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ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान
Shantanu Roy
24 Jun 2025 10:16 PM IST

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New Delhi. नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि "मैं ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं चाहता, क्योंकि सत्ता परिवर्तन बहुत अराजकता लेकर आता है।" ट्रंप ने यह भी कहा कि "ईरान के पास बहुत तेल है। वह बहुत बेहतर कर सकता है।" ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए आगे कहा, "वे न तो संवर्धन करेंगे और न ही परमाणु हथियार बनाएंगे। वे एक महान व्यापारिक राष्ट्र बनने जा रहे हैं।"
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) June 24, 2025
"वे न तो संवर्धन करेंगे और न ही परमाणु हथियार बनाएंगे। वे एक महान व्यापारिक राष्ट्र बनने जा रहे हैं।" pic.twitter.com/5hdP7P3oO0
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनावों को लेकर लगातार बयानबाजी होती रही है। ट्रंप प्रशासन ने अपने कार्यकाल के दौरान 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, जिसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तल्खी आ गई थी। ट्रंप की इस टिप्पणी को विशेषज्ञ ईरान के प्रति नरम रुख और व्यापारिक संभावनाओं के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल और ईरान के बीच युद्धविराम (सीजफायर) कराने में अहम भूमिका निभाने के लिए 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। यह नामांकन अमेरिका के हाउस प्रतिनिधि बडी कार्टर द्वारा किया गया है, जिन्होंने नोबेल कमेटी को पत्र लिखकर ट्रंप की मध्यस्थता और निर्णायक नेतृत्व की सराहना की है।
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, बडी कार्टर ने लिखा कि "राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व ने न केवल इजरायल-ईरान संघर्ष को रोकने में मदद की, बल्कि ईरान जैसे आतंकवाद प्रायोजित राष्ट्र को परमाणु हथियार प्राप्त करने से भी रोका।" यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। इस वर्ष की शुरुआत में यूएस सांसद डेरेल इस्सा ने भी उनकी 2024 की चुनावी जीत और वैश्विक प्रभाव को आधार बनाकर ट्रंप के नाम का समर्थन किया था।
24 जून 2025 को हुआ था ऐतिहासिक सीजफायर
लगातार 12 दिनों तक चले इजरायल-ईरान युद्ध के बाद, अमेरिका और कतर की मध्यस्थता से 24 जून 2025 को एक पूर्ण और अंतिम सीजफायर पर सहमति बनी। ट्रंप ने इस सफलता को लेकर कहा, "सभी को बधाई। इजरायल और ईरान लगभग एक साथ मेरे पास आए और शांति की गुहार लगाई। मुझे पता था कि अब समय आ गया है। दुनिया और पश्चिम एशिया असली विजेता हैं।"
पाकिस्तान ने भी ट्रंप को नोबेल के लिए किया नामित
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भी नॉर्वे की नोबेल कमेटी को पत्र भेजकर ट्रंप को भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के दौरान निर्णायक कूटनीतिक हस्तक्षेप के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की सिफारिश की है। हालांकि, भारत सरकार ने सीजफायर को ट्रंप की मध्यस्थता का परिणाम मानने से इनकार किया है। भारत का स्पष्ट रुख है कि पाकिस्तान के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन्स) ने पहल की थी और भारत ने कूटनीतिक मार्ग से सीजफायर पर सहमति दी।
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