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इस्लामाबाद। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान की कर व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रम के बीच गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पाकिस्तान में आईएमएफ कार्यक्रम के शुरुआती दो वर्षों के दौरान कर प्रणाली में असमानता बढ़ने की बात सामने आई है। एक ओर वेतनभोगी कर्मचारियों से कर वसूली लगातार बढ़ रही है, वहीं खुदरा व्यापार, कृषि और रियल एस्टेट जैसे आर्थिक रूप से प्रभावशाली क्षेत्रों का कर राजस्व में योगदान बेहद कम बना हुआ है। पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट में इस असमानता को प्रमुखता से उठाया गया है।
IMF ने निष्पक्ष कर व्यवस्था की जरूरत पर दिया जोर
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 20 और 21 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय कर सुधार सम्मेलन के दौरान आईएमएफ के मध्य पूर्व एवं मध्य एशिया विभाग के निदेशक जिहाद अज़ौर ने कर व्यवस्था को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ बनाने की आवश्यकता बताई।उन्होंने कहा कि ऐसी कर प्रणाली विकसित की जानी चाहिए, जिसमें सभी आर्थिक क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित हो और करदाताओं के बीच भेदभाव की स्थिति न बने।अज़ौर के अनुसार, निष्पक्ष कर प्रणाली से लोगों में नियमों का पालन करने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। इससे सरकार और करदाताओं के बीच विश्वास मजबूत होगा तथा कारोबार को विस्तार देने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
वेतनभोगी कर्मचारियों पर बढ़ा टैक्स का बोझ
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ कार्यक्रम शुरू होने से पहले पाकिस्तान में वेतनभोगी वर्ग का वार्षिक आयकर योगदान 391 अरब पाकिस्तानी रुपये था। जून 2026 तक यह बढ़कर 629 अरब रुपये पहुंच गया।इसके विपरीत खुदरा कारोबारियों, कृषि और रियल एस्टेट क्षेत्रों से अपेक्षित कर संग्रह नहीं हो पाया।रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में रियल एस्टेट क्षेत्र से आयकर संग्रह 38 प्रतिशत घटकर 35.2 अरब रुपये रह गया। वहीं, खुदरा व्यापारियों के लिए लागू नई कर योजना में 15 अक्टूबर तक केवल 137 नए कारोबारी जुड़े, जबकि वार्षिक लक्ष्य 10 लाख का निर्धारित किया गया था।ये आंकड़े पाकिस्तान की कर व्यवस्था में अलग-अलग आर्थिक वर्गों के योगदान के बीच बड़े अंतर को दर्शाते हैं।
कर छूट कम करने और कर आधार बढ़ाने की सलाह
जिहाद अज़ौर ने पाकिस्तान सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधारों पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सरकार को कर आधार व्यापक बनाने, राजस्व प्रशासन मजबूत करने और अनावश्यक कर छूटों को कम करने की दिशा में काम करना चाहिए।उनके अनुसार, कर संग्रह की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना आवश्यक है, ताकि अधिक लोग स्वेच्छा से कर व्यवस्था का हिस्सा बन सकें।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को राजस्व बढ़ाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
आर्थिक स्थिरता के बाद विकास की चुनौती
आईएमएफ अधिकारी ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने आर्थिक स्थिरता बहाल करने, बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत करने और निवेशकों का भरोसा वापस लाने की दिशा में कुछ प्रगति की है।हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आर्थिक स्थिरता हासिल करना पर्याप्त नहीं है। पाकिस्तान को दीर्घकालिक विकास, उत्पादकता बढ़ाने और निजी निवेश आकर्षित करने के लिए संरचनात्मक सुधार करने होंगे।अज़ौर ने कहा कि सरल और अनुमानित कर व्यवस्था से कंपनियों को निवेश बढ़ाने तथा औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल होने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
कृषि और रियल एस्टेट क्षेत्र पर भी उठे सवाल
पाकिस्तान में कृषि और संपत्ति कारोबार का अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन कर राजस्व में इनकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।आईएमएफ की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कृषि क्षेत्र का मूल्य संवर्धन में योगदान 24.6 प्रतिशत था, जबकि प्रभावी कर दर केवल 0.3 प्रतिशत रही। रिपोर्ट में कर व्यवस्था के विस्तार और बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई गई थी।
सरकार के सामने कर सुधारों की बड़ी चुनौती
दो दिवसीय सम्मेलन में कर प्रशासन के डिजिटलीकरण, संघीय और प्रांतीय कर व्यवस्थाओं में तालमेल, सरल आयकर प्रणाली तथा करदाताओं का विश्वास बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।आईएमएफ का जोर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार करे, जिसमें कर संग्रह का बोझ सीमित वर्गों पर केंद्रित न रहे।आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान सरकार इन सुझावों को किस हद तक लागू करती है और क्या प्रभावशाली आर्थिक क्षेत्रों को कर दायरे में लाने में सफलता मिलती है।
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