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जर्मनी में दक्षिणपंथी AfD की ऐतिहासिक जीत, एलिस वीडल क्यों चर्चा में..?

jantaserishta.com
9 Sept 2026 12:42 PM IST
जर्मनी में दक्षिणपंथी AfD की ऐतिहासिक जीत, एलिस वीडल क्यों चर्चा में..?
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नई दिल्ली: जर्मनी की राजनीति में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी यानी AfD की बढ़ती ताकत ने पूरे यूरोप का ध्यान खींचा है। सैक्सोनी-अनहाल्ट के सितंबर 2026 के चुनाव में पार्टी ने बड़ा प्रदर्शन किया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब जर्मनी के किसी राज्य में दक्षिणपंथी पार्टी इतनी मजबूत स्थिति में पहुंची है। लेकिन इस राजनीतिक कहानी के साथ पार्टी की प्रमुख नेता एलिस वीडल की निजी जिंदगी भी चर्चा में है।
AfD प्रवासियों और शरणार्थियों को लेकर सख्त रुख के लिए जानी जाती है। पार्टी समलैंगिक विवाह से जुड़े मुद्दों पर भी विरोध की स्थिति रखती है। वहीं, पार्टी की प्रमुख नेताओं में शामिल एलिस वीडल खुद लेस्बियन हैं और उनकी पार्टनर श्रीलंकाई मूल की हैं। यही विरोधाभास वीडल को जर्मनी की राजनीति में एक अलग तरह का चेहरा बनाता है।
नाजी अतीत से जुड़ा था परिवार
एलिस वीडल का जन्म 1979 में हुआ था। उनके परिवार का राजनीतिक इतिहास भी चर्चा में रहा है। उनके दादा हंस वीडल नाजी शासन के दौर में हिटलर की पार्टी से जुड़े थे और 1941 में उन्हें नाजी कब्जे वाले वारसॉ में सैन्य न्यायाधीश बनाया गया था।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वीडल परिवार पश्चिमी जर्मनी चला गया और वहां फर्नीचर का कारोबार शुरू किया। एलिस वीडल के मुताबिक, परिवार में उनके दादा की नाजी शासन के दौरान भूमिका को लेकर ज्यादा बातचीत नहीं होती थी।
पढ़ाई के बाद बैंकिंग और चीन में करियर
स्कूल के दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने अर्थशास्त्र और बिजनेस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में काम किया। कुछ समय उन्होंने अमेरिकी निवेश कंपनी Goldman Sachs में भी काम किया।
इसके बाद वह चीन चली गईं, जहां उन्होंने Bank of China में काम किया। करीब पांच साल चीन में रहने के दौरान उन्होंने मंदारिन भाषा सीखी और वहां की अर्थव्यवस्था को करीब से समझा। उन्होंने चीन की पेंशन व्यवस्था पर शोध किया और 2011 में इसी विषय पर डॉक्टरेट पूरी की।
पार्टनर के सुझाव से राजनीति में आईं
2007 में एलिस वीडल की मुलाकात सारा बोसार्ड से हुई। सारा फिल्ममेकर हैं और उनका जन्म श्रीलंका में हुआ था। बाद में उन्हें स्विट्जरलैंड के एक परिवार ने गोद ले लिया था। दोनों का रिश्ता आगे बढ़ा और वे लंबे समय से साथ हैं। वे स्विट्जरलैंड में अपने परिवार के साथ रहती हैं और अपने बच्चों की परवरिश करती हैं।
वीडल के मुताबिक राजनीति में सक्रिय होने का विचार उन्हें एक तरह से अपनी पार्टनर से मिला। एक मौके पर वीडल लगातार यूरोपीय राजनीति पर चर्चा कर रही थीं। उनकी बातें सुनकर सारा ने उनसे कहा कि अगर राजनीति पर इतनी बात करती हैं तो उन्हें खुद राजनीति में क्यों नहीं जाना चाहिए। वीडल ने इस बात को गंभीरता से लिया।
2013 में AfD से जुड़ीं
एलिस वीडल 2013 में नई-नई बनी AfD में शामिल हुईं। उस समय पार्टी का प्रमुख मुद्दा यूरो और यूरोजोन संकट था। पार्टी जर्मनी द्वारा आर्थिक संकट से जूझ रहे यूरोपीय देशों को मदद देने की नीति की आलोचना करती थी।
आर्थिक मामलों की समझ रखने वाली वीडल जल्द ही पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका में पहुंच गईं। मीडिया के सामने पार्टी की आर्थिक नीतियां रखने वाली प्रमुख नेताओं में उनका नाम शामिल होने लगा।
लेकिन 2015 के बाद AfD की राजनीति का फोकस तेजी से बदल गया। सीरिया और अन्य देशों के संघर्ष के चलते बड़ी संख्या में शरणार्थी यूरोप पहुंचे। जर्मनी में भी बड़ी संख्या में लोगों के आने के बाद प्रवासन और शरणार्थी नीति बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई। AfD ने इसे अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बना लिया और पार्टी का रुख प्रवासियों के खिलाफ और ज्यादा सख्त होता गया।
लेस्बियन पहचान और पार्टी की नीतियों में विरोधाभास
AfD की नीतियों और वीडल की निजी जिंदगी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसी विरोधाभास की वजह से होती है। वीडल खुद एक महिला के साथ रिश्ते में हैं, जबकि पार्टी समलैंगिक विवाह की कानूनी मान्यता का विरोध करती रही है।
वीडल का कहना है कि उनकी निजी पहचान और पार्टी की राजनीतिक स्थिति को अलग-अलग देखा जाना चाहिए। वह समलैंगिक विवाह की बजाय समलैंगिक जोड़ों के लिए कानूनी पार्टनरशिप के समर्थन की बात करती रही हैं।
उनका तर्क है कि जर्मनी में समलैंगिक लोगों की सुरक्षा और आव्रजन नीति के बीच भी संबंध है। वह सख्त इमिग्रेशन नीति को सुरक्षा के मुद्दे से जोड़कर देखती हैं।
AfD की बढ़ती ताकत और वीडल की चुनौती
2013 के चुनाव में AfD को करीब 4.7% वोट मिले थे। इसके बाद पार्टी का समर्थन लगातार बढ़ा। हाल के चुनावी आंकड़ों में सैक्सोनी-अनहाल्ट में पार्टी का प्रदर्शन करीब 44% वोट तक पहुंचने की बात सामने आई है।
हालांकि सबसे ज्यादा वोट हासिल करना और सरकार बनाना अलग-अलग बातें हैं। जर्मनी की प्रमुख पार्टियां अब तक AfD के साथ गठबंधन करने से दूरी बनाती रही हैं। ऐसे में पार्टी को सत्ता में पहुंचने के लिए दूसरे राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल करना चुनौती होगी।
अगर AfD का प्रभाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो एलिस वीडल का नाम जर्मनी के भविष्य के बड़े राजनीतिक चेहरों में शामिल रह सकता है। आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता उसे सत्ता तक पहुंचाती है या गठबंधन की राजनीति उसके रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती बनती है।
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