Heatwave,के बीच अमेरिका पर भड़का फ्रांस, सोशल मीडिया पर तेज बहस

America अमेरिका : क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वॉर्मिंग को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। इस बार विवाद की शुरुआत भीषण गर्मी और एयर कंडीशनिंग (AC) को लेकर हुई बहस से हुई है, जिसने सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है।फ्रांस इन दिनों भीषण हीटवेव की चपेट में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ ही हफ्तों में देश में 1,300 से अधिक लोगों की मौत गर्मी से जुड़ी परिस्थितियों में हो चुकी है। तापमान कई इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
इस बीच पेरिस शहर की डिप्टी मेयर Audrey Pulvar ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मौजूदा जलवायु संकट और बढ़ती गर्मी के पीछे अमेरिका की नीतियों और जीवनशैली का भी बड़ा योगदान है। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिकियों के एयर कंडीशनिंग उपयोग पर सवाल उठाते हुए इसे पर्यावरण संकट से जोड़ दिया।ऑड्रे पुलवर ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया में प्रति व्यक्ति सबसे अधिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करने वाले देशों में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि दशकों से अमेरिका के उपभोग पैटर्न और ऊर्जा उपयोग ने पर्यावरण पर भारी दबाव डाला है, जिसका असर अब यूरोप जैसे देशों में भी दिखाई दे रहा है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर कुछ अमेरिकी यूजर्स ने फ्रांस में 43 डिग्री सेल्सियस की गर्मी और वहां हर जगह AC न होने को लेकर तंज कसा। इसके जवाब में पुलवर ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि आलोचना करने से पहले देशों को अपनी भूमिका पर भी ध्यान देना चाहिए।उन्होंने अपने बयान में लिखा, “प्रिय अमेरिकी पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, आप लोग कई दिनों से पेरिस का मजाक उड़ा रहे हैं क्योंकि हमारे यहां हर कमरे में एसी नहीं है। यह बहुत अजीब है। आपके शहर, जहां लगभग 90 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनिंग है, वह भी इस स्थिति से अलग नहीं हैं। इसलिए कृपया हमें ज्ञान देना बंद करें और अपनी जिम्मेदारी समझें।”
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई है। एक पक्ष इसे पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़कर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बता रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक जलवायु नीति, ऊर्जा उपयोग और विकसित देशों की जिम्मेदारी जैसे बड़े मुद्दों को फिर से चर्चा में ला रहा है।फिलहाल दोनों महाद्वीपों के बीच यह जुबानी जंग थमती नहीं दिख रही है और आने वाले दिनों में इस पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।





