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अफगानिस्तान में महिलाओं का पार्क में जाना भी हुआ दूभर, जानें तालिबान का नया फरमान

Neha Dani
12 Aug 2022 10:56 AM GMT
अफगानिस्तान में महिलाओं का पार्क में जाना भी हुआ दूभर, जानें तालिबान का नया फरमान
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महिलाएं केवल तालिबान द्वारा निर्धारित दिन ही पार्कों में घूम सकती हैं। साथ ही रेस्तरां में फैमली सैक्शन को बंद कर दिया गया है।

अफगानिस्तान में तालिबान राज का एक साल पूरा होने जा रहा है। एक साल में तालिबान ने महिलाओं की स्वतंत्रता पर लगाम लगाने के लिए कई नियम-कानून बनाए। महिलाओं की आजादी के खिलाफ एक बार फिर तालिबान ने महिलाओं को लेकर एक हुक्म जारी की है जिससे महिलाओं की स्थिति और दयनीय होने वाली है। अफगान पीस वॉच के अनुसार, अब हेरात प्रांत में अफगान महिलाओं और लड़कियों को पार्कों में स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति नहीं है। महिलाएं केवल तालिबान द्वारा निर्धारित दिन ही पार्कों में घूम सकती हैं। साथ ही रेस्तरां में फैमली सैक्शन को बंद कर दिया गया है।


बिना किसी पुरुष के महिलाओं को पार्क में घूमने की इजाजत नहीं: तालिबान
समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, एक 22 साल की लड़की, रेहाना अहमदियान ने कहा कि उनकी मां को उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल है जिसकी वजह से डॉक्टर की सलाह पर वो और उनकी मां पार्क में घूमने जाती थीं, लेकिन जब से तालिबान ने सत्ता संभाला है तब से दोनों को चेतावनी दी गई है कि किसी पुरुष के बिना महिलाएं पार्क न जाएं। उन्होंने कहा कि हमारी संपूर्ण आजादी छिन चुकी है। रेहाना ने आगे कहा कि तालिबान राज से पहले वो अपनी परिवार के साथ खाना खाने के लिए कई बार रेस्तरां जाती थीं लेकिन तालिबान राज में महिलाओं पर कई प्रतिबंध लगाए गए जिसकी वजह से अब वो एक घंटे भी अपने परिवार के साथ बाहर नहीं जा सकती।

हेरात स्थित एक महिला अधिकार कार्यकर्ता असिला मिस्बाह ने कहा, 'तालिबान के पास सत्ता में आने के बाद से महिलाओं की आजादी को खत्म करने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं बचा है। तालिबान ने सभी महिलाओं को घर में कैद कर दिया है। इसी तरह जाबुल प्रांत में भी तालिबान ने हाल ही में पुरुषों को चेतावनी दी है कि वे महिलाओं को शादी समारोह में शामिल न होने दें।

बता दें कि तालिबान राज में अफगानिस्तान में मौजूद महिलाओं के सपनों, उनकी उम्मीदों, उनके अधिकारों पर लगाम तो लग ही चुका है साथ ही अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में महिलाओं की भूमिका भी पूरी तरह खत्म होती जा रही है। तालिबान के सत्ता में आने से पहले महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा, कार्यस्थल और सार्वजनिक और दैनिक जीवन के अन्य पहलुओं में पूरी तरह से भाग लेने का अधिकार था। तकरीबन एक साल से तालिबान ने अफगानिस्तान में महिलाओं को सार्विजनिक जीवन से भी वंचित रखा गया है।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने हाल ही में दावा किया था कि पाकिस्तान के आदेश से अफगान लड़कियों को स्कूल से प्रतिबंधित किया गया था। अफगानिस्तान में छठी कक्षा से ऊपर की लड़कियों के स्कूल जाने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले के लिए दुनिया भर में तालिबान शासन की भारी आलोचना हुई है। लड़कियों के स्कूलों को बंद हुए 300 दिन से ज्यादा का समय हो गया है। काबुल के अधिकारियों ने बताया कि यह यह कानून और कितने दिनों तक तालिबान के नेता के आदेश पर निर्भर करता है।

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