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क्रिप्टो काउंसिल से आतंकवाद वित्त पोषण तक, पाकिस्तान का डिजिटल बदलाव

SHIDDHANT
30 Aug 2025 9:26 PM IST
क्रिप्टो काउंसिल से आतंकवाद वित्त पोषण तक, पाकिस्तान का डिजिटल बदलाव
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JAMMU जम्मू-कश्मीर: पुलिस की राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने पिछले महीने एक विशेष अभियान में आतंकवादी वित्त पोषण के नए तरीकों का बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी ने आतंकवाद को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंडिंग के साक्ष्य जुटाए हैं। यह संभवतः भारत में पहली बार है जब आतंकवादी गतिविधियों में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। एसआईए की छापेमारी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अहम दस्तावेज बरामद किए गए। जांच में यह भी उजागर हुआ कि एक गुप्त नेटवर्क के जरिए सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से वित्तीय मदद दी जा रही थी। एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा और भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए एक निर्णायक कदम है। अब तक पाकिस्तान से भारत में आतंकवाद को फंडिंग आमतौर पर हवाला, नकली मुद्रा, नशीली दवाओं की तस्करी और हथियारों की तस्करी जैसे पारंपरिक तरीकों से होती थी। मगर अब क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल से यह ट्रेल पूरी तरह छिपा हुआ है। यह बदलाव 2019 में हिजबुल्लाह और हमास द्वारा क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंड जुटाने की शुरुआत से जुड़ा माना जा रहा है। उस समय अमेरिका ने हमास से जुड़े करीब 200 वेबसाइट और 150 क्रिप्टो अकाउंट जब्त किए थे।

एसआईए की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में क्रिप्टोकरेंसी को तेज़ी से अपनाया है। मार्च 2025 में पाकिस्तान ने पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल बनाई और एक कनाडाई-चीनी व्यवसायी को सलाहकार नियुक्त किया। इसके अलावा, वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल नामक अमेरिकी क्रिप्टो कंपनी के साथ समझौता किया गया, जिसका संबंध डोनाल्ड ट्रम्प के परिवार से बताया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान ने बाहरी तौर पर इसे निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत करने का कदम बताया, लेकिन असल में इसका इस्तेमाल आतंकवादी वित्त पोषण की नई और सुरक्षित विधि के रूप में किया गया। क्रिप्टोकरेंसी के जरिए न तो आसानी से ट्रांजेक्शन ट्रैक हो पाता है और न ही इसका स्रोत सामने आता है।

भारत के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति है क्योंकि पहले जिन पारंपरिक तरीकों से फंडिंग के नेटवर्क को पकड़ा जाता था, वे अब अप्रभावी हो गए हैं। एजेंसियों के पास अभी पर्याप्त तकनीकी संसाधन नहीं हैं जिससे वे इस नई फंडिंग प्रणाली पर तुरंत नियंत्रण पा सकें। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसमें समय लगेगा और इस दौरान आतंकी समूहों को गुप्त रूप से फंडिंग का फायदा मिलेगा। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम का दुरुपयोग आतंकवादी संगठनों द्वारा किया जा सकता है। अब जम्मू-कश्मीर में क्रिप्टोकरेंसी का खुलासा उसी खतरे की पुष्टि करता है। यह मामला इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान आतंकवाद को फंड करने के पुराने तरीकों से हटकर तकनीकी और छिपे हुए नए विकल्पों की ओर बढ़ चुका है। भारत के लिए यह नई चुनौती है, क्योंकि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में फंडिंग रोकना हमेशा से सबसे महत्वपूर्ण कारक रहा है।

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