विश्व
ड्रोन हमले से लेकर ट्रेनिंग तक NIA ने खोली विदेशी नेटवर्क की परतें
Ratna Netam
4 Sept 2026 4:24 PM IST

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म्यांमार : एक यात्री विमान पर हुए ड्रोन हमले की जांच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली की एक अदालत में दावा किया है कि कुछ अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों का संबंध म्यांमार में हुए एक सिविलियन विमान पर ड्रोन हमले से हो सकता है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि इस मामले में गिरफ्तार विदेशी नागरिकों से पूछताछ जरूरी है, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
NIA के मुताबिक, जांच के दौरान ऐसे इनपुट मिले हैं जिनमें कुछ यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक की भूमिका की जांच की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि ये लोग ड्रोन तकनीक, ड्रोन ऑपरेशन, असेंबली और जैमिंग सिस्टम से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ये आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और मामले की अंतिम सच्चाई आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगी।
क्या है म्यांमार विमान ड्रोन हमला मामला?
NIA के अनुसार, 20 फरवरी 2026 को म्यांमार नेशनल एयरलाइंस के एक ATR-72-600 विमान को म्यांमार के माइतकिना एयरपोर्ट पर ड्रोन से निशाना बनाया गया था। उस समय विमान मंडाले जाने की तैयारी में था और उसमें यात्री सवार हो रहे थे।
जांच एजेंसी का कहना है कि विमान पर FPV कामिकेज ड्रोन से हमला किया गया। हमले में विमान के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा था। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रोन हमले के पीछे मौजूद नेटवर्क की जांच शुरू की।
NIA ने कोर्ट में क्या दावा किया?
NIA ने अदालत में बताया कि केंद्र सरकार को ऐसी जानकारी मिली थी जिसमें कुछ अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों के म्यांमार विमान ड्रोन हमले से जुड़े होने की आशंका जताई गई थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग समय पर टूरिस्ट वीजा के जरिए भारत आए थे। इसके बाद वे गुवाहाटी पहुंचे और कथित तौर पर मिजोरम के रास्ते म्यांमार में प्रवेश किया। NIA का आरोप है कि उनके पास आवश्यक परमिट नहीं थे।
ड्रोन वॉरफेयर ट्रेनिंग का आरोप
NIA का दावा है कि म्यांमार पहुंचने के बाद इन लोगों ने वहां मौजूद कुछ सशस्त्र समूहों को ड्रोन तकनीक की ट्रेनिंग दी। इसमें ड्रोन उड़ाने, ड्रोन असेंबल करने और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी तकनीक शामिल होने की बात कही गई है।
एजेंसी का कहना है कि म्यांमार के कुछ जातीय हथियारबंद समूह सैन्य शासन के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं और इस पूरे मामले में उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
कौन हैं आरोपी?
NIA के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार विदेशी नागरिकों में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और कई यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। ये लोग फिलहाल भारत में हिरासत में हैं।
NIA ने अदालत से इनसे पूछताछ की अनुमति मांगी थी। अदालत ने जांच एजेंसी को पूछताछ की अनुमति दे दी है। एजेंसी का कहना है कि आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डेटा, फोटो, वीडियो और अन्य सामग्री की जांच की जा रही है।
मोबाइल और डिजिटल सबूतों की जांच
NIA ने अदालत को बताया कि आरोपियों से जुड़े डिजिटल उपकरणों की जांच में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। एजेंसी के मुताबिक, जब्त किए गए मोबाइल, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच अभी जारी है।
जांच एजेंसी इन सबूतों को आरोपियों के बयानों और अन्य गवाहों से मिलाकर पूरे मामले की कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है।
भारत तक कैसे पहुंचा मामला?
जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला केवल म्यांमार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक हिस्सा भारत से भी जुड़ता है। NIA यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विदेशी नागरिक भारत कैसे पहुंचे, मिजोरम तक कैसे गए और म्यांमार में किन संगठनों के संपर्क में आए।
इसके अलावा एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या ड्रोन और अन्य उपकरणों की सप्लाई के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था।
बढ़ता ड्रोन खतरा
पिछले कुछ वर्षों में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। छोटे आकार के ड्रोन अब निगरानी के साथ-साथ हमलों के लिए भी इस्तेमाल किए जाने लगे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ड्रोन आधारित हमलों को रोकने के लिए नई तकनीक और मजबूत निगरानी व्यवस्था जरूरी है।
आगे क्या होगा?
NIA अब इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ड्रोन हमले की योजना कैसे बनी, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इसके भारत से कोई और कनेक्शन हैं।
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