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बांग्लादेश चुनाव पर भारत की नजर, राजनीतिक अस्थिरता से वर्षों की कोशिशों पर विराम तय
jantaserishta.com
12 Feb 2026 4:13 PM IST

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नई दिल्ली: बांग्लादेश में वोट चोरी और हिंसा की घटनाओं के बीच गुरुवार को आखिरकार चुनाव शुरू हो गया। बांग्लादेशी मीडिया ने चुनाव आयोग के हवाले से जानकारी साझा की है कि दोपहर 12:00 बजे तक पूरे देश में 32.88 फीसदी वोटिंग हुई।
ईसी के सीनियर सेक्रेटरी अख्तर अहमद ने शहर के निर्वचन भवन में दोपहर 1:10 बजे मीडिया को ब्रीफ करते हुए कहा, “हमने 42,651 पोलिंग स्टेशनों में से 32,789 से डेटा इकट्ठा किया है। डेटा के मुताबिक, वोटिंग 32.88 फीसदी है।”
देश भर में 300 पार्लियामेंट्री सीटों में से 299 पर शांतिपूर्ण माहौल में वोटिंग हो रही है। शेख हसीना की सरकार के गिराए जाने के बाद से भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध काफी खराब हो गए हैं। मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पाकिस्तान और चीन की तरफ ज्यादा झुकी हुई है। यूनुस के शासन में पाकिस्तान को बांग्लादेश में एंट्री मिल गई।
जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तान बांग्लादेश में हालिया स्थिति पर अपना नियंत्रण बना रहा है। यही कारण है कि हाल के समय में बांग्लादेश में कुछ ऐसी नीतियां बनाई गई हैं, जिनका मकसद भारत के हितों को नुकसान पहुंचाना था।
भारत का हमेशा से यही रुख रहा है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल होनी चाहिए और जल्द ही चुनाव होने चाहिए। भारत ने बांग्लादेश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव के लिए अपना समर्थन भी जताया था। सर्वे में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सबसे आगे थी। भारतीय पक्ष और बीएनपी दोनों चुनाव के आखिरी नतीजे के आधार पर भारत-बांग्लादेश के बीच संबंधों को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए। भारत भी चुनाव पर करीब से अपनी नजर बनाए हुए है। इस चुनाव में जीत बीएनपी की हो या फिर जमात की, दोनों ही स्थिति में भारत के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है। इन सबसे ऊपर भारत के लिए सबसे अहम मुद्दा सुरक्षा है।
भारत बांग्लादेश के साथ 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। यह भारत की किसी भी पड़ोसी के साथ सबसे लंबी सीमा है। ऐसे में भारत की शांति और सुरक्षा के लिए एक स्थिर बांग्लादेश जरूरी है। भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां कोई बाड़ नहीं है। इन्हीं इलाकों से गैर-कानूनी इमिग्रेशन, जानवरों की तस्करी, नशीली दवाओं का व्यापार और नकली करेंसी का आना-जाना होता है।
एक अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश की स्थिरता एक बड़ी चिंता है। एक मजबूत सरकार के साथ एक स्थिर बांग्लादेश का मतलब होगा कि सीमाएं सुरक्षित रहेंगी, क्योंकि दोनों पक्ष बातचीत करेंगे। भारत बांग्लादेश से आतंकवादियों की एंट्री को लेकर भी चिंतित है।
यूनुस के शासन में कई कट्टरपंथियों और आतंकवादियों को रिहा किया गया है। साथ ही बांग्लादेश में यूनुस के काल में आईएसआई एक्टिव हो चुकी है। आईएसआई के कमांडर बांग्लादेश में युवाओं को ट्रेनिंग दे रहे हैं, जिसका भविष्य में भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा।
शेख हसीना सरकार गिरने से पहले, काउंटर-टेररिज्म दोनों देशों के बीच संबंधों का एक अहम हिस्सा रहा है। दोनों देशों ने पहले जो काउंटर-टेरर ऑपरेशन किए हैं, वे बिना किसी रुकावट के हुए हैं। भारत चाहेगा कि यह संतुलन बना रहे और इसलिए, लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार का होना बहुत जरूरी है।
बांग्लादेश और भारत लंबे समय से व्यापारिक साझेदार रहे हैं। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के लिए एक स्थिर बांग्लादेश बहुत जरूरी है। हसीना की सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध काफी अच्छे थे। दोनों देशों ने मिलकर आर्थिक सहयोग बढ़ाया था। इसमें व्यापार से आगे बढ़कर ऊर्जा सहयोग और बिजली का व्यापार भी शामिल था।
ये जरूरी मुद्दे हैं, और दोनों देश चाहेंगे कि ये बने रहें। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिरता पर निर्भर करेगा। किसी भी तरह की अस्थिरता दोनों देशों के वर्षों की मेहनत पर पानी फेर देगी। भारत और बांग्लादेश ने 1971 से अब तक साथ मिलकर जिस तरह से हर क्षेत्र में आपसी संबंध स्थापित किए हैं और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया है, वह सब बर्बाद हो जाएगा।
भारत को उम्मीद है कि बीएनपी चुनाव जीतेगी, क्योंकि जमात-ए-इस्लामी की तुलना में इस पार्टी के साथ काम करना आसान होगा। एक अधिकारी ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि अगर जमात सत्ता में आई तो संबंध पूरी तरह टूट जाएंगे। भारत ने जमात के साथ तब काम किया है जब वह पहले बीएनपी के साथ गठबंधन में थी। अभी स्थिति अलग है क्योंकि जमात और बीएनपी अब सहयोगी नहीं बल्कि दुश्मन हैं।
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