
बीजिंग। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल चीन के रोजगार बाजार के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। नई तकनीक जहां कंपनियों के काम को आसान और तेज बना रही है, वहीं दूसरी ओर कई क्षेत्रों में नौकरियों पर खतरे की चिंता भी बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन में AI आधारित सिस्टम और ऑटोमेशन के कारण कई पारंपरिक नौकरियों पर असर पड़ रहा है और बेरोजगारी का दबाव बढ़ता जा रहा है।
‘द गार्डियन’ में प्रकाशित पत्रकार एमी हॉकिन्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में AI के इस्तेमाल ने लेबर मार्केट की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। खासतौर पर परिवहन क्षेत्र में रोबोटैक्सी और ड्राइवरलेस तकनीक के आने से टैक्सी ड्राइवरों के रोजगार पर खतरा मंडराने लगा है।
रिपोर्ट में बताया गया कि वुहान शहर में ड्राइवरलेस कैब की शुरुआत के बाद कई टैक्सी ड्राइवरों को काम की कमी का सामना करना पड़ा। हालांकि, बाद में कुछ तकनीकी समस्याओं के चलते इन कैब को सड़कों से हटाना पड़ा। कुछ ड्राइवरों को इससे अस्थायी राहत मिली, क्योंकि ड्राइवरलेस कैब के संचालन में परेशानी आने के बाद पारंपरिक टैक्सी सेवाओं की मांग फिर बढ़ गई।
AI से बढ़ा बेरोजगारी का डर
चीन में हाल के वर्षों में AI तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। कंपनियां ग्राहक सेवा, डेटा प्रोसेसिंग, कंटेंट निर्माण और अन्य कामों के लिए AI आधारित सिस्टम अपना रही हैं। इससे व्हाइट कॉलर नौकरियों यानी ऑफिस से जुड़े कामों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, AI द्वारा कर्मचारियों की जगह लेने की घटनाओं ने लोगों के बीच रोजगार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई कर्मचारियों को डर है कि आने वाले समय में कंपनियां लागत कम करने के लिए इंसानों की जगह मशीनों और AI सिस्टम का अधिक इस्तेमाल कर सकती हैं।
लेबर मार्केट पर बढ़ता दबाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का रोजगार बाजार पहले से ही दबाव में है। जुलाई में शंघाई में आयोजित वर्ल्ड AI कॉन्फ्रेंस में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने AI को साझा विकास और सामूहिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया था। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि AI से मिलने वाले फायदे तभी व्यापक होंगे जब रोजगार पर पड़ने वाले प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाए।
चीन में बेरोजगारी का स्तर लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग अब पारंपरिक नौकरियों के बजाय गिग इकोनॉमी यानी अस्थायी और लचीले रोजगार की ओर बढ़ रहे हैं।
एक थिंक टैंक के अनुमान के अनुसार, चीन में फ्लेक्सिबल रोजगार से जुड़े लोगों की संख्या इस साल करीब 32 करोड़ तक पहुंच सकती है, जबकि 2019 में यह आंकड़ा लगभग 16 करोड़ था। यह संख्या चीन की कुल कार्यबल आबादी का करीब 44 प्रतिशत बताई जा रही है।
रोबोटैक्सी से ड्राइवरों की चिंता बढ़ी
चीन में रियल एस्टेट और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मंदी के कारण कई लोग अपनी आजीविका के लिए राइड-हेलिंग सेवाओं पर निर्भर हो गए हैं। लेकिन अब AI आधारित रोबोटैक्सी सेवाओं के विस्तार ने इन लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
रोबोटैक्सी को चीन में AI के सबसे चर्चित उपयोगों में से एक माना जा रहा है। कई शहरों में इसका परीक्षण और संचालन शुरू हो चुका है। इससे आने वाले समय में ड्राइवरों की मांग कम होने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि AI पूरी तरह से नौकरियां खत्म करने के बजाय रोजगार के स्वरूप को बदल सकता है। नई तकनीक के साथ नए कौशल सीखने और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की जरूरत होगी।
चीन के सामने चुनौती यह है कि वह AI विकास को बढ़ावा देते हुए रोजगार के अवसरों को भी सुरक्षित रखे। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि देश AI क्रांति और रोजगार सुरक्षा के बीच किस तरह संतुलन बनाता है।





