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UNSC सुधारों पर भारत का कड़ा रुख, बोला- पुरानी बातों से नहीं बदलेगी दुनिया

Saba Naaz
29 July 2026 4:58 PM IST
UNSC सुधारों पर भारत का कड़ा रुख, बोला- पुरानी बातों से नहीं बदलेगी दुनिया
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वर्ल्ड: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना कड़ा रुख सामने रखा है। भारत ने सुरक्षा परिषद सुधार प्रक्रिया की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि 17 दौर की अंतर-सरकारी वार्ताओं (IGN) के बाद भी कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। भारत ने साफ कहा कि वैश्विक संस्थाओं में सुधार अब समय की मांग है और इसे कुछ देशों के सीमित हितों के कारण रोका नहीं जा सकता।

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार अधिक प्रतिनिधित्व वाला और प्रभावी बनाने की जरूरत है। भारत का कहना है कि वर्तमान 15 सदस्यीय परिषद दुनिया की बदलती राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती। खासकर विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आवाज को उचित स्थान मिलना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद सुधारों से जुड़ी वार्ताओं को अपने 81वें सत्र तक जारी रखने का फैसला किया है। हालांकि, भारत ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई वर्षों से बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक किसी ठोस परिणाम तक नहीं पहुंचा जा सका है। भारत के अनुसार, सुधार प्रक्रिया को अनिश्चित समय तक खींचना संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता को कमजोर करता है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि अंतर-सरकारी वार्ता के 17 दौर पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब भी सुधार की दिशा में कोई स्पष्ट प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया को आखिर कितना इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूयॉर्क में बैठकर हर साल पुरानी बातों को दोहराने से वास्तविक दुनिया की समस्याओं का समाधान नहीं निकलेगा।

भारत ने सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग दोहराई है। भारत का कहना है कि वैश्विक दक्षिण के देशों को निर्णय लेने वाली प्रमुख संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी पेश करता रहा है और कई देशों ने इस मांग का समर्थन भी किया है।

भारत ने पश्चिम एशिया और फलस्तीन मुद्दे पर भी अपना पक्ष स्पष्ट किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बहस के दौरान भारत ने फलस्तीन के लोगों के प्रति अपने समर्थन को दोहराया और दो-देश समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। भारत ने कहा कि गाजा में जारी मानवीय संकट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पी. हरीश ने अरबी भाषा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया का ध्यान गाजा पट्टी में मौजूद गंभीर मानवीय स्थिति से नहीं हटना चाहिए। यह भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह संभवतः पहली बार है जब किसी भारतीय राजनयिक ने सुरक्षा परिषद में अरबी भाषा में भाषण दिया।

भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को आज की चुनौतियों के हिसाब से खुद को बदलना होगा। दुनिया में संघर्ष, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और मानवीय संकट जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, ऐसे में सुरक्षा परिषद की भूमिका और प्रभावी होनी चाहिए।

भारत का मानना है कि अगर संयुक्त राष्ट्र को एक मजबूत और भरोसेमंद वैश्विक संस्था बनाए रखना है तो उसमें सुधार जरूरी है। भारत ने स्पष्ट किया कि सुधार प्रक्रिया को केवल बातचीत तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसके लिए समय सीमा और ठोस लक्ष्य तय करने होंगे।

UNSC सुधारों को लेकर भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश वैश्विक संस्थाओं में बदलाव की मांग उठा रहे हैं। भारत ने एक बार फिर संकेत दिया है कि वह सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार के लिए अपनी आवाज मजबूती से उठाता रहेगा।

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