
France फ्रांस : अपनी पारंपरिक फ्रैंकोफोन साझेदारियों से आगे बढ़ते हुए अफ्रीका के साथ अपने राजनयिक और आर्थिक संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित ‘अफ्रीका फॉरवर्ड समिट’ में फ्रांस ने रिन्यूएबल एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि, समुद्री उद्योग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 27 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की।
यह समिट केन्याई राष्ट्रपति के साथ मिलकर आयोजित किया गया, जिसे फ्रांस की अफ्रीका नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। यह पहली बार है जब फ्रांस ने किसी अंग्रेजी भाषी अफ्रीकी देश में अफ्रीका-केंद्रित इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया है। इसे पश्चिम और मध्य अफ्रीका में अपने पुराने उपनिवेशों पर लंबे समय से रही निर्भरता से बाहर निकलने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
नैरोबी में अफ्रीकी नेताओं और बिजनेस जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि अफ्रीका अपनी युवा आबादी और तेजी से बढ़ती आर्थिक संभावनाओं के कारण दुनिया के सबसे संभावनाशील क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने कहा कि निवेश आधारित साझेदारी से अफ्रीकी देशों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलनी चाहिए और साथ ही फ्रांस में भी अफ्रीकी व्यवसायों के लिए नए अवसर खुलने चाहिए।
घोषित निवेश का उद्देश्य अफ्रीका में बुनियादी ढांचे, तकनीकी विकास और हरित ऊर्जा परियोजनाओं को गति देना बताया गया है। फ्रांस का यह कदम ऐसे समय में आया है जब कई यूरोपीय देश अफ्रीका के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को पुनर्गठित करने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल अफ्रीका में चीन और अन्य वैश्विक शक्तियों की बढ़ती मौजूदगी के बीच फ्रांस की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास भी है। साथ ही यह साझेदारी दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई दिशा दे सकती है।
कुल मिलाकर, नैरोबी समिट में फ्रांस की यह बड़ी घोषणा अफ्रीका के साथ उसके संबंधों में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है, जिसमें सहयोग, निवेश और साझेदारी पर अधिक जोर दिया गया है।





