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नेपाल बाढ़ के बाद शवों की पहचान बड़ी चुनौती

Kavita2
30 Aug 2026 5:43 PM IST
नेपाल बाढ़ के बाद शवों की पहचान बड़ी चुनौती
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काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद अब प्रशासन के सामने एक नई और बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति खड़ी हो गई है। सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों लोगों के लापता होने के बाद अब राहत एवं बचाव एजेंसियां उन शवों की पहचान करने में जुटी हैं, जिनका कोई दावेदार सामने नहीं आया है।

बाढ़ के कई दिन बाद नदियों से बरामद किए गए कई शवों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण कई शव क्षतिग्रस्त हो गए हैं और सड़ने लगे हैं। ऐसे में परिजनों के लिए उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है।

पहचान के बिना शवों का निपटारा बड़ी चुनौती

प्राकृतिक आपदा के बाद सबसे बड़ी प्राथमिकता पीड़ितों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाना होती है। लेकिन नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ के बाद कई शव ऐसे मिले हैं, जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।

अधिकारियों के अनुसार, शवों की पहचान के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा हर शव का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में अगर कोई परिवार अपने लापता सदस्य की तलाश में आए तो जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।

अस्थायी दफन की प्रक्रिया शुरू

अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि लंबे समय तक शवों को सुरक्षित रखना संभव नहीं है।

इसी वजह से जिन शवों की तुरंत पहचान नहीं हो पा रही है, उन्हें सभी जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद अस्थायी रूप से दफनाया जा रहा है।

दफनाने से पहले शवों की तस्वीरें, डीएनए नमूने, कपड़े और अन्य पहचान से जुड़ी चीजों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह है कि भविष्य में किसी भी संभावित पहचान में मदद मिल सके।

ग्लेशियर टूटने के बाद आई थी विनाशकारी बाढ़

जानकारी के अनुसार, यह भीषण आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर ढहने के बाद आई।

ग्लेशियर टूटने से भारी मात्रा में पानी, कीचड़, चट्टानें और मलबा नदियों में आ गया।

इसका सबसे ज्यादा असर भोटे कोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों पर पड़ा।

तेज बहाव के कारण कई इलाकों में भारी तबाही हुई और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए।

नदियों से लगातार मिल रहे शव

बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के दौरान नदियों और मलबे वाले क्षेत्रों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं।

कई शव इतने क्षतिग्रस्त हैं कि सामान्य तरीके से पहचान करना संभव नहीं हो पा रहा है।

ऐसे मामलों में वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया जा रहा है।

फोरेंसिक जांच बनी अहम सहारा

नेपाल प्रशासन अब आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है।

विशेषज्ञ शवों से डीएनए नमूने लेने, शारीरिक पहचान और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से मृतकों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं।

यह प्रक्रिया समय लेने वाली है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इससे पीड़ित परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

परिवारों का इंतजार जारी

इस आपदा में लापता हुए लोगों के परिवार अभी भी अपने प्रियजनों की तलाश में हैं।

कई परिवार राहत शिविरों, अस्पतालों और प्रशासनिक केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।

उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन्हें अपने परिजनों की स्थिति के बारे में सही जानकारी मिल सके।

राहत कार्य के साथ पहचान अभियान भी जारी

नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ शवों की पहचान के काम को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग, सुरक्षा एजेंसियां और फोरेंसिक टीमें मिलकर काम कर रही हैं।

सम्मानजनक अंतिम प्रक्रिया पर जोर

अधिकारियों का कहना है कि हर मृतक को सम्मानजनक अंतिम प्रक्रिया मिलना जरूरी है, चाहे उसकी पहचान हुई हो या नहीं।

इसी कारण बिना पहचान वाले शवों को भी पूरी सावधानी और सम्मान के साथ दफनाया जा रहा है।

आपदा के बाद लंबी चुनौती

नेपाल में आई इस बाढ़ ने देश के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। जहां एक ओर हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और पुनर्वास की कोशिश जारी है, वहीं दूसरी ओर मृतकों की पहचान और उनके परिवारों तक सूचना पहुंचाना भी बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।

अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक तरीकों और बेहतर दस्तावेजीकरण के जरिए कोशिश की जा रही है कि कोई भी पीड़ित परिवार अपने लापता सदस्य की जानकारी से वंचित न रहे।

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