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US में इंडियन डायस्पोरा ग्रुप्स ने H-1B वीज़ा फीस रद्द करने के फैसले का स्वागत किया

Kavita2
9 Jun 2026 9:41 AM IST
US में इंडियन डायस्पोरा ग्रुप्स ने H-1B वीज़ा फीस रद्द करने के फैसले का स्वागत किया
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Washington वाशिंगटन : यूएस में रहने वाले भारतीय डायस्पोरा एडवोकेसी ग्रुप्स ने मैसाचुसेट्स फेडरल कोर्ट के उस हालिया फैसले का स्वागत किया है, जिसमें पूर्व ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीज़ा पर लगाए गए 1 लाख अमेरिकी डॉलर (USD 100,000) की अतिरिक्त फीस को खत्म कर दिया गया। यह फैसला रोजगार-आधारित इमिग्रेशन प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को बहाल करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) में पॉलिसी और स्ट्रैटेजी के चीफ खंडेराव कंद ने PTI को बताया कि यह फैसला H-1B वीज़ा धारकों और अमेरिकी कंपनियों दोनों के लिए राहत लेकर आया है। उन्होंने कहा, "हम मैसाचुसेट्स फेडरल कोर्ट के USD 100,000 H-1B वीज़ा फीस खत्म करने के फैसले का स्वागत करते हैं। इससे एम्प्लॉयमेंट-बेस्ड इमिग्रेशन सिस्टम में प्रेडिक्टेबिलिटी और फेयरनेस वापस आती है।"



एच-1B वीज़ा पेशेवरों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए अमेरिका में काम करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। ट्रंप प्रशासन ने 2020 में इस वीज़ा पर अतिरिक्त USD 100,000 फीस लगाने का निर्णय लिया था, जिसका उद्देश्य केवल उच्च वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को ही प्राथमिकता देना और अमेरिकी रोजगार बाजार में संतुलन बनाए रखना बताया गया था। हालांकि, आलोचकों का कहना था कि यह कदम नवाचार और उद्यमिता को प्रभावित करता है और अमेरिकी कंपनियों में टैलेंट की कमी पैदा कर सकता है।

FIIDS और अन्य इंडियन डायस्पोरा ग्रुप्स का मानना है कि यह फैसला अमेरिका में इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने की दिशा में एक सही कदम है। इससे तकनीकी और विशेषज्ञ कर्मचारियों को अमेरिकी कंपनियों में काम करने का अवसर मिलेगा और अमेरिकी इकोनॉमी के लिए भी लाभकारी साबित होगा।

खंडेराव कंद ने यह भी कहा कि इस फैसले से H-1B वीज़ा आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित होगा। इसके अलावा, कंपनियों को वीज़ा शुल्क में अचानक बढ़ोतरी या अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे भर्ती प्रक्रिया और लंबी अवधि की योजना बनाना आसान होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि H-1B वीज़ा सिस्टम अमेरिका की तकनीकी और अनुसंधान क्षमताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। विदेशी पेशेवरों की मौजूदगी से न केवल अमेरिकी कंपनियों को विशेषज्ञता मिलती है, बल्कि नई तकनीकी परियोजनाओं और स्टार्टअप इनोवेशन में भी मदद मिलती है। USD 100,000 फीस को हटाने से यह सुनिश्चित होगा कि उच्च कौशल वाले पेशेवर अमेरिका में काम करने के अवसरों से वंचित न हों।

इस फैसले के बाद इंडियन डायस्पोरा समूह अमेरिका में H-1B वीज़ा सिस्टम में सुधार की दिशा में और कदम उठाने की संभावना पर भी ध्यान दे रहे हैं। उनका उद्देश्य यह है कि अमेरिकी रोजगार-आधारित इमिग्रेशन प्रणाली अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और भविष्य-उन्मुख बनी रहे।

कुल मिलाकर, मैसाचुसेट्स फेडरल कोर्ट का यह फैसला H-1B वीज़ा धारकों और अमेरिकी कंपनियों दोनों के लिए राहत का संदेश लेकर आया है। इससे न केवल रोजगार-आधारित इमिग्रेशन प्रणाली में निष्पक्षता और प्रेडिक्टेबिलिटी आएगी, बल्कि अमेरिका में तकनीकी और नवाचार के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी बनी रहेगी। इंडियन डायस्पोरा समूहों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यावसायिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करेगा।

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