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रूस में प्लेग की आशंका पर IMA ने दी राहत भारत में फिलहाल खतरा नहीं

Ratna Netam
5 Oct 2026 2:47 PM IST
रूस में प्लेग की आशंका पर IMA ने दी राहत भारत में फिलहाल खतरा नहीं
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नई दिल्ली: रूस में न्यूमोनिक प्लेग से एक व्यक्ति की मौत होने की अपुष्ट खबरों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। हालांकि, भारत में इसे लेकर तत्काल खतरे की स्थिति नहीं बताई जा रही है। केरल स्टेट इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के रिसर्च सेल के कन्वीनर डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा है कि रूस में स्वास्थ्य अधिकारी संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी कर रहे हैं और फिलहाल भारत में घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस में जिस मामले की चर्चा हो रही है, उसमें मौत का आधिकारिक कारण अभी तक न्यूमोनिक प्लेग के रूप में निश्चित नहीं हुआ है।
मामला रूस के इरकुत्स्क क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 वर्षीय महिला की मौत के बाद संभावित न्यूमोनिक प्लेग को लेकर चर्चा शुरू हुई। स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि महिला का किसी तरह प्लेग के बैक्टीरिया से संपर्क हुआ था और बाद में उसे गंभीर निमोनिया हुआ। हालांकि, रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने अब तक प्लेग संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। रूस की उपभोक्ता स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर के अनुसार, अतिरिक्त जांच में महिला के काम से जुड़े किसी सूक्ष्मजीव की पुष्टि नहीं हुई और क्षेत्र की महामारी संबंधी स्थिति स्थिर बनी हुई है।
रिपोर्टों के मुताबिक महिला की मौत के बाद उसके संपर्क में आए करीब 200 लोगों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार जिन लोगों की पहचान की गई है, उनमें अब तक किसी में लक्षण सामने नहीं आए हैं और शुरुआती जांच के नतीजे भी निगेटिव रहे हैं। कुछ चिकित्सा संस्थानों में एहतियाती कदम उठाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इन कदमों का दायरा और स्थिति स्थानीय प्रशासन की निगरानी के तहत है।
डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा कि इस पूरे मामले को अभी एक विकसित होती स्थिति के रूप में देखना चाहिए। उनके मुताबिक, यह पता लगाना सबसे जरूरी है कि मौत का वास्तविक कारण क्या था, संबंधित व्यक्ति किन परिस्थितियों के संपर्क में आया था और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। उन्होंने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतियों में से एक बताया। उनके अनुसार, जिन लोगों के संपर्क में आने की पुष्टि होती है, उन्हें निगरानी में रखना और लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है।
न्यूमोनिक प्लेग प्लेग का वह रूप है जिसमें संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्लेग बैक्टीरिया *Yersinia pestis* के कारण होता है। प्लेग संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित पिस्सुओं के काटने, संक्रमित ऊतकों के सीधे संपर्क या न्यूमोनिक प्लेग के मामले में सांस से निकलने वाले संक्रमित कणों के संपर्क से फैल सकता है। न्यूमोनिक रूप गंभीर होता है और व्यक्ति से व्यक्ति तक श्वसन कणों के जरिए फैल सकता है।
WHO के मुताबिक न्यूमोनिक प्लेग में लक्षण तेजी से विकसित हो सकते हैं। इनमें बुखार, कमजोरी, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। बीमारी का समय पर पता चलना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि एंटीबायोटिक से प्लेग का इलाज संभव है और शुरुआती उपचार से गंभीर परिणामों को रोका जा सकता है। WHO यह भी कहता है कि उपचार में देरी होने पर न्यूमोनिक प्लेग बेहद गंभीर और जानलेवा हो सकता है।
रूस के मामले में सबसे अहम बात यह है कि बीमारी की पुष्टि और संभावित संक्रमण के स्रोत को लेकर अभी जांच चल रही है। स्थानीय मीडिया में जिस प्रयोगशाला दुर्घटना का जिक्र किया गया है, उसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रूसी अधिकारियों ने फिलहाल इसे अज्ञात कारणों से हुई निमोनिया की स्थिति बताया है। ऐसे में सोशल मीडिया या अपुष्ट दावों के आधार पर इसे निश्चित प्लेग संक्रमण या बड़े प्रकोप के रूप में पेश करना जल्दबाजी होगी।
डॉ. जयदेवन ने भारत के संदर्भ में भी लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि अभी ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे भारत में तत्काल खतरे की बात कही जाए। उनके अनुसार, इस समय रूस में मामला जांच और संपर्कों की निगरानी के दायरे में है। उन्होंने यह भी बताया कि प्लेग कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसका इलाज आधुनिक चिकित्सा के लिए अज्ञात हो। जोखिम वाले लोगों के लिए चिकित्सकीय निगरानी और जरूरत पड़ने पर डॉक्टरों की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक उपचार उपलब्ध है।
फिलहाल रूस में अधिकारियों का मुख्य जोर संपर्कों की पहचान, निगरानी, जांच और संभावित संक्रमण के प्रसार को रोकने पर है। वहीं भारत में विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अपुष्ट रिपोर्ट सामने आने से लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। जब तक रूस की ओर से मौत के कारण और संक्रमण की प्रकृति को लेकर स्पष्ट वैज्ञानिक पुष्टि नहीं होती, तब तक इस मामले को संदिग्ध घटना के रूप में ही देखना उचित होगा।
कुल मिलाकर, रूस में एक लैब कर्मचारी की मौत के बाद न्यूमोनिक प्लेग की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन फिलहाल बीमारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संपर्क में आए लोगों की निगरानी की जा रही है और शुरुआती रिपोर्टों में उनके संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है। भारत के संदर्भ में भी फिलहाल तत्काल खतरे की स्थिति सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में रूस की जांच रिपोर्ट और संपर्कों की निगरानी से ही यह स्पष्ट होगा कि यह प्लेग का मामला था या गंभीर निमोनिया का कोई अन्य कारण।
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