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गैस सप्लाई ठप और LPG महंगी, रावलपिंडी में पुराने दौर में लौटे परिवार

Ratna Netam
1 Nov 2026 6:27 PM IST
गैस सप्लाई ठप और LPG महंगी, रावलपिंडी में पुराने दौर में लौटे परिवार
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रावलपिंडी। पाकिस्तान में गैस की किल्लत और महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही रावलपिंडी में घरेलू गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को खाना पकाने के लिए एक बार फिर पारंपरिक ईंधन यानी लकड़ी और कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है। पाइपलाइन से मिलने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सीमित होने और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण लोगों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की 1 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, रावलपिंडी में कई इलाकों में गैस की उपलब्धता प्रतिदिन केवल छह घंटे तक सीमित रह गई है। यानी लोगों को लगभग 18 से 20 घंटे तक गैस की कमी या आपूर्ति बंद रहने का सामना करना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके पास महंगे गैस सिलेंडर खरीदने का विकल्प नहीं है।
18 से 20 घंटे तक गैस की किल्लत
रिपोर्ट के अनुसार, रावलपिंडी में सुई गैस की आपूर्ति दिन में तीन बार की जा रही है। प्रत्येक बार लगभग दो घंटे तक गैस उपलब्ध रहती है। इसके अलावा रात 9 बजे से सुबह सहरी तक गैस की आपूर्ति बाधित रहना आम बात हो गई है।इस स्थिति ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। सुबह नाश्ता तैयार करने, दोपहर का भोजन बनाने और रात का खाना पकाने के लिए परिवारों को गैस आने के समय का इंतजार करना पड़ता है। कई बार कम दबाव के कारण गैस चूल्हे तक ठीक से नहीं पहुंचती। ऐसे में लोगों के लिए निर्धारित समय में भोजन तैयार करना भी मुश्किल हो जाता है।गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण कई परिवारों ने लकड़ी और कोयले से खाना बनाना शुरू कर दिया है। छोटे होटल, सड़क किनारे भोजन बेचने वाले दुकानदार और तंदूर संचालक भी गैस की जगह पारंपरिक ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
LPG सिलेंडर की कीमतों ने बिगाड़ा बजट
प्राकृतिक गैस की कमी के बीच लोगों के पास दूसरा विकल्प LPG सिलेंडर खरीदना है, लेकिन इसकी कीमतें भी आम परिवारों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। रावलपिंडी में घरेलू गैस सिलेंडर की रिफिलिंग का खर्च 3,000 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर लगभग 5,000 रुपये तक पहुंच गया है।वहीं, नया खाली घरेलू गैस सिलेंडर, जिसकी कीमत पहले करीब 10,000 रुपये थी, अब 13,500 रुपये तक बिक रहा है। पुराने इस्तेमाल किए गए सिलेंडरों की कीमत भी 8,000 से 10,000 रुपये के बीच बताई जा रही है।व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की स्थिति और भी खराब है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन सिलेंडरों की रिफिलिंग एक साल पहले 12,500 से 14,000 रुपये के बीच होती थी, उनकी कीमत अब बढ़कर करीब 25,000 रुपये तक पहुंच गई है। इससे छोटे कारोबारियों के लिए अपना व्यवसाय चलाना मुश्किल हो रहा है।
लकड़ी और कोयले की मांग में तेजी
गैस संकट के कारण रावलपिंडी में जलाऊ लकड़ी और कोयले की मांग तेजी से बढ़ी है। सर्दियों के मौसम में मांग बढ़ने के साथ इनके दाम भी ऊपर चले गए हैं।स्थानीय बाजार में कम धुआं देने वाला और अच्छी आंच पैदा करने वाला कोयला लगभग 1,000 पाकिस्तानी रुपये प्रति मन बिक रहा है। वहीं, कम गर्मी और अधिक धुआं देने वाले कोयले की कीमत करीब 800 रुपये प्रति मन बताई गई है।सूखी जलाऊ लकड़ी की कीमत 1,500 से 1,800 रुपये प्रति मन तक पहुंच गई है, जबकि सामान्य लकड़ी 1,300 से 1,400 रुपये प्रति मन के बीच बिक रही है। लकड़ी के बुरादे यानी सॉडस्ट की कीमत भी बढ़कर 700 रुपये प्रति मन हो गई है।इससे साफ है कि गैस की कमी के कारण जिन परिवारों ने लकड़ी और कोयले का विकल्प अपनाया है, उन्हें भी महंगाई से राहत नहीं मिल रही है।
