं की भूमिका को लेकर अपनी राय रखी।
भारत की ओर से इस पूरे मामले को लेकर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को पहले अपनी नीतियों पर ध्यान देना चाहिए। MEA ने कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ा मुद्दा सीमा पार आतंकवाद है, जो लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव का प्रमुख कारण रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी देश में होने वाली राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं पर वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रिया आना सामान्य बात है। हालांकि, सरकारें ऐसे मामलों को अपने-अपने राष्ट्रीय हित और कूटनीतिक दृष्टिकोण से देखती हैं।
छात्र आंदोलन को लेकर पाकिस्तान के कुछ युवाओं की प्रतिक्रिया ने जहां सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ाई, वहीं भारत ने इस मौके पर एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। विदेश मंत्रालय ने साफ संकेत दिया कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में सुधार के लिए आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई सबसे अहम मुद्दा बना रहेगा।





