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समुद्र में भारत इटली की दोस्ती हुई मजबूत, INS त्रिशूल की इटली यात्रा संपन्न
Ratna Netam
29 Oct 2026 8:06 PM IST

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नई दिल्ली : 29 अक्टूबर 2026। भारतीय नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल (INS Trishul) ने इटली के सिविटावेकिया बंदरगाह की अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह यात्रा भूमध्य सागर में भारतीय नौसेना की जारी परिचालन तैनाती का हिस्सा थी। इस दौरान भारतीय और इतालवी नौसेनाओं के बीच कई महत्वपूर्ण पेशेवर बैठकें, युद्धपोतों का दौरा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों ने आपसी सहयोग बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अनुभव साझा किए। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईएनएस त्रिशूल ने 28 अक्टूबर को इटली की अपनी बंदरगाह यात्रा पूरी की और इसके बाद भूमध्य सागर में अपनी अगली परिचालन गतिविधियों के लिए रवाना हो गया।
आईएनएस त्रिशूल 25 अक्टूबर को इटली के सिविटावेकिया बंदरगाह पहुंचा था। बंदरगाह में प्रवेश करने से पहले युद्धपोत ने इतालवी नौसेना के युद्धपोत कार्लो मार्गोटिनी (Carlo Margottini) के साथ पैसेज एक्सरसाइज (PASSEX) में भाग लिया। इस संयुक्त समुद्री अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन समन्वय, संचार और संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को बेहतर बनाना था।अभ्यास के दौरान दोनों युद्धपोतों ने समुद्र में संयुक्त युद्धाभ्यास, संचार प्रक्रियाओं, ईंधन एवं रसद आपूर्ति से जुड़ी गतिविधियों, हेलीकॉप्टर लैंडिंग, नौसैनिक कर्मियों के स्थानांतरण और बोर्डिंग ऑपरेशन का अभ्यास किया। इन गतिविधियों ने भारतीय और इतालवी नौसेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने तथा परिचालन अनुभव साझा करने का अवसर दिया।
इतालवी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से महत्वपूर्ण मुलाकात
इटली यात्रा के दौरान आईएनएस त्रिशूल के कमांडिंग ऑफिसर ने इतालवी नौसेना के फ्लीट कमांडर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर सहयोग और समुद्री अभियानों से जुड़े अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ।भारतीय युद्धपोत के चालक दल को इतालवी नौसेना के विमानवाहक पोत आईटीएस कैवूर (ITS Cavour) का दौरा करने का अवसर भी मिला। इस यात्रा के दौरान भारतीय नौसैनिकों ने इतालवी नौसेना की कार्यप्रणाली और विमानवाहक पोत के संचालन से संबंधित पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।इस प्रकार की गतिविधियां दोनों देशों के नौसैनिकों को अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने के तरीकों से परिचित कराती हैं। इससे भविष्य में संयुक्त अभ्यास और समुद्री अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल स्थापित करने में सहायता मिल सकती है।
भारतीय राजदूत और इतालवी नौसेना प्रमुख अधिकारियों ने किया दौरा
इटली में भारत की राजदूत वाणी राव और इतालवी नौसेना के फ्लीट कमांडर एवं CINCNAV वाइस एडमिरल ऑरेलियो डी कैरोलिस ने आईएनएस त्रिशूल का दौरा किया। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने युद्धपोत पर तैनात भारतीय नौसैनिकों से मुलाकात की और उनके साथ बातचीत की।इस अवसर पर आईएनएस त्रिशूल पर एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें सिविटावेकिया के मेयर, इतालवी नौसेना और तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारी, 13 देशों के रक्षा प्रतिनिधि, स्थानीय गणमान्य नागरिक और भारतीय समुदाय के सदस्य शामिल हुए।सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय नौसेना ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की। इस आयोजन ने दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का भी अवसर प्रदान किया।
भारतीय समुदाय और स्थानीय लोगों ने दिखाई दिलचस्पी
