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नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास 'युद्ध अभ्यास 2026' के दौरान राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में दोनों देशों की सेनाओं ने संयुक्त फायरिंग प्रदर्शन किया। इस दौरान भारत और अमेरिका के आधुनिक आर्टिलरी, एविएशन, एयर डिफेंस और सर्विलांस सिस्टम को एक साथ अभ्यास में शामिल किया गया। संयुक्त प्रदर्शन ने कठिन युद्ध परिस्थितियों में दोनों सेनाओं की अलग-अलग क्षमताओं के बीच समन्वय पर जोर दिया।महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हुए प्रदर्शन को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और भारतीय सेना की 10 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल विक्रांत सुरेश देशपांडे ने देखा। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में भारतीय और अमेरिकी सैनिकों ने विभिन्न हथियार प्रणालियों और सैन्य प्लेटफॉर्म का संयुक्त संचालन प्रदर्शित किया।इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी एक-दूसरे के साथ प्रभावी तरीके से सैन्य अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत करना है। इसके साथ ही सैनिकों को आधुनिक हथियार प्रणालियों के इस्तेमाल और जटिल फील्ड परिस्थितियों में संयुक्त ऑपरेशन का अनुभव दिया जा रहा है।
पिनाका और धनुष ने दिखाई ताकत
भारतीय सेना की ओर से संयुक्त फायरिंग प्रदर्शन में पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर को शामिल किया गया। पिनाका भारतीय सेना की प्रमुख रॉकेट आर्टिलरी प्रणालियों में से एक है, जिसका इस्तेमाल लंबी दूरी पर स्थित लक्ष्यों के खिलाफ किया जाता है।इसके अलावा स्वदेशी धनुष आर्टिलरी सिस्टम ने भी अभ्यास में हिस्सा लिया। धनुष आधुनिक आर्टिलरी सिस्टम के रूप में भारतीय सेना की मारक क्षमता का हिस्सा है।अभ्यास में M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर भी शामिल किया गया। हल्के वजन के कारण M777 को जरूरत के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में तेजी से तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है।इन हथियार प्रणालियों को एक साथ अभ्यास में शामिल कर आर्टिलरी यूनिटों के बीच तालमेल और लक्ष्य के खिलाफ प्रभावी प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया गया।
आसमान में दिखी अपाचे की क्षमता
युद्ध अभ्यास 2026 में जमीनी हथियारों के साथ एविएशन प्लेटफॉर्म भी शामिल किए गए। AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर ने संयुक्त प्रदर्शन में हिस्सा लिया।अपाचे को आधुनिक अटैक हेलीकॉप्टर के रूप में टैंक और दूसरे जमीनी लक्ष्यों के खिलाफ अभियान के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें उन्नत सेंसर, हथियार और निगरानी क्षमताएं मौजूद हैं।संयुक्त अभ्यास में अपाचे की मौजूदगी ने यह दिखाया कि किसी अभियान में जमीनी आर्टिलरी और हवाई प्लेटफॉर्म के बीच किस तरह समन्वय स्थापित किया जा सकता है।युद्ध के बदलते स्वरूप में केवल किसी एक हथियार प्रणाली पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग सैन्य क्षमताओं का एकीकृत इस्तेमाल महत्वपूर्ण होता जा रहा है। इसी वजह से इस अभ्यास में आर्टिलरी के साथ एविएशन और एयर डिफेंस को भी जोड़ा गया।
L70 एयर डिफेंस गन भी अभ्यास में शामिल
भारतीय सेना ने L70 एयर डिफेंस गन को भी संयुक्त प्रदर्शन में शामिल किया। एयर डिफेंस सिस्टम का उद्देश्य सैनिकों और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करना होता है।ड्रोन और अन्य हवाई प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एयर डिफेंस की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। अभ्यास के दौरान अलग-अलग क्षमताओं को एक साथ लाकर ऐसे ही जटिल युद्धक्षेत्र की परिस्थितियों के लिए प्रशिक्षण पर जोर दिया गया।
स्वाति रडार से दुश्मन की फायरिंग का पता लगाने की क्षमता
