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श्रीलंका हाई कमीशन में स्वास्थ्य जांच शिविर आयुष पर भी जोर

Ratna Netam
6 Oct 2026 6:26 PM IST
श्रीलंका हाई कमीशन में स्वास्थ्य जांच शिविर आयुष पर भी जोर
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नई दिल्ली। ज़किया अल मुईन फ़ाउंडेशन ने श्रीलंका हाई कमीशन में एक मुफ्त और व्यापक हेल्थ चेक-अप कैंप आयोजित किया, जिसमें हाई कमीशन के कर्मचारियों और समुदाय के लोगों के लिए एलोपैथिक स्क्रीनिंग, प्रिवेंटिव हेल्थ चेक और पारंपरिक भारतीय व श्रीलंकाई आयुष प्रणालियों से जुड़ी सेवाओं को एक साथ उपलब्ध कराने की कोशिश की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को समय रहते स्वास्थ्य जांच कराने और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक करने पर जोर देना था।
ज़किया अल मुईन फ़ाउंडेशन लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़ा हुआ है और संगठन के अनुसार वह 2018 से स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है। फाउंडेशन का लक्ष्य 2030 तक आयुष आधारित उपचार और स्वास्थ्य जागरूकता को अधिक लोगों तक पहुंचाना है। कैंप में आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।
फाउंडेशन की डायरेक्टर और संस्थापक ज़किया परवीन खान ने कहा कि गैर-संक्रामक और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। उनके अनुसार मरीजों को केवल बीमारी बढ़ने के बाद इलाज कराने के बजाय शुरुआती स्तर पर ही जांच, जीवनशैली में सुधार और उपयुक्त चिकित्सा सलाह पर ध्यान देना चाहिए।
खान ने कहा कि उनकी कोशिश है कि लोग पहले एलोपैथिक स्वास्थ्य जांच करवाएं और उसके बाद जरूरत के अनुसार आयुर्वेद या अन्य पारंपरिक पद्धतियों को अपनाएं। उन्होंने कहा, “मेरी कोशिश है कि लोग पहले एलोपैथिक चेक-अप करवाएं और उसके बाद आयुर्वेद अपनाएं।”
उन्होंने दावा किया कि फाउंडेशन ऐसी जांच और उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देना चाहता है, जिनमें जहां संभव हो गैर-इनवेसिव तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए। हालांकि बीमारी की सही पहचान और उपचार के लिए मान्यता प्राप्त चिकित्सा जांच और योग्य डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण होती है। बिना ब्लड टेस्ट या अन्य जरूरी जांच के सभी बीमारियों का निश्चित निदान या “पक्का इलाज” संभव होने का दावा स्थापित मेडिकल मानकों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
खान ने बच्चों, युवाओं और महिलाओं में बढ़ रही विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने पाचन संबंधी दिक्कतों, PCOD और अन्य जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि स्वास्थ्य सेवाओं का ध्यान केवल बीमारी के इलाज पर नहीं, बल्कि बीमारी को रोकने और शुरुआती चरण में उसकी पहचान पर भी होना चाहिए।
कैंप में एलोपैथिक स्क्रीनिंग और प्रिवेंटिव हेल्थ चेक की व्यवस्था की गई। ऐसे स्वास्थ्य शिविर आम तौर पर ब्लड प्रेशर, वजन, बॉडी मास इंडेक्स, ब्लड शुगर और अन्य बुनियादी स्वास्थ्य संकेतकों की जांच के जरिए लोगों को संभावित जोखिमों के बारे में शुरुआती जानकारी देने में मदद करते हैं। श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्रालय भी गैर-संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर देता रहा है।
कार्यक्रम में भारतीय आयुष परंपराओं के साथ श्रीलंका में प्रचलित पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को भी महत्व दिया गया। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था का विकल्प खड़ा करना नहीं, बल्कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति व्यापक समझ विकसित करना और सही समय पर जांच तथा उपचार के महत्व को बढ़ावा देना है।
फाउंडेशन ने यह भी कहा कि गैर-संक्रामक बीमारियां आज स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और कई जीवनशैली संबंधी समस्याएं लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी विकसित हो सकती हैं। ऐसे में नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कैंप के जरिए हाई कमीशन के कर्मचारियों और समुदाय के लोगों को एक ही स्थान पर अलग-अलग स्वास्थ्य पद्धतियों के बारे में जानकारी और परामर्श उपलब्ध कराया गया। आयोजकों ने इसे भारत और श्रीलंका के बीच स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े सहयोग की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल बताया।
भारत स्थित श्रीलंका हाई कमीशन दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ सांस्कृतिक और समुदाय आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है। हाई कमीशन ने हाल के वर्षों में भारत-श्रीलंका के बीच लोगों से लोगों के संपर्क और सहयोग से जुड़ी विभिन्न पहलों को समर्थन दिया है।
ज़किया परवीन खान ने कहा कि हेल्थ कैंप का मकसद लोगों को यह समझाना भी है कि बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
फाउंडेशन के मुताबिक आने वाले वर्षों में इसी तरह के जागरूकता और हेल्थ चेक-अप कार्यक्रमों का विस्तार करने की योजना है। संगठन आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने और आधुनिक मेडिकल जांच के साथ उनके समन्वित उपयोग पर काम करना चाहता है।
हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामान्य सलाह यही है कि किसी भी बीमारी का उपचार केवल प्रमाणित जांच और योग्य चिकित्सक की सलाह के आधार पर किया जाए। आयुर्वेद या दूसरी पारंपरिक पद्धतियों को अपनाने से पहले भी मरीजों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, खासकर तब जब उन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी हो या वे नियमित दवाएं ले रहे हों।
श्रीलंका हाई कमीशन में आयोजित इस कैंप ने प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, शुरुआती जांच और पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों को लेकर चर्चा को आगे बढ़ाने का काम किया। आयोजकों ने इसे लोगों को अपनी सेहत को लेकर अधिक जागरूक और जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक पहल बताया।
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