आईएनएस त्रिशूल की इटली यात्रा के दौरान युद्धपोत को आम नागरिकों के लिए भी खोला गया था। बड़ी संख्या में इटली में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने युद्धपोत का दौरा किया।इस दौरान आगंतुकों को भारतीय नौसेना की समुद्री परंपराओं, परिचालन क्षमताओं और युद्धपोत की भूमिका के बारे में जानने का अवसर मिला। भारतीय समुदाय के लिए यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता था, क्योंकि उन्हें विदेश में भारतीय नौसेना के युद्धपोत को करीब से देखने का अवसर प्राप्त हुआ।ऐसे आयोजन भारतीय नौसेना की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति को प्रदर्शित करने के साथ विदेशों में रहने वाले भारतीयों और स्थानीय समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत-इटली की साझेदारी मजबूत
भारत और इटली के बीच रक्षा एवं समुद्री सहयोग पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरा है। दोनों देश समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, अवैध गतिविधियों की रोकथाम और समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ा रहे हैं।अक्टूबर 2026 में रोम में भारत और इटली के बीच पहला द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा संवाद भी आयोजित किया गया। इस बैठक में दोनों देशों की नौसेनाओं, तटरक्षक बल और संबंधित मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।बैठक में समुद्री क्षेत्र की निगरानी, अवैध समुद्री गतिविधियों से निपटने और महत्वपूर्ण समुद्री अवसंरचना की सुरक्षा पर चर्चा हुई। इटली में भारतीय राजदूत वाणी राव ने भी दोनों देशों के बीच बढ़ते समुद्री संबंधों को महत्वपूर्ण बताया।भारत और इटली के लिए समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा विशेष महत्व रखती है। दोनों देशों के आर्थिक हित अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन से जुड़े हुए हैं। ऐसे में नौसेनाओं के बीच नियमित संपर्क और संयुक्त अभ्यास सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
पहले ब्रिटेन और फ्रांस की नौसेनाओं के साथ भी किया अभ्यास
आईएनएस त्रिशूल की वर्तमान परिचालन तैनाती कई देशों के साथ नौसैनिक संबंधों को आगे बढ़ाने का हिस्सा है। इटली पहुंचने से पहले इस युद्धपोत ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी के साथ आयोजित द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास 'कोंकण-26' में भाग लिया था।यह अभ्यास 8 से 15 अक्टूबर तक आयोजित किया गया था। इसमें भारतीय नौसेना के आईएनएस त्रिशूल और ब्रिटिश नौसेना के एचएमएस सदरलैंड ने हिस्सा लिया। अभ्यास के दौरान पनडुब्बी रोधी युद्ध, समुद्री संचार, सामरिक गतिविधियों और विभिन्न परिचालन प्रक्रियाओं का अभ्यास किया गया।इससे पहले आईएनएस त्रिशूल ने फ्रांसीसी नौसेना के साथ 'वरुण' अभ्यास में भी भाग लिया था। युद्धपोत ने स्पेन के वालेंसिया बंदरगाह की यात्रा करके वहां भी पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।इन गतिविधियों का उद्देश्य मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ परिचालन सहयोग, आपसी विश्वास और समुद्री सुरक्षा संबंधों को बढ़ावा देना है।
भूमध्य सागर में जारी रहेगा भारतीय नौसेना का अभियान
इटली की यात्रा पूरी होने के बाद आईएनएस त्रिशूल भूमध्य सागर में अपनी अगली परिचालन तैनाती के लिए रवाना हो गया है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा ने भारतीय और इतालवी नौसेनाओं के बीच पेशेवर संबंधों को और मजबूत किया है।आईएनएस त्रिशूल भारतीय नौसेना का निर्देशित मिसाइलों से लैस स्टील्थ फ्रिगेट है। यह भारतीय नौसेना की समुद्री अभियानों को संचालित करने की क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में युद्धपोतों की नियमित तैनाती से नौसैनिक कर्मियों को अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिलता है। साथ ही मित्र देशों के साथ संयुक्त परिचालन की तैयारियों को भी मजबूत करने का अवसर मिलता है।आईएनएस त्रिशूल की इटली यात्रा भारत की समुद्री कूटनीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस यात्रा के दौरान आयोजित सैन्य, राजनयिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।भारतीय नौसेना की यह पहल अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा, आपसी सहयोग और मित्र देशों के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है।
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