युद्ध अभ्यास में भारतीय सेना के स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार को भी शामिल किया गया। यह रडार विरोधी पक्ष की आर्टिलरी फायरिंग का पता लगाने और उसकी संभावित स्थिति निर्धारित करने में सहायता करता है।आधुनिक युद्ध में केवल हथियार की मारक क्षमता ही नहीं, बल्कि लक्ष्य का तेजी से पता लगाना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में सर्विलांस और रडार सिस्टम आर्टिलरी यूनिटों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं।स्वाति जैसे सिस्टम को आर्टिलरी और अन्य हथियारों के साथ जोड़ने से लक्ष्य की पहचान से लेकर जवाबी कार्रवाई तक की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने का प्रशिक्षण मिलता है।
अमेरिकी सेना ने उतारा HIMARS
अमेरिकी सेना की ओर से अभ्यास में HIMARS यानी हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम को शामिल किया गया। यह एक मोबाइल रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम है, जिसे तेजी से तैनात कर विभिन्न प्रकार के लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।HIMARS की मौजूदगी ने अभ्यास में अमेरिकी सेना की रॉकेट आर्टिलरी क्षमता को भारतीय सेना की आर्टिलरी प्रणालियों के साथ संयुक्त प्रशिक्षण का अवसर दिया।इससे दोनों सेनाओं को एक-दूसरे की प्रक्रियाओं और संचालन के तरीकों को समझने में मदद मिलती है। संयुक्त सैन्य अभ्यासों में इस तरह के प्रशिक्षण का उद्देश्य वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर समन्वय स्थापित करना होता है।
M-LIDS से ड्रोन खतरों से निपटने का अभ्यास
अमेरिकी सेना ने M-LIDS प्रणाली को भी अभ्यास में शामिल किया। यह सिस्टम छोटे मानवरहित हवाई प्रणालियों यानी ड्रोन से पैदा होने वाले खतरों का मुकाबला करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।हाल के वर्षों में युद्धक्षेत्र में छोटे ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इनका उपयोग निगरानी से लेकर हमलों तक में किया जा सकता है। इसके चलते काउंटर-ड्रोन सिस्टम आधुनिक सैन्य तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।M-LIDS की मौजूदगी से अभ्यास में ड्रोन खतरों की पहचान और उनसे निपटने से संबंधित प्रशिक्षण को भी शामिल किया गया।
एक साथ दिखीं कई सैन्य क्षमताएं
युद्ध अभ्यास 2026 के संयुक्त फायरिंग प्रदर्शन की खासियत यह रही कि इसमें केवल आर्टिलरी सिस्टम का प्रदर्शन नहीं किया गया, बल्कि अलग-अलग सैन्य क्षमताओं को एक ही ऑपरेशनल माहौल में जोड़ा गया।पिनाका, M777 और धनुष जैसे आर्टिलरी सिस्टम के साथ AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर, L70 एयर डिफेंस गन और स्वाति रडार ने भारतीय पक्ष की अलग-अलग क्षमताओं को प्रदर्शित किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से HIMARS और M-LIDS जैसे सिस्टम अभ्यास का हिस्सा बने।इसके जरिए आर्टिलरी, एविएशन, एयर डिफेंस, सर्विलांस और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं के बीच तालमेल का अभ्यास किया गया।
भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग पर जोर
'युद्ध अभ्यास' भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच आयोजित होने वाला संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इसमें दोनों देशों के सैनिक अलग-अलग ऑपरेशनल परिस्थितियों में प्रशिक्षण लेते हैं और अपनी रणनीतियों, प्रक्रियाओं तथा तकनीकी अनुभवों को साझा करते हैं।महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित संयुक्त फायरिंग प्रदर्शन ने इसी सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाया। कठिन फील्ड परिस्थितियों में अलग-अलग हथियार प्रणालियों और सैनिक इकाइयों को एक साथ संचालित कर दोनों सेनाओं ने संयुक्त अभियान की तैयारियों का अभ्यास किया।अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और लेफ्टिनेंट जनरल विक्रांत सुरेश देशपांडे की मौजूदगी में हुए इस प्रदर्शन ने भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग में संयुक्त प्रशिक्षण और इंटरऑपरेबिलिटी की भूमिका को भी रेखांकित किया। आधुनिक युद्ध में तेजी से बदलती तकनीक और नए खतरों को देखते हुए इस तरह के अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की क्षमताओं और संचालन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर देते हैं।
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