विश्व

भारत ने UNOG को भेंट किए पांच मोर, फिर शुरू हुई पुरानी परंपरा

Kavita2
10 Aug 2026 11:44 AM IST
भारत ने UNOG को भेंट किए पांच मोर, फिर शुरू हुई पुरानी परंपरा
x

संयुक्त राष्ट्र। भारत ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOG) को पांच भारतीय मोर भेंट कर दशकों पुरानी परंपरा को एक बार फिर शुरू किया है। शुक्रवार को आयोजित एक विशेष समारोह में जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अरिंदम बागची ने औपचारिक रूप से पांच मोर UNOG की महानिदेशक तात्याना वालोवाया को सौंपे। इस अवसर पर भारत की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और बहुपक्षवाद के प्रति देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।

भारत की ओर से भेंट किए गए इन पांच युवा मोरों में चार नीले मोर और एक सफेद पंखों वाला नर मोर शामिल है। सफेद और नीले रंगों का यह संयोजन संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक रंगों से भी जुड़ता है। इस वजह से मोरों की यह भेंट केवल सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक नहीं है, बल्कि भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों की एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति भी मानी जा रही है।

1981 में भी भारत ने भेंट किए थे मोर

भारत और UNOG के बीच मोरों को लेकर यह परंपरा नई नहीं है। इससे पहले वर्ष 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली चिड़ियाघर से मोरों का एक प्रजनन जोड़ा संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को भेजा था। अब चार दशक से अधिक समय बाद भारत ने पांच नए मोर भेंट कर इस परंपरा को फिर से जीवंत किया है।

उस समय भेजे गए मोरों का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र परिसर में भारतीय प्राकृतिक विरासत की मौजूदगी को बढ़ावा देना था। मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और देश की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक पहचान में इसका विशेष स्थान है। ऐसे में UNOG को मोर भेंट करने की पहल भारत की विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है।

भारत के राष्ट्रीय पक्षी की खास मौजूदगी

भारतीय मोर को देश के सबसे प्रतिष्ठित पक्षियों में गिना जाता है। इसके आकर्षक पंख, रंग-बिरंगी संरचना और नृत्य की विशिष्ट शैली इसे दुनिया भर में पहचान दिलाती है। भारत में मोर को प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ सांस्कृतिक परंपराओं से भी जोड़ा जाता है।

UNOG को भेंट किए गए पांच मोरों में शामिल सफेद पंखों वाला नर मोर इस पूरी पहल का विशेष आकर्षण है। सफेद पंखों वाला मोर सामान्य नीले मोर की तुलना में दुर्लभ और अलग दिखाई देता है। इसके साथ चार नीले मोरों की मौजूदगी ने इस समूह को और विशिष्ट बना दिया है।

संयुक्त राष्ट्र के रंगों से जुड़ा प्रतीकात्मक संदेश

भारत की ओर से भेंट किए गए मोरों के रंगों का चयन भी विशेष महत्व रखता है। चार नीले मोर और एक सफेद पंखों वाला मोर संयुक्त राष्ट्र से जुड़े नीले और सफेद रंगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस तरह इस भेंट में भारतीय पहचान के साथ संयुक्त राष्ट्र की संस्थागत पहचान का भी प्रतीकात्मक मेल दिखाई देता है।

समारोह के दौरान भारतीय प्रतिनिधि ने भारत की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत को रेखांकित किया। साथ ही बहुपक्षीय संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया गया। मोरों की यह भेंट दोनों पक्षों के बीच सहयोग और मित्रता के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में सामने आई।

भारत की प्राकृतिक विरासत को वैश्विक मंच

भारत जैव विविधता की दृष्टि से दुनिया के महत्वपूर्ण देशों में शामिल है। देश में विभिन्न प्रकार के वन्यजीव और पक्षी पाए जाते हैं। मोर भारत की इस प्राकृतिक विविधता और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय जैसे अंतरराष्ट्रीय परिसर में भारतीय मोरों की मौजूदगी भारत की प्राकृतिक विरासत को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर भी देती है। यह पहल केवल एक पक्षी को भेंट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारत अपनी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रख रहा है।

पुराने संबंधों को नई कड़ी

भारत और संयुक्त राष्ट्र के संबंध लंबे समय से बहुआयामी रहे हैं। राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग के अलावा दोनों के बीच सांस्कृतिक तथा विरासत से जुड़े संबंध भी महत्वपूर्ण हैं। वर्ष 1981 में मोरों की भेंट के बाद अब दोबारा यह पहल किया जाना दोनों पक्षों के बीच पुराने संबंधों की निरंतरता को दर्शाता है।

शुक्रवार को हुए समारोह में पांच युवा मोरों को औपचारिक रूप से UNOG को सौंपे जाने के साथ इस परंपरा को नई कड़ी मिली। भारतीय प्रतिनिधियों और संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम ने भारत की प्राकृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच एक अनूठा संबंध स्थापित किया।

मोर बने भारत-जिनेवा संबंधों के प्रतीक

भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर अब जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व करेंगे। चार नीले और एक सफेद पंखों वाले मोर का यह समूह संयुक्त राष्ट्र के रंगों से भी जुड़ा हुआ है, जिससे इस भेंट का प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ जाता है।

1981 में शुरू हुई इस परंपरा को दोबारा आगे बढ़ाते हुए भारत ने न केवल अपने राष्ट्रीय पक्षी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थान दिया है, बल्कि अपनी समृद्ध प्राकृतिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और बहुपक्षवाद के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश भी दिया है। शुक्रवार का यह समारोह भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में एक सुंदर और प्रतीकात्मक अध्याय के रूप में दर्ज हुआ।

Next Story