
x
KATHMANDU काठमांडू: अधिकारियों ने बताया कि रविवार को नेपाल के गोरखा ज़िले में बूढ़ी गंडकी नदी में मलबे के साथ आए अचानक बाढ़ के पानी ने 35 से ज़्यादा घरों और पुलों को बहा दिया और एक पनबिजली परियोजना को भी नुकसान पहुँचाया। साथ ही, नदी के किनारे रहने वाले लोगों से ऊँचे इलाकों में जाने की अपील की गई है। गोरखा ज़िला प्रशासन कार्यालय के असिस्टेंट चीफ़ डिस्ट्रिक्ट ऑफ़िसर नेत्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि ज़िला प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है।
'काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, चुमनुबरी रूरल म्युनिसिपैलिटी-3 के वार्ड अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि गंडकी प्रांत में आई इस बाढ़ ने सल्लेरी, पैयुका और जगत में नदी के किनारे बने घरों के साथ-साथ वार्ड को जोड़ने वाले एक सस्पेंशन ब्रिज को भी बहा दिया। गोरखा के चीफ़ डिस्ट्रिक्ट ऑफ़िसर धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
पानी के अचानक बढ़ने का कारण अभी साफ़ नहीं है। स्थानीय लोगों को शक है कि चुमनुबरी-6 में लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी 'स्यार' का बहाव रुकने की वजह से यह बाढ़ आई हो सकती है। शर्मा ने बताया कि शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ ने ज़िले की चुमनुबरी रूरल म्युनिसिपैलिटी में लगभग तीन दर्जन घरों को बहा दिया है।
'ऑनलाइन खबर' न्यूज़ पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, चुमनुबरी रूरल म्युनिसिपैलिटी की डिप्टी चेयर लक्ष्मी गुरुंग ने कहा कि आज सुबह बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़, रसुवा में आई भोटेकोशी बाढ़ की याद दिलाती है। उन्होंने कहा, "बूढ़ी गंडकी की बाढ़ भोटेकोशी बाढ़ की याद दिलाती है। इसने दर्जनों घरों को बहा दिया है। अभी नुकसान के सही स्तर के बारे में कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है।"
बाढ़ सुबह करीब 4 बजे आई, जिससे स्थानीय लोग सुरक्षित जगहों की ओर भागने लगे। लक्ष्मी ने बताया कि बाढ़ के पानी से चुमनुबरी रूरल म्युनिसिपैलिटी-3 के बाज़ार को काफ़ी नुकसान पहुँचा है। 26 अगस्त को रसुवा ज़िले में भोटे कोशी नदी में ज़बरदस्त बाढ़ आई। नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, रसुवा और त्रिशूली नदी के इलाकों में आई बाढ़ से 1,455 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5,285 लोग लापता हो गए।
गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने बताया कि बाढ़ ने चुमनुबरी-3 में न्याकचेट और फिलिम बाज़ार को जोड़ने वाले पुल को भी बहा दिया। उन्होंने कहा कि नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बचाव कार्यों, राहत सामग्री बांटने और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए थे। बचाव और राहत कार्यों को अंजाम देने के लिए नेपाल पुलिस, आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स और स्थानीय अधिकारियों को तैनात किया गया था।
राम कुमार ने कहा, "बाढ़ सुबह-सुबह आ गई और हम अपना सामान भी नहीं निकाल पाए।" उन्होंने कहा, "जैसे ही हमें पता चला कि बाढ़ आ रही है, सब लोग भाग खड़े हुए।" उन्होंने बताया कि नुकसान का पूरा अंदाज़ा अभी नहीं लग पाया है। निवासियों ने बताया कि चुमलिंग और लोकपा समेत नदी के किनारे बसे इलाकों के लोग सुबह करीब 4 बजे धाराओं से तेज़ दहाड़ जैसी आवाज़ें सुनकर अपने घरों से भाग निकले। स्थानीय होटलों में ठहरे पर्यटक भी वहां से भाग गए। लोकपा के निवासी शेरप गुरुंग ने कहा कि आवाज़ से ऐसा लग रहा था जैसे पानी का बहाव बार-बार रुक रहा हो और फिर शुरू हो रहा हो। उन्होंने कहा, "अंधेरा होने के कारण हम यह नहीं बता पाए कि धारा रुक गई थी या भूस्खलन हुआ था। बारिश भी नहीं हुई थी।" अधिकारी नदी के किनारे रहने वाले लोगों को चेतावनी देने और उन्हें सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहने के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल कर रहे थे।
Next Story





