
x
Hague हेग: International Criminal Court (ICC) के जजों ने मंगलवार को एक अहम फैसले में कहा कि माली में हुए अत्याचारों के 65,000 से अधिक पीड़ितों को कुल 8.5 मिलियन डॉलर का मुआवज़ा दिया जाना चाहिए। यह फैसला उस मामले में आया है जिसमें अल हसन एग अब्दुल अज़ीज़ को युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया गया था।
अदालत के अनुसार, यह मुआवज़ा सीधे नकद भुगतान के बजाय मुख्य रूप से सामूहिक पुनर्वास कार्यक्रमों के रूप में दिया जाएगा। इसमें शिक्षा कार्यक्रम, कौशल प्रशिक्षण और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसी सेवाएं शामिल होंगी। इन उपायों का विशेष ध्यान उन महिलाओं और लड़कियों पर रहेगा, जिन्होंने सबसे अधिक अत्याचार झेला।
यह मामला 2012 में माली के ऐतिहासिक शहर टिम्बकटू में हुई घटनाओं से जुड़ा है, जब इस्लामिस्ट समूहों ने वहां सख्त शरिया कानून लागू किया था। उस दौरान धार्मिक पुलिस का नियंत्रण समाज के हर हिस्से पर बढ़ गया था, जिसमें महिलाओं और लड़कियों की आजादी पर विशेष रूप से कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे।
जजों ने अपने आदेश में कहा कि महिलाओं और लड़कियों को घर से बाहर निकलने के लिए सख्त नियमों का पालन करना पड़ता था, जैसे विशेष कपड़े पहनना। कई मामलों में उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति ही नहीं थी, जिससे उनके भीतर भय का माहौल बन गया था।
अल हसन एग अब्दुल अज़ीज़ उस पुलिस बल का प्रमुख हिस्सा था, जिसने इन नियमों को लागू किया और सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने जैसी सज़ाओं का आदेश दिया। अदालत ने जून 2024 में उसे आठ गंभीर मामलों में दोषी ठहराया था, जिनमें युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध शामिल हैं।
ICC ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि दोषी व्यक्ति के पास इतना संसाधन नहीं है कि वह खुद मुआवज़े की राशि चुका सके। ऐसे में अदालत ने Trust Fund for Victims से अनुरोध किया है कि वह पीड़ितों के लिए इस मुआवज़े के प्रावधान में सहायता करे।
अदालत ने कहा कि मुआवज़ा केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह पीड़ितों के पुनर्वास और उनके जीवन को फिर से सामान्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सामूहिक पुनर्वास कार्यक्रमों के जरिए प्रभावित समुदायों को दीर्घकालिक सहायता प्रदान की जाएगी।
ICC के अनुसार, सज़ा के बाद मुआवज़ा देना न्याय प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है। इससे पीड़ितों को न्याय का एहसास होता है और उनके अधिकारों की रक्षा होती है। फिलहाल ICC के पांच अन्य मामलों में भी इसी तरह के मुआवज़े के आदेश दिए जा चुके हैं, जिनका क्रियान्वयन ट्रस्ट फंड फॉर विक्टिम्स के माध्यम से किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यह दिखाता है कि युद्ध और संघर्ष के दौरान हुए अपराधों के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, ICC का यह फैसला माली के हजारों पीड़ितों के लिए राहत लेकर आया है और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की सुरक्षा और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
TagsICCमालीमुआवज़ाअल हसनयुद्ध अपराधमानवता के खिलाफ अपराधटिम्बकटूशरिया कानूनअंतरराष्ट्रीय न्यायMalicompensationAl Hassanwar crimescrimes against humanityTimbuktuSharia lawinternational justiceजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





