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इमरान सरकार विपक्ष के आगे झुके, 'अपमान' करने वालों को देने वाले थे 5 साल की सजा, अब वापस लेंगे अध्यादेश

Renuka Sahu
4 March 2022 4:26 AM GMT
इमरान सरकार विपक्ष के आगे झुके, अपमान करने वालों को देने वाले थे 5 साल की सजा, अब वापस लेंगे अध्यादेश
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फाइल फोटो 

पाकिस्तान की सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने विपक्ष की मांग को मानते हुए इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम कानून 2016 अध्यादेश को वापस लेने पर सहमति जताई है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। पाकिस्तान (Pakistan) की सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (पीटीआई) ने विपक्ष की मांग को मानते हुए इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम कानून 2016 (Prevention of Electronic Crimes Act– पीईसीए) अध्यादेश को वापस लेने पर सहमति जताई है. इस अध्यादेश को संयुक्त कार्रवाई समिति के सदस्यों के विचार-विमर्श और मसौदे को अंतिम रूप देने के बाद वापस लिया जा रहा है. इससे पहले पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी (Fawad Chaudhry) ने बुधवार को कहा था कि आठ से 12 महीने में अंतिम रूप दिए जाने के बाद ड्राफ्ट को आगे भेजा जाएगा.

चौधरी ने ये बातें एक निजी चैनल से बात करते हुए कही थीं. इस हफ्ते की शुरुआत में ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने भी इस अध्यादेश की आलोचना की थी. उसने कहा कि कानून में संशोधन मानहानि को एक गैर-जमानती अपराध बना देगा और दोषी पाए जाने पर अधिकतम जेल की अवधि को तीन से बढ़ाकर पांच साल कर दिया जाएगा. इससे कोई भी शख्स या संस्था किसी के भी खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
मंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी
पाकिस्तान की सरकार ने पीईसीए कानून के प्रावधान में बदलाव किए थे. जिसके तहत सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति या संस्था का अपमान करने पर तीन साल तक मिलने वाली जेल की सजा को बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया. अध्यादेश को ऐसे वक्त पर जारी किया गया, जब कुछ दिन पहले ही मंत्री मुराद सईद ने खिलाफ 'आपत्तिजनक' टिप्पणी करने पर पत्रकार मोहसिन बेग को गिरफ्तार किया गया था. वहीं पाकिस्तानी कानूनी मंत्री बैरिस्टर फारुख ने कहा था कि 'फर्जी खबरों' में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा.
गिरफ्तारी के बाद संशोधन पर फैसला
मोहसिन बेग को गिरफ्तार किए जाने के बाद कानून में संशोधन की बात कही गई. बेग दस मंत्रियों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का सर्टिफिकेट देने के पीएम इमरान खान के फैसले से जुड़े टीवी वन कार्यक्रम में पैनलिस्ट के तौर पर शामिल हुए थे. वहीं पीईसीए 2016 अध्यादेश को पाकिस्तान में साइबर अपराध और अनधिकृत कार्यों को रोकने के लिए लाया गया था. लेकिन इमरान सरकार अपने निजी लाभ के लिए इसमें संशोधन कर रही थी. ताकि उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले हर शख्स के खिलाफ कार्रवाई की जा सके.
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