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NGO फंड मामले में पूर्व प्रथम महिला शिरंथी राजपक्षे गिरफ्तार

Kavita2
7 Oct 2026 3:03 PM IST
NGO फंड मामले में पूर्व प्रथम महिला शिरंथी राजपक्षे गिरफ्तार
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कोलंबो। श्रीलंका की पूर्व प्रथम महिला और पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की पत्नी शिरंथी राजपक्षे को बुधवार, 7 अक्टूबर को कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। रिश्वत या भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाले आयोग यानी CIABOC के अधिकारियों ने उन्हें कोलंबो के किरुलापोने स्थित आवास से हिरासत में लिया। गिरफ्तारी से पहले अधिकारियों ने उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ की।

यह कार्रवाई शिरंथी राजपक्षे से जुड़े ‘सिरिलिया सविया’ संगठन के वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों की जांच के सिलसिले में की गई है। जांच एजेंसियां इस संगठन के खाते में हुए लेनदेन और धन के कथित दुरुपयोग की पड़ताल कर रही हैं। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार मामला सरकारी बैंक से प्राप्त धन और उसके इस्तेमाल से भी जुड़ा बताया जा रहा है।

शिरंथी राजपक्षे को गिरफ्तार करने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक आयोग के कार्यालय ले जाया गया। वहां मामले से जुड़े दस्तावेजों और उनके बयान के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

73 वर्षीय शिरंथी हाल ही में विदेश से श्रीलंका लौटी थीं। वह चिकित्सा उपचार के लिए सितंबर में सिंगापुर गई थीं और 5 अक्टूबर को देश लौटीं। उनके विदेश जाने और वापस लौटने के बीच जांच एजेंसियों ने उन्हें वित्तीय मामले में बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया था।

इस बीच शिरंथी राजपक्षे के वकीलों ने उनकी संभावित गिरफ्तारी को देखते हुए अग्रिम जमानत की अर्जी भी दाखिल की थी। यह याचिका मालिगाकांडा मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश की गई थी। इसमें अदालत से अनुरोध किया गया था कि यदि जांच एजेंसियां उन्हें गिरफ्तार करती हैं तो उन्हें जमानत दी जाए।

फाइनेंशियल क्राइम्स इन्वेस्टिगेशन डिवीजन यानी FCID ने भी शिरंथी राजपक्षे को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया था। पुलिस के अनुसार उन्हें 13 अक्टूबर को उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया था। हालांकि इससे पहले ही 7 अक्टूबर को भ्रष्टाचार निरोधक आयोग ने अलग जांच के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

शिरंथी राजपक्षे से जुड़ा सिरिलिया सविया संगठन लंबे समय से जांच के दायरे में है। यह संगठन उनके नेतृत्व में संचालित रहा है और इसके वित्तीय लेनदेन को लेकर अधिकारियों ने रिकॉर्ड जुटाए हैं। जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि संगठन के खाते में आई रकम कहां से आई और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

भ्रष्टाचार निरोधक आयोग के अनुसार मामला कथित रूप से सरकारी बैंक से प्राप्त धन और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है। आयोग ने सार्वजनिक संपत्ति कानून और भ्रष्टाचार से संबंधित प्रावधानों के तहत संभावित उल्लंघनों की जांच की बात कही है। हालांकि आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अंतिम दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

शिरंथी राजपक्षे की गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह श्रीलंका के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक से आती हैं। उनके पति महिंदा राजपक्षे लंबे समय तक देश के राष्ट्रपति रहे हैं और राजपक्षे परिवार दशकों से श्रीलंका की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा है।

इस कार्रवाई के बाद श्रीलंका की राजनीति में भी हलचल बढ़ने की संभावना है। राजपक्षे परिवार से जुड़े विभिन्न मामलों की जांच पहले से चलती रही है और अब शिरंथी की गिरफ्तारी ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर ध्यान खींचा है।

गिरफ्तारी से पहले CIABOC अधिकारियों ने उनके घर पहुंचकर बयान दर्ज किया। करीब दो घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और आयोग के कार्यालय ले जाया गया। यह प्रक्रिया बुधवार सुबह पूरी की गई।

पुलिस और भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां अब सिरिलिया सविया से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, लेनदेन और वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संगठन की वित्तीय गतिविधियों में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।

इस दौरान शिरंथी राजपक्षे की ओर से कानूनी बचाव की तैयारी भी की जा रही है। उनके वकीलों द्वारा अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल करना इस बात का संकेत था कि गिरफ्तारी की आशंका पहले से जताई जा रही थी।

शिरंथी के विदेश जाने को लेकर भी पिछले दिनों चर्चा हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार वह स्वास्थ्य संबंधी इलाज के लिए सिंगापुर गई थीं। इससे पहले उन्हें कोलंबो के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में वह विमान से सिंगापुर रवाना हुईं।

जांच एजेंसियों ने उनके विदेश रहने के दौरान भी उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए बुलाने की प्रक्रिया जारी रखी। उनके वापस लौटने के बाद कानूनी गतिविधियां तेज हुईं और अंततः बुधवार सुबह उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

शिरंथी राजपक्षे के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं। गिरफ्तारी का अर्थ दोषसिद्धि नहीं है और मामला अब अदालत तथा जांच एजेंसियों की प्रक्रिया से आगे बढ़ेगा।

भ्रष्टाचार निरोधक आयोग की जांच में यदि वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों से कथित अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो आगे अतिरिक्त आरोप जोड़े जा सकते हैं। वहीं बचाव पक्ष को भी अपने तर्क और दस्तावेज पेश करने का अवसर मिलेगा।

श्रीलंका में हाल के वर्षों में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों की जांच को लेकर राजनीतिक बहस तेज रही है। पूर्व सरकारों और प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों से जुड़े मामलों पर जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

शिरंथी राजपक्षे की गिरफ्तारी इसी क्रम की एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। हालांकि इस मामले में जांच का पूरा परिणाम अभी सामने आना बाकी है।

फिलहाल अधिकारियों का मुख्य ध्यान सिरिलिया सविया संगठन से जुड़े बैंक खातों, कथित सरकारी धन और वित्तीय लेनदेन की जांच पर है। शिरंथी राजपक्षे से पूछताछ और दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद मामले की अगली कानूनी दिशा तय होगी।

बुधवार को हुई गिरफ्तारी के बाद श्रीलंका की राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजर अब इस बात पर है कि अदालत मामले में क्या आदेश देती है और जांच एजेंसियां आगे कौन से सबूत पेश करती हैं।

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