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बढ़ते हिंसा को देखते हुए...अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मौजूदगी की अवधि बढ़ा सकते हैं बाइडन

Neha
8 April 2021 9:51 AM GMT
बढ़ते हिंसा को देखते हुए...अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मौजूदगी की अवधि बढ़ा सकते हैं बाइडन
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चुंबक बम के जरिए लगभग हर रोज किसी न किसी गाड़ी को बम से उड़ा दिया जाता है.

अफगानिस्तान में हिंसा कम होने का नाम ही नहीं ले रही है. तालिबान (Taliban) के साथ शांति समझौता भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है और उसका वर्चस्व दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है. इस बीच अफगानिस्तान (Afghanistan) से अमेरिकी सेना (US Army) को वापस बुलाने की एक मई की समय सीमा भी पास आ रही है. मगर ऐसा लग रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (US President Joe Biden) इसके लिए तैयार नहीं हैं.

माना जा रहा है कि बाइडेन अफगान सेना को समर्थन जारी रख सकते हैं. ऐसे में 2500 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने पर रोक लग सकती है. अफगानिस्तान इस समय तालिबान के बढ़ते खतरे से जूझ रहा है. यहां लगभग हर रोज आतंकी हमले हो रहे हैं और लोगों की जान जा रही है. बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति सैनिकों को वापस बुलाने को लेकर किसी भी फैसले पर नहीं पहुंचे हैं. ऐसे में अगले तीन हफ्तों में सभी सैनिकों और उनके उपकरणों को अफगानिस्तान से हटाना मुश्किल होगा.

बाइडेन ने खुद किया स्पष्ट
जो बाइडेन ने खुद इस संबंध में स्पष्ट किया है कि सैनिकों को बुलाना मुश्किल होगा. उन्होंने कहा, 'एक मई की समय-सीमा को पूरा करना मुश्किल होने जा रहा है. सामरिक कारणों से सैनिकों को वापस बुलाना मुश्किल है. अगर हम छोड़कर जाते हैं तो हमें सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से ऐसा करना होगा.' 2009 से 2013 तक नाटो के शीर्ष कमांडर रहे पूर्व नौसेना एडमिरल जेम्स स्टेविडिस ने कहा कि इस मौके पर सैनिकों को जल्दी वापस बुलाना नासमझी होगी.

छह महीने का विस्तार संभव
पूर्व नौसेना एडमिरल जेम्स स्टेविडिस ने बुधवार को ईमेल के जरिए कहा, 'कई बार कोई फैसला न लेना भी फैसला बन जाता है, जो एक मई की समय-सीमा के मामले में सच लगता है.' उन्होंने कहा कि अब ऐसा लगता है कि छह महीने का विस्तार किया जा सकता है और तालिबान को अपने वादे पूरे करने के लिए राजी करने की कोशिश की जा सकती है जो अफगानिस्तान से सैनिकों को वापस बुलाने की अहम शर्त है. अफगानिस्तान में तालिबानी और आईएस के आतंकी आए दिन हमला कर रहे हैं. टारगेट किलिंग के जरिए नेता, पुलिसकर्मी, सैनिक और मीडियाकर्मियों को निशाना बनाया जा रहा है. चुंबक बम के जरिए लगभग हर रोज किसी न किसी गाड़ी को बम से उड़ा दिया जाता है.


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