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बालेन शाह के खिलाफ Gen-Z की नाराजगी, सड़कों पर दिखा गुस्सा

Ashish verma
12 July 2026 9:51 PM IST
बालेन शाह के खिलाफ Gen-Z की नाराजगी, सड़कों पर दिखा गुस्सा
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काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। जिस Gen-Z युवा वर्ग के समर्थन से बालेन शाह सत्ता के केंद्र तक पहुंचे थे, अब वही युवा उनकी सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। सरकार के एक फैसले ने युवाओं और आम लोगों में नाराजगी बढ़ा दी है, जिससे काठमांडू में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

दरअसल, नेपाल सरकार की ओर से गरीबों, झुग्गीवासियों और भूमिहीन लोगों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लोगों को उनके घरों से बेदखल किया जा रहा है, लेकिन उनके पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। इसी मुद्दे को लेकर राजधानी में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास और शहर को व्यवस्थित करने के नाम पर गरीब और कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि सरकार को पहले प्रभावित लोगों के लिए रहने की वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी, उसके बाद ही ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए।

काठमांडू की सड़कों पर उतरे लोगों ने सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की और इसे जनविरोधी कदम बताया। युवाओं का कहना है कि जिस बदलाव की उम्मीद के साथ उन्होंने बालेन शाह का समर्थन किया था, अब वही सरकार आम लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है।

बालेन शाह ने युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाई थी। वह काठमांडू के मेयर रहते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख और बदलाव की राजनीति के कारण लोकप्रिय हुए थे। बाद में युवाओं के बड़े समर्थन ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत स्थान दिलाया।

हालांकि, अब उनकी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही युवा वर्ग बनता नजर आ रहा है। Gen-Z का एक हिस्सा सरकार से पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और आम लोगों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल में युवाओं की राजनीति तेजी से प्रभावी हो रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवा अपनी आवाज को मजबूती से उठा रहे हैं। ऐसे में सरकार के फैसलों पर तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

विरोध प्रदर्शन के पीछे केवल बेदखली का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सरकार की नीतियों और जनता की अपेक्षाओं के बीच बढ़ती दूरी को भी दिखाता है। आम लोगों का कहना है कि शहरों के विकास के साथ गरीबों और कमजोर वर्गों के अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

फिलहाल काठमांडू में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अगर इस मुद्दे का जल्द समाधान नहीं निकला तो विरोध प्रदर्शन बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

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