विश्व
UN में भारत की दो टूक- दूर के युद्धों से प्रभावित होगी खाद्य और ईंधन की आपूर्ति
Tara Tandi
27 Sept 2026 12:14 PM IST

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संयुक्त राष्ट्र: भारत और कई विकासशील देशों ने संयुक्त राष्ट्र को चेतावनी दी है कि युद्धों से युद्ध के मैदान के बाहर भी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इससे भोजन और ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं और उन देशों में व्यापार बाधित हो रहा है जिनका इन संघर्षों पर बहुत कम प्रभाव है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि लड़ाई से दूर स्थित देशों को भोजन, ईंधन, उर्वरक, वित्त और व्यापार में रुकावटों के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा, "जिन पर सबसे ज़्यादा असर पड़ता है, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है।"
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि शांति बनाए रखने में विफलता सुरक्षा को कमजोर कर रही है, प्रगति के लिए खतरा पैदा कर रही है और विकास की गति को धीमा कर रही है। इसका असर 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) में विशेष रूप से गंभीर रहा है।
भारत ने यूक्रेन में युद्ध और खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्षों पर चिंता व्यक्त की। भारत ने संयम बरतने, तनाव कम करने और ऊर्जा व व्यापार के निर्बाध प्रवाह (जिसमें जहाजों और नाविकों की सुरक्षा भी शामिल है) का आह्वान किया।
जनरल डिबेट (आम बहस) के दौरान कैरिबियन, हिंद महासागर और अफ्रीका के नेताओं के भाषणों में भी यही आर्थिक चेतावनी देखने को मिली।
डोमिनिकन रिपब्लिक के राष्ट्रपति लुइस अबिनाडर ने कहा कि यूरोप और मध्य पूर्व में हो रहे युद्ध "हमारे तटों से बहुत दूर" हैं, लेकिन वे सीधे तौर पर घरेलू स्तर पर भोजन और ऊर्जा की कीमतों को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा कि एक विकासशील द्वीप राष्ट्र होने के नाते, डोमिनिकन रिपब्लिक समझता है कि बाहरी झटके किस तरह तेज़ी से विकास और परिवारों की सुरक्षा को कमजोर कर सकते हैं। अबिनाडर ने तनाव कम करने, नेविगेशन की स्वतंत्रता और आगे के संघर्ष को रोकने के लिए राजनयिक प्रयासों का आह्वान किया।
कोमोरोस के राष्ट्रपति अज़ाली असौमानी ने कहा कि मध्य पूर्व में युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के ठप पड़ने से वैश्विक स्तर पर झटका लगा है।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष से कोमोरोस जैसे कमजोर और आयात पर निर्भर देशों में भोजन और ऊर्जा सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। इन दबावों के कारण 'सतत विकास लक्ष्यों' (Sustainable Development Goals) को हासिल करना भी और मुश्किल होता जा रहा है।
पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने कहा कि युद्ध अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं और समृद्धि की संभावनाओं को कम कर रहे हैं। उन्होंने पड़ोसी देशों, व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकने का आह्वान किया।
मोंटेनेग्रो ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप पैदा हुए ऊर्जा और ईंधन संकट से "हर किसी को नुकसान हो रहा है"।
उन्होंने कहा, "हमें इस सामूहिक आत्म-पीड़ा (collective masochism) को खत्म करना होगा।" साथ ही, उन्होंने इसके असर को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों और तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले तंत्रों पर चर्चा का आह्वान किया। मालदीव के उपराष्ट्रपति हुसैन मोहम्मद लतीफ़ ने कहा कि असुरक्षा अब समुद्री रास्तों, सप्लाई चेन, फाइनेंशियल मार्केट और डिजिटल नेटवर्क के ज़रिए फैलती है।
उन्होंने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से समुद्री ट्रैफ़िक में रुकावट आने से ईंधन की कीमतें बढ़ीं और खाद्य आपूर्ति व हवाई यात्रा पर असर पड़ा। इसके नतीजे मालदीव के पर्यटन और सरकारी वित्त पर भी पड़े, क्योंकि वहां की अर्थव्यवस्था काफ़ी हद तक आयात और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर निर्भर है।
लतीफ़ ने यह भी चेतावनी दी कि हिंद महासागर में बड़ी ताकतों के बीच प्रतिस्पर्धा से छोटे देशों के पास मौजूद विकल्प सीमित नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के लिए खुला रहना चाहिए।
लातविया के राष्ट्रपति एडगर्स रिंकेविच ने इस बहस को तात्कालिक आर्थिक नुकसान से आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा, "यूक्रेन में जो होता है, वह यूक्रेन तक ही सीमित नहीं रहता; मध्य पूर्व, लाल सागर और सूडान में जो होता है, वह वहीं तक सीमित नहीं रहता।"
कई वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक नतीजों से पता चलता है कि संघर्षों को अलग-थलग क्षेत्रीय घटनाएँ क्यों नहीं माना जा सकता। परिवहन, ऊर्जा और बीमा की बढ़ी हुई लागत सप्लाई चेन के ज़रिए हज़ारों किलोमीटर दूर घरों तक पहुँचती है।
भारत अपना ज़्यादातर कच्चा तेल आयात करता है और ऊर्जा, उर्वरक व अन्य ज़रूरी सामानों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर निर्भर है। वैश्विक ईंधन और माल ढुलाई की कीमतों में बदलाव का असर परिवहन, खेती और उपभोक्ता लागत पर पड़ सकता है, जिससे दूर-दराज़ के संघर्ष भारतीय परिवारों के लिए सीधे आर्थिक चिंता का विषय बन जाते हैं।
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