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भारत ने संयुक्त राष्ट्र को आतंकवाद से लड़ने के लिए दिए 5,00,000 अमेरिकी डॉलर

Neha
9 April 2021 2:13 AM GMT
भारत ने संयुक्त राष्ट्र को आतंकवाद से लड़ने के लिए दिए 5,00,000 अमेरिकी डॉलर
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प्रभावी विकल्पों के तौर पर बारूदी सुरंगों और आईईडी का सहारा लिया है.

भारत (India) ने संयुक्त राष्ट्र (United Nation) के आतंकवाद रोधी न्यास कोष के लिए 5,00,000 अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त योगदान दिया है. इसके साथ ही आतंकवाद से निपटने के लिए स्थापित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय में भारत का योगदान 10 लाख डालर से अधिक हो गया है. भारत ने कहा कि वह आतंकवाद (Terrorism) का मुकाबला करने के साझा मकसद को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के साथ सहयोग जारी रखना चाहता है.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने ट्वीट कर कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद रोधी न्यास कोष में 5,00,000 डॉलर का योगदान देने पर गर्व है और इस राशि के साथ भारत का अब तक का कुल योगदान 10.05 लाख डालर हो गया है. मिशन ने कहा कि वह आतंकवाद से निपटने के अपने साझा मकसद को आगे बढ़ाने के लिए विशिष्ट कार्यक्रमों व परियोजनाओं पर आतंकवाद रोधी संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएनओसीटी) के साथ सहयोग जारी रखने का इच्छुक है.
भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने किया ट्वीट

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद रोधी कोष में पांच लाख डॉलर का योगदान दिया


संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने ट्वीट किया कि भारत ने आतंकवाद रोधी न्यास कोष में 5,00,000 डॉलर का अतिरिक्त योगदान किया है. उन्होंने कहा कि भारत अब तक यूएनओसीटी में दस लाख डॉलर से अधिक का योगदान कर चुका है, जिनमें अफ्रीका के लिए योगदान शामिल है.
दाएश और अल नुसरा फ्रंट पर जताई चिंता
बता दें कि भारत ने गुरुवार को इस बात को लेकर गहरी चिंता जताई कि दाएश और अल नुसरा फ्रंट जैसे आतंकी समूह दहशत फैलाने के लिए बारूदी सुरंगों और आईईडी जैसे विस्फोटकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके साथ ही भारत ने कहा कि इस प्रकार की युद्ध-रणनीति से प्रभावित देशों को मदद की जरूरत है.
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) विकास स्वरूप ने 'माइन एक्शन' पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली चर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि बारूदी सुरंगों से प्रभावित देशों, खासतौर पर संघर्ष की स्थिति वाले देशों, को सहायता की जरूरत है. उन्होंने कहा कि यह गहरी चिंता का विषय है कि दाएश, हयात ताहिर अल शाम, अल नुसरा फ्रंट जैसे आतंकवादी समूहों ने दहशत फैलाने और मासूम लोगों को डराने के लिए कम लागत और प्रभावी विकल्पों के तौर पर बारूदी सुरंगों और आईईडी का सहारा लिया है.


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