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भारत ने फिजी को सौंपे 12 एग्रीकल्चरल ड्रोन गन्ने की खेती में मिलेगी मदद
Ratna Netam
25 Sept 2026 5:35 PM IST

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सुवा। भारत ने फिजी में गन्ने की खेती को अधिक आधुनिक, कुशल और टिकाऊ बनाने की दिशा में सहयोग बढ़ाते हुए 12 एग्रीकल्चरल ड्रोन सौंपे हैं। फिजी में भारत के उच्चायुक्त सुनीत मेहता ने लाउटोका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान फिजी के कृषि, जलमार्ग और चीनी उद्योग मंत्री टोमासी ट्यूनाबुना को ये ड्रोन औपचारिक रूप से सौंपे। भारत सरकार की ओर से ये कृषि ड्रोन फिजी शुगर कॉर्पोरेशन (FSC) को उपहार के रूप में दिए गए हैं।इस पहल का उद्देश्य फिजी के गन्ना किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ना और खेती में ड्रोन आधारित समाधानों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। कृषि ड्रोन की मदद से बड़े खेतों में कम समय में विभिन्न कृषि गतिविधियां पूरी की जा सकती हैं। इससे किसानों को श्रम और समय की बचत के साथ खेती के काम को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फिजी में भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ड्रोन सौंपे जाने की जानकारी साझा की। उच्चायोग ने बताया कि हाई कमिश्नर सुनीत मेहता ने लाउटोका में कृषि, जलमार्ग और चीनी उद्योग मंत्री टोमासी ट्यूनाबुना को भारत सरकार की ओर से फिजी शुगर कॉर्पोरेशन को उपहार में दिए गए 12 कृषि ड्रोन औपचारिक रूप से सौंपे।यह पहल अगस्त 2025 में फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी राबुका की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत की ओर से किए गए वादे से जुड़ी है। उस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कृषि सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। अब 12 एग्रीकल्चरल ड्रोन सौंपे जाने के साथ उस प्रतिबद्धता को पूरा किया गया है।
भारत और फिजी के बीच लंबे समय से करीबी संबंध रहे हैं। दोनों देश विकास सहयोग, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करते रहे हैं। कृषि क्षेत्र में तकनीकी सहयोग इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। फिजी की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन में गन्ना उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल इस क्षेत्र में आधुनिक बदलाव लाने में मदद कर सकता है।गन्ने की खेती फिजी के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में शामिल है और बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़े हुए हैं। ऐसे में खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल उत्पादकता बढ़ाने और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने में सहायक हो सकता है। कृषि ड्रोन का उपयोग फसलों की निगरानी, खेतों का सर्वेक्षण और जरूरत के अनुसार कृषि इनपुट के छिड़काव जैसे कार्यों में किया जा सकता है। हालांकि इनका वास्तविक इस्तेमाल स्थानीय नियमों, प्रशिक्षण और निर्धारित कृषि प्रक्रियाओं के अनुरूप होगा।
ड्रोन तकनीक की एक प्रमुख खासियत यह है कि इससे बड़े क्षेत्र की निगरानी अपेक्षाकृत कम समय में की जा सकती है। पारंपरिक तरीके से बड़े खेतों की निगरानी करने में ज्यादा समय और श्रम लग सकता है। ड्रोन के जरिए खेत की स्थिति को ऊपर से देखकर फसल के अलग-अलग हिस्सों की जानकारी हासिल करने में सहायता मिल सकती है। इससे किसानों और कृषि विशेषज्ञों को समय रहते आवश्यक कदम उठाने में मदद मिल सकती है।भारत स्वयं भी कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है। देश में फसल निगरानी, कीटनाशक और पोषक तत्वों के छिड़काव सहित विभिन्न कृषि कार्यों में ड्रोन के उपयोग के लिए कई पहल की गई हैं। इसी अनुभव के आधार पर भारत मित्र देशों के साथ कृषि तकनीक और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है।
फिजी को दिए गए इन 12 ड्रोन के साथ तकनीकी क्षमता विकसित करना भी महत्वपूर्ण होगा। ड्रोन का प्रभावी उपयोग करने के लिए ऑपरेटरों को प्रशिक्षण, उपकरणों का नियमित रखरखाव और सुरक्षित संचालन की व्यवस्था जरूरी होती है। फिजी शुगर कॉर्पोरेशन के माध्यम से इन उपकरणों का इस्तेमाल गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में किस तरह किया जाएगा, यह स्थानीय जरूरतों और संचालन योजना पर निर्भर करेगा।भारत और फिजी के संबंधों में कृषि के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र भी प्रमुख सहयोग का क्षेत्र रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी राबुका की अगस्त 2025 की बातचीत के बाद भारत ने फिजी में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने सहित कई विकास परियोजनाओं में सहयोग की घोषणा की थी। दोनों देशों ने डिजिटल तकनीक और क्षमता निर्माण सहित दूसरे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने की बात कही थी।
फिजी प्रशांत क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है। भारतीय मूल की बड़ी आबादी भी दोनों देशों के सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को विशेष आधार देती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ विकास सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया है, जिसमें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप परियोजनाओं और तकनीकी सहायता को प्राथमिकता दी जा रही है।फिजी शुगर कॉर्पोरेशन को कृषि ड्रोन सौंपना इसी विकास सहयोग का एक उदाहरण है। इस पहल में विशेष रूप से गन्ना उद्योग को चुना गया है, जो फिजी के कृषि क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ड्रोन के जरिए गन्ने के खेतों में तकनीक आधारित प्रबंधन को बढ़ावा देने का उद्देश्य उत्पादन प्रक्रिया को अधिक कुशल और टिकाऊ बनाना है।
लाउटोका में आयोजित कार्यक्रम में ड्रोन सौंपे जाने के साथ भारत ने अगस्त 2025 में की गई अपनी प्रतिबद्धता को पूरा किया। अब इन उपकरणों के इस्तेमाल की जिम्मेदारी फिजी शुगर कॉर्पोरेशन और संबंधित स्थानीय संस्थाओं के पास होगी। आने वाले समय में इन ड्रोन का उपयोग फिजी के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने में किस तरह किया जाता है, इस पर नजर रहेगी।12 कृषि ड्रोन का यह हस्तांतरण भारत और फिजी के बीच तकनीक आधारित विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने वाला कदम है। इसका उद्देश्य केवल आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि फिजी में गन्ने की खेती को ज्यादा कुशल, तकनीक आधारित और टिकाऊ बनाने की दिशा में सहयोग देना भी है। इससे दोनों देशों के बीच कृषि और तकनीकी सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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