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काठमांडू : नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,003 हो गई है, जबकि करीब 4,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों की तलाश में जुटी हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई दुर्गम इलाकों में अब भी रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और अचानक आई बाढ़ के कारण और भी भयावह हो गई। तेज बहाव वाले पानी और मलबे ने कई गांवों, सड़कों, पुलों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से टूट गया है।
हजारों लोगों की तलाश जारी
नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के मुताबिक, अभी भी हजारों लोग लापता हैं। इनमें स्थानीय नागरिकों के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि करीब 3,916 लोग नेपाल में लापता हैं, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
लापता लोगों की तलाश के लिए सेना, पुलिस और स्थानीय बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। कई जगहों पर मलबा हटाने और सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण बचाव कार्य में मुश्किलें आ रही हैं।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्टों में फंसे लोग
बाढ़ से नेपाल के कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुए हैं। कई कर्मचारी सुरंगों और निर्माण स्थलों में फंस गए हैं। बचाव दल भारी मशीनों और आधुनिक उपकरणों की मदद से इन जगहों पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आई बाढ़ का असर सबसे ज्यादा उन इलाकों पर पड़ा है जहां नदियां तेज बहाव के साथ बहती हैं और आबादी नदी किनारे बसी हुई है।
भारत समेत कई देशों ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की इस बड़ी आपदा में भारत समेत कई देशों ने राहत और बचाव कार्य में सहयोग किया है। बचाव दलों के साथ चिकित्सा सहायता और जरूरी उपकरण भी भेजे गए हैं। भारतीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू और राहत कार्यों में मदद कर रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहायता के बावजूद कई इलाकों तक पहुंचना अभी भी मुश्किल बना हुआ है। सड़कें टूटने और पुल बहने के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में परेशानी हो रही है।
शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव मिलने से उनकी पहचान करना भी प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। कई शवों की हालत खराब होने के कारण डीएनए जांच और अन्य तरीकों से पहचान की जा रही है।
अस्पतालों और राहत केंद्रों में लोग अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। कई परिवार अब भी अपने प्रियजनों के मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।
जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चिंता
विशेषज्ञों ने इस आपदा को हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिम से जोड़कर देखा है। ग्लेशियरों में बदलाव और मौसम के बदलते पैटर्न के कारण पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।
नेपाल सरकार ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए सहयोग की अपील की है।
हालात पर बनी हुई है नजर
नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे दूरदराज के इलाकों तक टीमें पहुंच रही हैं, मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
फिलहाल पूरा ध्यान फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश पर है। यह आपदा नेपाल के इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदियों में से एक बन गई है।
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