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भारत देन रहे है चीन के 45 इन्वेस्टमेंट प्रस्तावों को मंजूरी

Chandravati Verma
22 Feb 2021 12:46 PM GMT
भारत देन रहे है चीन के 45 इन्वेस्टमेंट प्रस्तावों को मंजूरी
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सीमा विवाद को लेकर जारी तनाव में आई कमी के बीच भारत चीन के 45 इन्वेस्टमेंट प्रस्तावों को मंजूरी देने जा रहा है।

सीमा विवाद को लेकर जारी तनाव में आई कमी के बीच भारत चीन के 45 इन्वेस्टमेंट प्रस्तावों को मंजूरी देने जा रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सरकार और इंडस्ट्री के सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि भारत चीन के 45 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए तैयार है, जिनमें ग्रेट वॉल मोटर और एसएआईसी (SAIC) मोटर कॉर्प का नाम भी शामिल है। बता दें कि पिछले नौ महीनों से चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव जारी है, हालांकि, सैन्य वापसी की प्रक्रिया के बाद तनाव कम होने के आसार हैं।

पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना की घुसपैठ के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में भारत द्वारा चीनी निवेश पर नियंत्रण कड़े किए जाने के बाद पिछले साल से ही ये प्रस्ताव पाइपलाइन में अटके पड़े हैं। चीन ने गतिरोध के लिए भारतीय सैनिकों को दोषी ठहराया। बता दें कि भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में खून संघर्ष के बाद से तनाव और बढ़ गया था।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच करीब 2 अरब डॉलर के 150 निवेश प्रस्ताव पाइपलाइन में अटके पड़े हैं। हॉन्गकॉन्ग के रास्ते जापान और अमेरिका की कंपनियों के निवेश प्रस्ताव पर भी इसका असर पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन 45 प्रस्तावों में से अधिकतर प्रस्ताव मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में गैर-संवेदनशील माना जाता है।
सूत्रों ने विस्तार में तो कुछ नहीं बताया, मगर दो अन्य सरकारी अधिकारियों ने इस लिस्ट में ग्रेट वॉल मोटर और एसएआईसी मोटर का भी ​नाम शामिल हो सकता है। हालांकि, एक संघीय गृह (आंतरिक) मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रस्तावों को मंजूरी देने के सवाल का जवाब नहीं दिया। दरअसल, ग्रेट वाल और जनरल मोटर्स (जीएम) ने पिछले साल एक संयुक्त प्रस्ताव बनाया था, जिसमें चीनी वाहन निर्माता के लिए भारत में अमेरिकी कंपनी के कार संयंत्र को खरीदने के लिए सहमति मांगी गई थी। इस सौदे की वैल्यू 250-300 मिलियन डॉलर उम्मीद की जा रही है।
ग्रेट वाल, जो कि अगले कुछ सालों में भारत में करीब 1 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बना रही है, ने कहा था कि देश में परिचालन स्थापित करना उसकी वैश्विक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसने इस साल से भारत में कारों की बिक्री शुरू करने की योजना बनाई थी और इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी विचार करने वाली थी। वहीं, एसएआईसी (SAIC)​ ने ब्रिटिश ब्रांड एमजी मोटर के नाम से 2019 में ही अपनी कारों की बिक्री शुरू कर दी थी। कंपनी ने भारत में करीब 650 मिलियन डॉलर निवेश करने का फैसला लिया था, जिसमें से 400 मिलियन डॉलर का निवेश कर लिया है। जबकि कंपनी को आगे की निवेश के लिए सरकारी मंजूरी चाहिए होगी।
बता दें कि चीनी निवेशकों को भारत में मंजूरी मिलने की खबर ऐसे वक्त में आ रही है, जब पैंगोंगे इलाकों से दोनों सेनाओं के पीछे हटने से भारत और चीन के बीच सीमा तनाव में कुछ कमी आई है। सलाहकारों और वकीलों का मानना है कि ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और वस्त्र जैसे क्षेत्रों को गैर-संवेदनशील के रूप में देखा जाता है जबकि डेटा और वित्त से जुड़े निवेशों को संवेदनशील माना जाता है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि गैर-संवेदनशील क्षेत्रों के प्रस्तावों को तेजी से मंजूरी दी जाएगी, जबकि "संवेदनशील" के रूप में देखे जाने वालों की बाद में समीक्षा की जाएगी।


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