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भारत जापान ने रक्षा सहयोग बढ़ाने पर की चर्चा

Ratna Netam
22 Sept 2026 8:13 PM IST
भारत जापान ने रक्षा सहयोग बढ़ाने पर की चर्चा
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नई दिल्ली। भारत और जापान ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की है। मंगलवार को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने जापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व LDP के इंटरनेशनल कोऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल तारो कोनो ने किया। बैठक में रक्षा प्रौद्योगिकी, संयुक्त सैन्य अभ्यास और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग प्रमुख मुद्दे रहे।रक्षा मंत्रालय के अनुसार दोनों पक्षों ने भारत-जापान रक्षा संबंधों को व्यावहारिक स्तर पर आगे बढ़ाने और दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर बातचीत की। बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और जापान ने हाल के महीनों में रक्षा क्षेत्र में कई उच्चस्तरीय संवाद और सैन्य अभ्यास किए हैं।
रक्षा टेक्नोलॉजी सहयोग पर जोर
बैठक में रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत और जापान पहले से रक्षा उपकरण, आधुनिक सैन्य तकनीक, अनुसंधान एवं विकास और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।अगस्त में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक में भी दोनों देशों ने रक्षा उपकरण और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी। दोनों पक्षों ने अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों में भारत के DRDO और जापान की Acquisition, Technology and Logistics Agency यानी ATLA के बीच अनुसंधान एवं विकास सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई थी।दोनों देशों के बीच जहाजों पर इस्तेमाल होने वाले UNICORN इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन एंटीना सिस्टम से जुड़ी परियोजना को भी रक्षा उपकरण हस्तांतरण सहयोग के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। भारत और जापान ने इस परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।
संयुक्त सैन्य अभ्यास का बढ़ रहा दायरा
भारत और जापान की सेनाओं के बीच सैन्य अभ्यास लगातार विस्तृत हुए हैं। थल सेनाओं के बीच ‘धर्म गार्जियन’, नौसेनाओं के बीच ‘JAIMEX’ और वायु सेनाओं के बीच ‘वीर गार्जियन’ जैसे अभ्यास दोनों देशों के रक्षा सहयोग का हिस्सा हैं। अगस्त में दोनों रक्षा मंत्रियों ने द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों की जटिलता बढ़ाने, मानव रहित प्रणालियों को शामिल करने और अवसर मिलने पर कम समय की सूचना पर संयुक्त अभ्यास करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई थी।इसी क्रम में सितंबर में भारत और जापान की वायु सेनाओं ने ‘वीर गार्जियन 2026’ आयोजित किया। इस बार पहली बार जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के F-2 लड़ाकू विमानों ने भारत की धरती से द्विपक्षीय अभ्यास में हिस्सा लिया।
वीर गार्जियन ने बढ़ाया सैन्य तालमेल
वीर गार्जियन 2026 में भारतीय और जापानी लड़ाकू विमानों ने संयुक्त हवाई अभियानों का प्रशिक्षण लिया। अभ्यास का उद्देश्य दोनों वायु सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और एक-दूसरे की ऑपरेशनल प्रक्रियाओं की समझ बढ़ाना था।अभ्यास के दौरान जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल ताकेहिरो मोरिता ने भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान भी भरी। इसे दोनों देशों के बढ़ते रक्षा संपर्क और सैन्य तकनीक में परस्पर रुचि के संकेत के रूप में देखा गया।
इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर चर्चा
मंगलवार की बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा भी प्रमुख विषय रही। भारत और जापान लंबे समय से इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को अपने रक्षा संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते रहे हैं।दोनों देशों ने अगस्त की रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक में कहा था कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों ने तीसरे देशों के साथ संयुक्त अभ्यास और उच्चस्तरीय संवाद जैसे उपायों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी।फरवरी 2026 में भारत, जापान और इंडोनेशिया ने पहला त्रिपक्षीय नौसैनिक PASSEX अभ्यास भी किया था। भारत और जापान ने भविष्य में अन्य साझेदार देशों के साथ ऐसे सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही है।
समुद्री सुरक्षा भी महत्वपूर्ण एजेंडा
भारत और जापान के लिए समुद्री सुरक्षा रक्षा संबंधों का एक अहम हिस्सा है। हिंद महासागर और प्रशांत महासागर महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्गों से जुड़े हुए हैं। दोनों देशों ने समुद्री क्षेत्र में सूचनाओं के आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी काम किया है।अगस्त की बैठक में दोनों देशों ने जहाज मरम्मत सुविधाओं के पारस्परिक इस्तेमाल की व्यवस्था को आगे बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई थी।दोनों पक्ष Indo-Pacific Logistics Network के जरिए प्राकृतिक आपदाओं के दौरान साझेदार देशों तक राहत सामग्री और कर्मियों को पहुंचाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं।
साइबर और स्पेस में भी बढ़ रहा सहयोग
भारत-जापान रक्षा सहयोग पारंपरिक सैन्य क्षेत्रों से आगे बढ़कर साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और तकनीकी नवाचार जैसे नए क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। जुलाई 2026 में टोक्यो में आयोजित आठवीं भारत-जापान रक्षा नीति वार्ता के दौरान दोनों देशों ने रक्षा उद्योग सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की थी।उस वार्ता में सैन्य संपर्क, संयुक्त मुख्यालयों के बीच सहयोग, समुद्री सुरक्षा, रक्षा अभ्यास, क्षमता निर्माण और रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग की भी समीक्षा की गई थी।
संस्थागत रक्षा सहयोग को मजबूत करने की तैयारी
भारत और जापान ने रक्षा सहयोग को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के लिए डायरेक्टर जनरल और संयुक्त सचिव स्तर का एक कार्य समूह स्थापित करने पर भी सहमति जताई है। इसका उद्देश्य ऑपरेशनल सहयोग, खुफिया जानकारी, उपकरण, तकनीक और रक्षा उद्योग जैसे क्षेत्रों में चल रहे प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।दोनों देशों के बीच विदेश और रक्षा मंत्रियों की ‘2+2’ वार्ता भी द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण मंच है। भारत और जापान ने 2026 में चौथी 2+2 बैठक आयोजित करने की दिशा में चर्चा तेज करने पर सहमति जताई है।
रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने पर फोकस
तारो कोनो के नेतृत्व वाले LDP प्रतिनिधिमंडल और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की बैठक ने भारत-जापान रक्षा संवाद में प्रौद्योगिकी और सैन्य अभ्यासों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। दोनों पक्षों की बातचीत का घोषित फोकस इंडो-पैसिफिक में शांति और स्थिरता के लिए रक्षा सहयोग को मजबूत करना रहा।हाल के महीनों में रक्षा मंत्रिस्तरीय वार्ता, रक्षा नीति संवाद और वीर गार्जियन जैसे संयुक्त अभ्यासों ने दोनों देशों के सैन्य संपर्क को और व्यापक बनाया है। आने वाले समय में रक्षा अनुसंधान, आधुनिक सैन्य तकनीक, संयुक्त अभ्यास और समुद्री सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में इस सहयोग को आगे बढ़ाने की योजना है।
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