
एक समय पर लड़ाई का खामियाजा भुगतने वाले अफगानिस्तान के कई गांवों में तालिबान की जीत ने हवाई हमलों और अंतिम संस्कार के एक चक्र को तोड़ दिया है.समाचार एजेंसी एएफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार की स्थापना और अमेरिकी सैनिकों की वापसी ने इस संभावना को बढ़ा दिया है कि देश के गांवों में लोगों की दिनचर्या अब पहले जैसी हो सकती है. काबुल पर तालिबान के कब्जे और अगस्त में अमेरिकी सैनिकों की वापसी ने दुनिया को हिला दिया और अफगानों की आजादी को प्रभावित किया. जिसका विशेष रूप से शहरी मध्यम वर्ग द्वारा आनंद लिया जा रहा था. हिंसा से मिली आजादी उत्तरी अफगानिस्तान के बल्ख से लगभग 30 किलोमीटर दूर दश्तन गांव की एक अमीर महिला माकी का कहना है कि वह तालिबान को सब कुछ दे देगी क्योंकि गोलियों की आवाज अब थम गई है. माकी अपना समय अपने गांव की कुछ अन्य महिलाओं के साथ कपास की कताई में बिताती है और यही उसकी आजीविका का स्रोत है. माकी जैसे कुछ ग्रामीण सोचते हैं कि युद्ध समाप्त हो गया है और लोग तालिबान से खुश हैं. माकी एएफपी से कहती हैं, "अब फायरिंग की कोई आवाज नहीं आती है. युद्ध खत्म हो गया है और हम तालिबान से खुश हैं" दश्तन के एक अन्य निवासी हाजीफत खान ने कहा कि गांव में महिलाएं और सभी पुरुष तालिबान समर्थक थे और सत्ता पर तालिबान के कब्जा करने से बहुत खुश थे. 82 वर्षीय हाजीफत का कहना है कि उनके देश में अब शांति है





