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पाकिस्तान में खाने का संकट 60% आबादी पौष्टिक आहार से दूर

Ratna Netam
5 Oct 2026 3:58 PM IST
पाकिस्तान में खाने का संकट 60% आबादी पौष्टिक आहार से दूर
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में खाद्य और पोषण की स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के एक आकलन में गंभीर चिंता सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी पौष्टिक और संतुलित भोजन का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है। इसके चलते देश में कुपोषण की समस्या बनी हुई है और खान-पान से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियों का बोझ भी बढ़ रहा है। आकलन में पाकिस्तान की खाद्य व्यवस्था में तत्काल सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया है।
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, FAO के आकलन 'Food Supply for Healthy Diets in Pakistan' में देश में उपलब्ध खाद्य पदार्थों और लोगों को स्वस्थ रहने के लिए आवश्यक भोजन के बीच बड़े अंतर की ओर ध्यान दिलाया गया है। इसमें पाकिस्तान के राष्ट्रीय खाद्य-आधारित आहार दिशानिर्देशों को आधार बनाकर यह समझने की कोशिश की गई कि देश की खाद्य आपूर्ति लोगों की पोषण संबंधी जरूरतों को किस हद तक पूरा कर रही है।
आकलन में सामने आया कि केवल पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध होना ही पोषण की समस्या का समाधान नहीं है। लोगों तक ऐसा भोजन पहुंचना भी जरूरी है जिसमें शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हों। अगर परिवारों की आर्थिक स्थिति उन्हें संतुलित और पौष्टिक आहार खरीदने की अनुमति नहीं देती है तो खाद्य पदार्थ बाजार में उपलब्ध होने के बावजूद कुपोषण की समस्या बनी रह सकती है।
FAO ने कहा कि पाकिस्तान इस समय कुपोषण के कई रूपों का सामना कर रहा है। एक तरफ ऐसे लोग हैं जिन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा है, वहीं दूसरी तरफ असंतुलित और अस्वास्थ्यकर भोजन के कारण गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसका मतलब यह है कि समस्या सिर्फ भोजन की मात्रा से नहीं, बल्कि भोजन की गुणवत्ता और लोगों की उस तक पहुंच से भी जुड़ी हुई है।
आकलन के मुताबिक, अस्वास्थ्यकर आहार दोहरी चुनौती पैदा कर रहा है। पौष्टिक तत्वों की कमी कुपोषण को बढ़ाती है, जबकि अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन दूसरी तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इस तरह देश को एक साथ पोषण की कमी और खान-पान से संबंधित बीमारियों के बढ़ते खतरे से निपटना पड़ रहा है।
पाकिस्तान में बड़ी आबादी के लिए स्वस्थ आहार का खर्च उठा पाना भी प्रमुख समस्या के रूप में सामने आया है। जब परिवारों की आमदनी का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों पर खर्च होता है, तब भोजन के चुनाव में कीमत एक महत्वपूर्ण कारक बन जाती है। ऐसे में पौष्टिक विकल्प महंगे होने पर परिवार सस्ते और आसानी से उपलब्ध खाद्य पदार्थों की तरफ जा सकते हैं। इससे भोजन तो मिल जाता है, लेकिन जरूरी नहीं कि शरीर की सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी हों।
FAO के आकलन में देश की मौजूदा खाद्य आपूर्ति और राष्ट्रीय आहार दिशानिर्देशों के मुताबिक आवश्यक खाद्य पदार्थों के बीच अंतर का विश्लेषण किया गया है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि लोगों के लिए स्वस्थ आहार सुनिश्चित करने के रास्ते में कौन-कौन सी चुनौतियां मौजूद हैं। इसमें खाद्य उपलब्धता के साथ-साथ पोषण गुणवत्ता को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
पाकिस्तान में कुपोषण की समस्या बच्चों और महिलाओं सहित संवेदनशील आबादी के लिए विशेष चिंता का विषय बन सकती है। पर्याप्त पोषण न मिलने का असर शारीरिक विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और दैनिक जीवन की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। वहीं लंबे समय तक असंतुलित भोजन का सेवन कई गैर-संचारी रोगों के जोखिम से जुड़ा माना जाता है।
आकलन यह संकेत देता है कि खाद्य व्यवस्था को केवल अनाज या कैलोरी की उपलब्धता के नजरिए से देखने के बजाय विविध और पौष्टिक आहार की उपलब्धता के आधार पर भी परखा जाना चाहिए। फल, सब्जियां, दालें, दूध और अन्य पोषक खाद्य पदार्थों तक लोगों की पहुंच बेहतर बनाना स्वस्थ आहार की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
रिपोर्ट में सामने आई स्थिति इस बात की ओर भी ध्यान खींचती है कि खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े होने के बावजूद अलग-अलग पहलू हैं। किसी व्यक्ति के पास पेट भरने के लिए पर्याप्त भोजन हो सकता है, लेकिन यदि उस भोजन में जरूरी पोषक तत्व नहीं हैं तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रह सकती हैं।
FAO का यह आकलन पाकिस्तान के लिए ऐसे समय सामने आया है जब पौष्टिक भोजन की उपलब्धता और उसे खरीद पाने की क्षमता को लेकर चिंता बनी हुई है। 60 प्रतिशत से अधिक आबादी का स्वस्थ आहार का खर्च नहीं उठा पाना समस्या के व्यापक स्तर को दर्शाता है।
आकलन के निष्कर्षों के अनुसार, पाकिस्तान को ऐसी खाद्य व्यवस्था की जरूरत है जिसमें पौष्टिक भोजन न केवल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो, बल्कि आम लोगों की आर्थिक पहुंच में भी हो। खाद्य आपूर्ति और स्वस्थ आहार की वास्तविक जरूरतों के बीच मौजूद अंतर को कम करना कुपोषण तथा खान-पान से जुड़ी बीमारियों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
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