फर्नीचर बाजारों से लकड़ी का कचरा भी खरीद रहे लोग
गैस और लकड़ी की बढ़ती कीमतों के बीच रावलपिंडी में लोग सस्ते ईंधन की तलाश में फर्नीचर बाजारों और लकड़ी की फैक्ट्रियों तक पहुंच रहे हैं। कई परिवार फर्नीचर बनाने के दौरान निकलने वाले लकड़ी के छोटे टुकड़ों और बुरादे को इकट्ठा कर खाना पकाने में इस्तेमाल कर रहे हैं।एक फर्नीचर फैक्ट्री के मालिक मुहम्मद फैजान ने बताया कि पहले लकड़ी के बचे हुए टुकड़ों और बुरादे को नाले के पास फेंक दिया जाता था। अब शाम होते ही लोग फैक्ट्री पहुंचकर परिसर की सफाई करते हैं और वहां से लकड़ी के टुकड़े अपने साथ ले जाते हैं। यह बदलाव बताता है कि ईंधन की कमी ने आम लोगों को किस तरह पुराने विकल्पों की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया है।
सरकारी कर्मचारियों और मध्यम वर्ग पर भी असर
गैस संकट का असर केवल गरीब परिवारों तक सीमित नहीं है। सरकारी कर्मचारियों और मध्यम वर्ग के लोगों को भी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऑल पाकिस्तान क्लर्क्स एसोसिएशन के डिवीजनल अध्यक्ष शहजाद मंजूर कियानी के मुताबिक, महंगाई ने लोगों को फिर से लकड़ी और कोयले के दौर में पहुंचा दिया है।उन्होंने बताया कि निचले दर्जे के सरकारी कर्मचारियों को गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण हर महीने 10,000 से 12,000 रुपये तक LPG पर खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में कई परिवारों ने खर्च कम करने के लिए जलाऊ लकड़ी का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों बशारत इकबाल राजा और शफीक भलवालिया ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई। उनका कहना है कि कुछ परिवार दिन में चाय बनाने और जरूरी कामों के लिए गैस सिलेंडर रखते हैं, जबकि शाम का भोजन लकड़ी पर तैयार करते हैं।
वनों से लकड़ी चोरी बढ़ने की आशंका
जलाऊ लकड़ी की मांग बढ़ने का असर पर्यावरण पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती मांग के कारण सरकारी और निजी जंगलों से पेड़ों की लकड़ी चोरी होने की घटनाओं में भी वृद्धि की खबरें सामने आई हैं। सर्दियों में ईंधन की जरूरत बढ़ने से यह समस्या और गंभीर हो सकती है।दूसरी तरफ, छोटे होटल, बेकरी, तंदूर और सड़क किनारे भोजन बेचने वाले कारोबारियों को भी महंगे व्यावसायिक सिलेंडरों के कारण अपना खर्च बढ़ाना पड़ रहा है। कई दुकानदार अब लकड़ी और कोयले पर निर्भर हो रहे हैं।
पाकिस्तान का ऊर्जा संकट बना बड़ी चुनौती
पाकिस्तान में गैस संकट के पीछे घरेलू उत्पादन में गिरावट, आयात पर निर्भरता, ऊर्जा क्षेत्र का कर्ज और आपूर्ति संबंधी समस्याएं प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन में पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है। इसके अलावा गैस क्षेत्र का भारी वित्तीय बकाया आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है।सर्दियों में गैस की मांग बढ़ने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में रावलपिंडी की तस्वीर पाकिस्तान के ऊर्जा संकट का एक उदाहरण बनकर सामने आई है, जहां आधुनिक गैस कनेक्शन होने के बावजूद परिवारों को खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है।फिलहाल आम लोगों को गैस की नियमित आपूर्ति और LPG की कीमतों में राहत का इंतजार है। यदि आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में परिवारों और छोटे कारोबारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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