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Kathmandu काठमांडू। भारत वित्तीय वर्ष 2024-25 में नेपाल का सबसे बड़ा द्विपक्षीय दाता बनकर उभरा। सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपने दक्षिणी पड़ोसी देश को 107.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की। देश के वित्त मंत्रालय की ओर से जारी डेवलपमेंट कोऑपरेशन रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम 84.2 मिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि यूएसएआईडी 67.1 मिलियन डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
जापान ने 58.3 मिलियन डॉलर और स्विट्जरलैंड ने 30.1 मिलियन डॉलर की सहायता प्रदान की, जिससे वे क्रमशः चौथे और पांचवें सबसे बड़े द्विपक्षीय दाता बने। वित्त मंत्रालय का वार्षिक प्रकाशन विदेशी विकास साझेदारों की ओर से प्रदान किए गए अनुदान, ऋण और तकनीकी सहायता का लेखा-जोखा रखता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ओर से दी गई कुल सहायता में से 73.3 मिलियन डॉलर अनुदान के रूप में, 25.8 मिलियन डॉलर ऋण के रूप में और 8.8 मिलियन डॉलर तकनीकी सहायता के रूप में प्राप्त हुए।
विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक जैसे बहुपक्षीय दाता पारंपरिक रूप से नेपाल के सबसे बड़े सहयोगी रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में नेपाल को बहुपक्षीय और द्विपक्षीय दोनों स्रोतों से कुल 1.60 अरब डॉलर प्राप्त हुए। सभी दाताओं (बहुपक्षीय और द्विपक्षीय) में भी भारत तीसरे स्थान पर रहा। विश्व बैंक 541.0 मिलियन डॉलर के साथ पहले स्थान पर, एशियाई विकास बैंक 443.2 मिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर, और भारत 107.8 मिलियन डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
पिछले 10 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2015-16 से) में भारत की विकास सहायता में उतार-चढ़ाव रहा है, लेकिन कुल मिलाकर इसमें बढ़ोतरी का रुझान देखा गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत ने दशक का अपना सबसे अधिक वार्षिक वितरण 118.1 मिलियन डॉलर दर्ज किया। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों में पिछले वर्ष की तुलना में 8.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
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